भाग 22 · संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, [हिंदी भ, में प्राधिकृत पाठ] और निरसन

अनुच्छेद 395 भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, कथित अधिनियम की, अधिनियमितियों

  1. 1935 का, पश्चात ् संशोधक या अनुपूरक सभी के साथ, जिनके अंतर्गत प्रिवी कौंसिल अधिकारिता उत्सादन अधिनियम, 1949 नहीं है, इसके दूवारा निरसन किया जाता है । संविधान पहली अनुसूची (अनुच्छेद (अनुच्छे द 1 और अनुच्छेद द 4) नाम राज्यक्षेत्र. वे जो आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 3 की उपधारा (में, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उपधारा में, आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 की प्रथम असम अनुसूची में और आंध्र प्रदेश श और मैसूर (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम, 1968 की अनुसूची में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं थवे राज्यक्षेत्र हैं जो आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 की द्वितीय अनुसूची में तथा आंध्र प्रदेश श पुनगर्ठन 2014 की विनिर्दिष्ट हैं, किंतु धारा 3 में ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं राज्यों और असम जनजाति में समाविष्ट थे, तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो असम (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1951 की अनुसूची में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं जो क्षेत्रों किंतु नागालैंड राज्य अधिनियम, 1962 की धारा 3 की उपधारा (1) में ष्ट और वे भी इसके अंतर्गत नहीं हैं 5 विनिर्दिष्ट हैं जो (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की धारा 5, धारा 6 और धारा 7 में विनिर्दिष्ट हैं गूऔर राज्यक्षेत् पूर्वोत्तर ष्ट । और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं जो संविधान क्षेत्र (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 के खंड (क) मैं विनिर्दिष्ट हैं किसी बात के होते हुए भी, जहां तक उसका संबंध संविधान (एक सौवां अंतर्विष्ट संशोधन) अधिनियम, 2015 की दूसरी अनुसूची के भाग में ष्ट से है, संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की निर्दिष्ट दूसरी अनुसूची के भाग 1 ष्ट । राज्यक्षेत्रों में निर्दिष्ट हैं ० (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 2 द्वारा (1-11-1956 से)पहली अनुसूची के स्थान पर । प्रविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । के 3. आंध्र प्रदेश श पुनगर्ठन 2014 (2014 का 6) की धारा 10 दूवारा (2-6-2014 से) अंतःस्थापित ।. । प्रतिस्थापित ।. के पाठ के लिए परिशिष्ट 1 खे । संविधान पूर्ववर्ती पुनर्गठन अधिनियम, नागालैंड पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, संविधान १ देंखे । (पहली अनुसूची) नाम राज्यक्षेत्र 3. 1 शु4. गुजरात वे राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले या तो बिहार प्रांत मैं समाविष्ट थे या इस प्रकार प्रशासित थे मानो वे उस प्रांत के भाग रहे केरल हों और वे राज्यक्षेत्र जो बिहार और प्रदेश श 1968 की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (क) मैं ष्ट मध्य प्रदेश तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो बिहार और पश्चिमी बंगाल (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उपधारा में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं जो प्रथम अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (ख) में ष्ट और उत्तर (सीमा-परिवर्तन) वे राज्यक्षेत्र जो बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 3 मैं अधिनियम, विनिर्दिष्ट ष्ट । हैं, किंतु विनिर्दिष्ट हैं वर्णित 4. गुजरात वे राज्यक्षेत्र जो