भाग 10 · अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र
अनुच्छेद 244क असम के कुछ जनजाति को समाविष्ट करने वाला एक स्वशासी
- राज्य बनाना और उसके लिए स्थानीय या मंत्रि-परिषद् का या दोनों का क्षेत्रों स (1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, संसद् विधि द्वारा असम विधान-मंडत्र राज्य के भीतर एक स्वशासी राज्य बना सकेगी, छठी अनुसूची के पैरा 20 से सृजन -- संलग्न सारणी के भाग में सभी या कोई जनजाति (पूर्णतः या जिसमें भागतः) समाविष्ट होंगे और उसके लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र (क) उस स्वशासी राज्य के के रूप में कार्य करने के लिए -- या भागतः और भागतः निकाय का; या (ख) मंत्रि-परिषद् का, विधान-मंडत्र या दोनों का स कर सकेगी, से प्रत्येक का गठन, शक्तियां और कृत्य वे होंगे निर्वाचित नामनिर्देशित निर्वाचित जो उस विधि में किए जाएं ।
- (2) खंड (1) भ. सृजन जिनमें स्थान पर प्रतिस्थापित । । में निर्दिष्ट विधि, विशिष्टतया, 2. (उनचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 2 द्वारा (1-4-1985 से) “और मेघालय” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 4. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “पहली अनुसूची के भाग क या भाग ख में शब्दों और का लोप किया गया । संविधान राज्यों और मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । मिजोरम स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान 143 विनिर्दिष्ट” अक्षरों मिजोरम संविधान पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, क्षेत्र) (भाग 0-अनसूचित और जनजाति समवर्ती विनिर्दिष्ट (क) राज्य सूची या सूची में प्रगणित वे विषय कर सकेगी जिनके संबंध मैं स्वशासी राज्य के विधान-मंडल को संपूर्ण स्वशासी राज्य के लिए या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति, असम राज्य के विधान-मंडल का अपवर्जन करके या अन्यथा, होगी
- (ख) वे विषय परिनिश्चित कर सकेगी जिन पर उस स्वशासी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार होगा; उद्गृहीत (ग) यह उपबंध कर सकेगी कि असम राज्य द्वारा उद्गह कोई कर स्वशासी राज्य को वहां तक सौंपा जाएगा जहां तक उसके आगम स्वशासी राज्य से प्राप्त हुए माने जा सकते हैं; निर्देश (घ) यह उपबंध कर सकेगी कि इस संविधान के किसी अनुच्छेद में राज्य निर्देश के प्रति किसी श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत स्वशासी राज्य के प्रति श है; और
- (ड) ऐसे अनपूरक, आनुषंगिक या पारिणामिक उपबंध कर सकेगी जो पूर्वोक्त आवश्यक समझे जाएं । विनिर्दिष्ट (3) प्रकार की किसी विधि का कोई संशोधन, जहां तक वह संशोधन खंड (2) के उपखंड (क) या उपखंड (ख) में विषयों में से किसी से संबंधित है, तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक वह संशोधन संसद् के प्रत्येक सदन मैं उपस्थित और मत देने ने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों दवारा पारित नहीं कर दिया जाता है । निर्दिष्ट विधि (4) इस अनच्छेद में को अनच्छेद द 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन इस बात के होते हए भी नहीं समझा जाएगा कि उसमें कोई ऐसा अंतर्विष्ट उपबंध है जो इस संविधान का संशोधन करता है या संशोधन करने का प्रभाव रखता है । भाग 11 संघ और राज्यों के बीच संबंध अध्याय 1– - विधायी संबंध विधायी शक्तियों का वितरण
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद असम के भीतर स्वायत्त राज्य की अनुमति देता है। संसद कानून से असम के जनजातीय क्षेत्रों से, पूरे या अंशतः, स्वायत्त राज्य बना सकती है। ऐसा कानून वहां स्थानीय विधान-मंडल और मंत्रिपरिषद बना सकता है। वह उनकी शक्तियों के विषय भी बता सकता है। यह उपबंध कभी इस्तेमाल नहीं हुआ।