मुंबई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 की धारा 3 की उपधारा विनिर्दिष्ट हैं (1) ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं 5. केरल वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 5 की उपधारा (1) मैं ष्ट । में निर्दिष्ट हैं 6. मध्य प्रदे श वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 9 की उपधारा में तथा राजस्थान और मध्य प्रदेश श अंतरण) विनिर्दिष्ट हैं अधिनियम, 1959 की प्रथम अनुसूची में ष्ट इनके अंतर्गत मध्य प्रदेश श पुनगर्ठन 2000 की धारा 3 मैं ष्ट हैं । “तूथा (राज्यक्षेत्र विनिर्दिष्ट हैं किन्तु पुनर्गठन अधिनियम, विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नहीं प्रविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित । ० 3. मुंबई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 (1960 का की धारा 4 दूवारा (1-5-1960 से) प्रविष्टि 4 के स्थान पर । के 4. राजस्थान और मध्य प्रदेश श अंतरण) अधिनियम, 1959 (1959 का 47) की धारा 4 द्वारा (1-10-1959 से) अंतःस्थापित । । बिहार उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, पूर्ववर्ती प्रतिस्थापित ।. बिहार पुनर्गठन अधिनियम, (राज्यक्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम, (पहली अनुसूची) नाम राज्यक्षेत्र तमिलनाडु मैं समाविष्ट थे या इस प्रकार प्रशासित थे मानो वे उस प्रांत के भाग रहे थृतथा हों और वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 4 में विनिर्दिष्ट हैं किंतु तथा आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 की विनिर्दिष्ट हैं द्वितीय अनुसूची में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 3 की उपधारा (1) और धारा 4 की उपधारा (1) में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी विनिर्दिष्ट हैं इसके अंतर्गत नहीं हैं जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 5 की उपधारा (1) के खंड (ख), धारा 6 और धारा 7 की उपधारा (1) के विनिर्दिष्ट हैं खंड (घ) में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं जो आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 की प्रथम अनुसूची में ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं, किन्तु 4 में निर्दिष्ट 8. महाराष्ट्र वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 8 की हैं उपधारा में ष्ट वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो मुंबई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 की धारा 3 की उपधारा (1) ष्ट कर्नाटक पुनगर्टन अधिनियम, । विनिर्दिष्ट हैं, “किंतु 5 9. कनार्टक वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनगठर् न 1956 की धारा 7 की विनिर्दिष्ट उपधारा में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो आंध्र प्रदेश श और मैसूर (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम, 1968 की अनुसूची मैं हैं ष्ट । ० के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । फ़ 2. आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 (1959 का 56) की धारा 6 द्वारा (ध-4-960 से) अंतःस्थापित ।. । द्य. 3. आंध्र प्रदेश श और मद्रास (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1959 (1959 का 56) की धारा 6 द्वारा (1-4-1960 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । प्रविष्टि 9 से 15 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । अंतःस्थापित । (पहली अनुसूची) नाम राज्यक्षेत्र ' 0. शूओडिशा 10. वे राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारम्भ से ठीक पहले या तो उड़ीसा प्रांत पंजाब मैं समाविष्ट थे या इस प्रकार प्रशासित थे मानो वे उस प्रांत के भाग रहे हों । । राजस्थान 11. पंजाब वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र जो अिजर्त राज्यक्षेत्र (विलयन) अधिनियम, 1960 की प्रथम अनुसूची के भाग 2 में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की पहली अनुसूची के भाग 2 में ष्ट और वे विनिर्दिष्ट हैं. अर्जित राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 निर्दिष्ट हैं. “किंतु की धारा 3 की उपधारा (1), धारा 4 और धारा 5 की उपधारा (1) ष्ट । निर्दिष्ट हैं में 1 विनिर्दिष्ट हैं 12. राजस्थान वे राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 10 में ष्ट 6 तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो राजस्थान विनिर्दिष्ट हैं, शुकितु और मध्य प्रदेश श अंतरण) अधिनियम, 1959 की प्रथम अनुसूची (राज्यक्षेत्र में ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं छा के 06०. (७. कु. मुंबई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 (1960 का की धारा 4 दूवारा (1-5-1960 से) प्रविष्टि 8 से 14 तक को प्रविष्टि 9 से 15 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । उड़ीसा परिवर्तन) 4. (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 द्वारा (17-1-1961 से) जोड़ा गया । अर्जित राज्यक्षेत्र (विलयन) अधिनियम, 5. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (1966 का 31) की धारा 7 दूवारा (1-11-1966 से) जोड़ा गया । संविधान 6. राजस्थान और मध्य प्रदेश श अंतरण) अधिनियम, 1959 (1959 का 47) की धारा 4 द्वारा (द-0-4959 से) अंतःस्थापित । (राज्यक्षेत्र (पहली अनुसूची) नाम राज्यक्षेत्र 13. प्रदे श 2 उत्तर प्रदेश वे जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले या तो संयुक्त प्रांत नाम से प्रांत में समाविष्ट थे या इस प्रकार प्रशासित थे मानो पश्चिमी वे उस प्रांत के भाग रहे हों, वे राज्यक्षेत्र जो बिहार और प्रदेश श बंगाल 1968 की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (ख) में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र जो हरियाणा और प्रदेश श थवे राज्यक्षेत्र 1979 की धारा 4 की उपधारा (1) के खंड ज्ञात (ख) में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो बिहार उत्तर और प्रदेश श 1968 की धारा 3 की (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, उपधारा (1) के खंड (क) तथा प्रदेश श पुनगर्ठन 2000 विनिर्दिष्ट हैं उत्तर की धारा 3 मैं ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, जो हरियाणा और प्रदेश श 1979 की धारा विनिर्दिष्ट हैं, किंतु 4 की उपधारा (1) के खंड (क) में ष्ट । उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 1 उत्तर पुनर्गठन अधिनियम, 14. पिश्चमी वे राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले या तो पश्चिमी विनिर्दिष्ट हैं बंगाल बंगाल प्रांत में समाविष्ट थे या इस प्रकार प्रशासित थे मानो वे उस प्रांत उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, के भाग रहे हों और चंद्रनगर (विलयन) अधिनियम, 1954 की धारा 2 के विनिर्दिष्ट हैं खंड (ग) मैं यथा परिभाषित चंद्रनगर का राज्यक्षेत्र और वे राज्यक्षेत्र भी जो बिहार और पश्चिमी बंगाल (राज्यक्षेत्र अंतरण) अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उपधारा में ष्ट और वे राज्यक्षेत्र भी, जो पहली अनुसूची के भाग 3 में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं, जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 के खंड (ग) मैं किसी बात के होते हुए भी, जहां तक उसका संबंध विनिर्दिष्ट हैं संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली अनुसूची के निर्दिष्ट हैं किंतु भाग 3 में ष्ट और दूसरी अनुसूची के भाग 3 में ष्ट से है, संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की अंतर्विष्ट दूसरी अनुसूची के भाग 3 में ष्ट । निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों निर्दिष्ट हैं प्रविष्टि 9 से 15 तक के रूप मैं पुनःसंख्यांकित किया गया । ० “13. प्रदेश” श” के सामने की प्रविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित । । के. 4. (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की धारा 3 द्वारा (31-7-2015 से) जोड़ा गया । उक्त अधिनियम के पाठ के लिए परिशिष्ट १ खे । हरियाणा उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, उत्तर उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, संविधान देंखे । (पहली अनुसूची) अुगु ।5. नागालैंड नाम राज्यक्षेत्र में विनिर्दिष्ट हैं अुशू हरियाणा गवे राज्यक्षेत्र 1 ** * * * अु7. हिमाचल प्रदेश 15. 3 4 अूथ8. मणिपुर वे राज्यक्षेत्र जो नागालैंड राज्य अधिनियम, 1962 की धारा 3 की उपधारा (1) ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम,4979 की 16. विनिर्दिष्ट हैं, किंतु 3 5 6 विनिर्दिष्ट हैं वे जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 3 की उपधारा (1) मैं ष्ट और वे राज्यक्षेत्र जो हरियाणा और प्रदेश श धारा 4 की उपधारा (1) के ज्ञात खंड (क) में ष्ट तु वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं जो उस अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) में ष्ट । में विनिर्दिष्ट हैं 17. 3 7 ज्ञात वे राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले इस प्रकार प्रशासित प्रदे श थे मानो वे हिमाचल प्रदेश श और बिलासपुर के नाम से मुख्य आयुक्त वाले प्रांत रहे हों और वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 5 की उपधारा (1) ष्ट । नी 18. 3 8 पा वह राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले इस प्रकार प्रशासित था मानो वह मणिपुर के नाम से मुख्य आयुक्त वाला प्रांत फर्श रहा हो । फ्. संबधित प्रविष्टि 15 को हटा दिया गया । प्रविष्टि 9 से 15 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । प्रविष्टि 29 को प्रविष्टि 15 से प्रविष्टि 28 के रूप में पुनःसंखयांकित किया गया । तत्पश्चात ् और प्रदेश श 1979 (1979 का 31) की धारा 5 द्वारा (द5-9-4983 से) उसमें की प्रविष्टि को संशोधित किया गया । “17. हरियाणा” के सामने की प्रविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित । । हरियाणा उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, 8. (पुनगर्ठन) 1971 (1971 का 81) की धारा 9 दूवारा (21-1-1972 से) अंतःस्थापित । । हरियाणा उत्तर (सीमा-परिवर्तन) अधिनियम, हिमाचल प्रदेश पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (पहली अनुसूची) नाम राज्यक्षेत्र 19. वह राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले इस प्रकार 9. त्रिपुरा प्रशासित था मानो वह त्रिपुरा के नाम से मुख्य आयुक्त वाला प्रांत रहा हो और वे राज्यक्षेत्र जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 मेघालय की धारा 3 के खंड (घ) में किसी बात के होते हुए भी जहां तक उनका संबंध संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली ' *ू2. सिक्किम अनुसूची के भाग 2 में ष्ट से है, संविधान (एक साँवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली अनुसूची के भाग 2 में ष्ट मिजोरम । ' शू23. अरुणाचल 1 ष्ट और वे राज्यक्षेत्र, जो पहली अनुसूची के भाग में ष्ट ' गू24. गोवा वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं, जो संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की दस अनुसच के भाग 2 में ष्ट ज्ञात । अंतर्विष्ट 21. 1 3 निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों वे राज्यक्षेत्र जो संविधान संशोधन) अधिनियम, 1975 के प्रारंभ भ निर्दिष्ट से ठीक पहले सिक्किम में समाविष्ट थे । हैं 22. पूर्वोत्तर क्षेत्र 1 4 विनिर्दिष्ट हैं निर्दिष्ट वे राज्यक्षेत्र जो (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की धारा 6 हैं किन्तु ष्ट । दूसरी अनुसूची निर्दिष्ट हैं 23. अरुणाचल 1 5 (छत्तीसवां वे राज्यक्षेत्र जो (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की धारा 7 में प्रदे हैं ष्ट । पूर्वोत्तर क्षेत्र ७6 में 24. गोवा विनिर्दिष्ट हैं 1 6 वे राज्यक्षेत्र जो गोवा, दमण और दीव पुनर्गठन अधिनियम, 1987 की पूर्वोत्तर क्षेत्र धारा 3 में ष्ट । विनिर्दिष्ट विनिर्दिष्ट हैं प्रविष्टि 29 को प्रविष्टि 15 से प्रविष्टि 28 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । कु छा के ०. के पाठ के लिए परिशिष्ट १ खे । अंतःस्थापित । संविधान देंखे । संविधान (छत्तीसवां मिजोरम (पहली अनुसूची) छत्तीसगढ़ पुनर्गठन अधिनियम, विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र नाम राज्यक्षेत्र ' श26. उत्तराखंड उत्तर पुनर्गठन अधिनियम, ' थू25. विनिर्दिष्ट हैं 25. मध्य प्रदेश श पुनगर्ठन 2000 की धारा 3 में ष्ट । विनिर्दिष्ट हैं पुनर्गठन अधिनियम, 26. विनिर्दिष्ट हैं 1 3 वे राज्यक्षेत्र जो प्रदेश श पुनगर्ठन 2000 की धारा 3 मैं ष्ट । दिल्‍ली ' अ27. झारखंड 1 5 वे राज्यक्षेत्र जो बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 3 में ष्ट । ' ध28. तेलंगाना 1 6 के वे राज्यक्षेत्र जो आंध्र प्रदेश श पुनगर्ठन 2014 की धारा 3 में ष्ट । पा फ़ द्य नाम विस्तार. ०. आयुक्त वाले प्रांत में समाविष्ट था थ। न न न न श् गू2. 2. अंदमान और वह राज्यक्षेत्र जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले अंदमान और पुनर्गठन अधिनियम, निकोबार दूवीप निकोबार दूवीप के मुख्य आयुक्त वाले प्रांत मैं समाविष्ट था ८० उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, उत्तरांचल परिवर्तन) “उत्तरांचल” (७ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 6 द्वारा (31-10-2019 से) प्रविष्टि 16 से प्रविष्टि 29 को प्रविष्टि 15 से प्रविष्टि 28 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । संबंधित प्रविष्टि 2 का लोप किया गया और प्रविष्टि 3 से प्रविष्टि 10 तक को प्रविष्टि 2 से प्रविष्टि 9 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया तथा तत्पश्चात ् (पुनगर्ठन) 1971 (1971 का 81) की धारा 9 दूवारा (21-1-1972 से) मणिपुर और त्रिपुरा आदि से संबंधित प्रविष्टि 2 और प्रविष्टि 3 का लोप किया गया और पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, पुनःसंख्यांकित किया गया । को क्रमशः प्रविष्टि 2 से प्रविष्टि 7 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । (पहली अनुसूची) नाम विस्तार थलक्षदवीप 3. 2 दादरा और नागर हवेली और दमण और वह राज्यक्षेत्र जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 6 मैं दीव ष्ट है । पथ 3 शू 6. शपूडचेरी 4. दादरा और नागर वह राज्यक्षेत्र जो 11 अगस्त, 1961 से ठीक पहले स्वतंत्र दादरा ग7. चंडीगढ़ और दमण और और नागर हवेली में समाविष्ट था तथा वे राज्यक्षेत्र जो गोवा, दमण और दीव पुनर्गठन अधिनियम, 1987 की धारा 4 में ष्ट विनिर्दिष्ट । न के विनिर्दिष्ट न के * * * हैं 5 6. वे राज्यक्षेत्र जो 16 अगस्त, 1962 से ठीक पहले भारत में पांडिचेरी, कारिकल, माही और यनम के नाम से फ्रांसीसी ज्ञात बस्तियों में समाविष्ट थे । 7 7. चंडीगढ़ वे राज्यक्षेत्र जो पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 4 मैं विनिर्दिष्ट हैं ष्ट । ० ता प्रविष्टि 9 तक को प्रविष्टि 2 से प्रविष्टि 7 तक के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । फ़ (द-4-973 से) *लक्कादीव, मिनिकोय, अमीनदीवी द्वीप” के स्थान पर प्रतिस्थापित । द्य संबंधित प्रविष्टि 4 अन्तःस्थापित की गई थी । तथा तत्पश्चात ् दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव (संघ का विलयन) अधिनियम, 2019 (2019 का 44) की धारा 5 दूवारा (19-12-2019 से) प्रविष्टि 4 और पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, प्रविष्टि 5 के स्थान पर प्रतिस्थापित । के के स्थान पर । लक्कादीव, मिनिकोय 5. (चौदहवां संशोधन) अधिनियम, 1962 की धारा 3 द्वारा प्रभाव से) अंतःस्थापित ।. । स्थान पर । संविधान राज्यक्षेत्रों स्थान पर प्रतिस्थापित । स्थान पर प्रतिस्थापित ।. संविधान (भूतलक्षी पांडिचेरी परिवर्तन) (पहली अनुसूची) नाम विस्तार । विनिर्दिष्ट 1 विनिर्दिष्ट न न न थी द ई हा ई ड * शू8. अधिनियम, 8. जम्मू-कश्मीर वे राज्यक्षेत्र, जो जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 4 मैं ष्ट है । 3 में ष्ट है । लोप किया. गया और अरुणाचल प्रदेश श संबंधी प्रविष्टि 9 को प्रविष्टि 8 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया और अरुणाचल प्रदेश श संबंधी प्रविष्टि 8 का अरुणाचल प्रदेश श 1986 (1986 का 69) की धारा 4 द्वारा (15-4-1987 से) लोप किया गया । दूसरी द अनुसूची अनुच्छेद द 59(3), 65(3), 75(6), 97, 125, 148(3), 158(3), 164(5), 186 और 221 भाग क राष्ट्रपति और *** राज्यों के राज्यपालों के बारे में उपबंध राष्ट्रपति 1 निम्नलिखित उपलब्धियों अर्थात्:-- का संदाय किया जाएगा, अथार्त ्:— 10,000 रुपए * । 1 राष्ट्रपति भत्तों गवर्नर गवर्मरों राज्य का राज्यपाल 5,500 रुपए **। राष्ट्रपति 2 गवर्नर गवर्नर 2 यथास्थिति, यथास्थिति, जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले क्रमशः भारत डोमिनियन के गवनर् जनरल को तथा तत्स्थानी प्रांतों के गवनर् को संदेय थे । विशेषाधिकारों के हकदार होंगे जिनके इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले क्रमशः गवनर् संविधान जनरल और तत्स्थानी प्रांतों के गवनर् हकदार थे । विनिर्दिष्ट” अक्षर रहा है या उसके रूप में कार्य कर रहा है या कोई व्यक्ति राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन कर रहा है तब वह ऐसी और विशेषाधिकारों का हकदार होगा जिनका, वित्त अधिनियम, वह राष्ट्रपति या राज्यपाल हकदार है जिसके कृत्यों का वह निर्वहन करता है या, जिसके रूप में वह कार्य करता है । व संविधान विनिर्दिष्ट” न न न न.. * संविधान के भाग क में शब्दों और का लोप किया गया । * संविधान 2018 (2018 का 13) की धारा 137 दूवारा (1-1-2016 से) अब यह “पांच लाख रुपए” है । ** 2018 (2018 का 13) की धारा 161 दूवारा (1-1-2016 से) अब यह “तीन लाख पचास हजार रुपए” है । शब्दों का लोप किया गया । स्थान पर प्रतिस्थापित । । लोप किया गया । (दूसरी (द अनुसूची) भाग ग अध्यक्ष उपाध्यक्ष अध्यक्ष उपाध्यक्ष लोक सभा के और के तथा राज्य सभा के सभापति और उपसभापति के तथा 1*** थुराज्य की विधान सभा के और के तथा विधान अध्यक्ष भत्तों परिषद् के सभापति और उपसभापति के बारे में उपबंध अध्यक्ष उपाध्यक्ष भत्तों का संदाय किया जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के को संदेय थे तथा लोक सभा के को और राज्य सभा अध्यक्ष उपाध्यक्ष के उपसभापति को ऐसे वेतन और का संदाय किया जाएगा जो इस संविधान के भेत्तों प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के को संदेय थे । अध्यक्ष उपाध्यक्ष विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को ऐसे वेतन और का संदाय किया जाएगा जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले क्रमशः तत्स्थानी प्रांत की विधान सभा के और को तथा विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को संदेय संविधान थे और जहां ऐसे प्रारंभ भ से ठीक पहले तत्स्थानी प्रांत की कोई विधान परिषद् नहीं थी अक्षर वहां उस राज्य की विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को ऐसे वेतन और का संदाय किया जाएगा जो उस राज्य का राज्यपाल अवधारित करे । संविधान विनिर्दिष्ट अक्षर के भाग क में के किसी राज्य का” शब्दों और का लोप किया गया । संविधान राज्य” के स्थान पर प्रतिस्थापित । के भाग क में किसी राज्य का” शब्दों और का लोप किया गया । राज्य” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (दूसरी (द अनुसूची) भाग घ उच्चतम न्यायालय और 1*** उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध के लिए प्रति मास निम्नलिखित दर से वेतन का संदाय किया जाएगा, अर्थात्: अथार्त -- मुख्य न्यायमूर्ति 10,000 रुपए ∗ कोई अन्य न्यायाधीश अू9,000 परंत यदि नियक्ति 9,000 रुपए: ** पूर्ववर्ती परं तु उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश अपनी के समय पूर्ववर्ती भारत सरकार की या उसकी सरकारों में से किसी की अथवा राज्य की सरकार क्षति की या उसकी सरकारों में से किसी की पूर्व सेवा के संबंध में (निःशक्तता या “निम्नलिखित अर्थात्: पेंशन से भिन्न कोई पेंशन प्राप्त कर रहा है तो उच्चतम न्यायालय में सेवा के लिए उसके वेतन में से को घटा दिया जाएगा, अथार्त - नियक्ति (क) उस पेंशन की रकम; और पेंशन (ख) यदि उसने ऐसी से पहले, ऐसी पूर्व सेवा के संबंध में अपने को देय य के एक भाग के बदले उसका संराशित मूल्य प्राप्त किया है तो नियुक्ति निवृत्ति: पेंशन के उस भाग की रकम; और
  2. (ग) यदि उसने ऐसी से पहले, ऐसी पूर्व सेवा के संबंध में उपदान प्राप्त किया है तो उस उपदान के समतुल्य पेंशन ।
  3. (2) उच्चतम न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश, बिना किराया दिए, शासकीय निवास के उपयोग का हकदार होगा ।
  4. (3) इस पैरा के उप-पैरा (2) की कोई बात उस न्यायाधीश को, जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले,— संविधान संविधान में के राज्यों में” शब्दों का लोप किया गया । (चौवनवां सशोधन) अधिनियम, 1986 की धारा 4 द्वारा (1-4-1986 से) “5,000 रुपए” के स्थान पर “10,000 रूपए” प्रतिस्थापित । । संविधान उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन अधिनियम, 2018 (2018 का ∗ की धारा 6 के अनुसार (1-1-2016 से) अब यह “दो लाख अस्सी हजार रुपए” है । प्रतिस्थापित । ** उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन अधिनियम, 2018 (2018 का 10) की धारा 6 के अनुसार (1-1-2016 से) अब यह “दो लाख पचास हजार रुपए” है । दी जाएगी” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । भारत का संविधान सं वधान 266 (दूसरी अनुसूची) अनु सू ची)
  5. (क) फेडरल न्यायालय के मुख्य मु न्यायमूर्ति य यायमू त के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ भ पर अनुच्छेद अनु छे द 374 के खंड ड (1) के अधीन उच्चतम उ चतम न्यायालय यायालय का मुख्य मु न्यायमूर्ति य यायमू त बन गया है; या (ख) फेडरल न्यायालय के किसी अन्य अ न्यायाधीश य यायाधीश के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ भ पर उक्त उ खंड खं ड के अधीन उच्चतम उ न्यायालय चतम यायालय का (मुख्य (मु न्यायमूर्ति य यायमू त से भिन्न) भ न्यायाधीश न) यायाधीश बन गया है, उस अवधि में, जिसमें म, वह ऐसे मुख्य मु न्यायमूर्ति य यायमू त या अन्य अ न्यायाधीश य यायाधीश के रूप में पद धारण करता है, लागू नहीं ं होगी और ऐसा प्रत्येक येक न्यायाधीश, जो इस प्रकार कार उच्चतम उ चतम न्यायालय यायालय का मुख्य मु न्यायमूर्ति य यायमू त या अन्य अ न्यायाधीश य यायाधीश बन जाता है, यथास्थिति, थ त, ऐसे मुख्य मु य न्यायमूर्ति यायमू त या अन्य अ न्यायाधीश य यायाधीश के जो इस प्रकार कार उच्चतम उ न्यायालय चतम यायालय का मुख्य मु य न्यायमूर्ति यायमू त या अन्य अ न्यायाधीश य यायाधीश बन जाता है, यथास्थिति, थ त, ऐसे मुख्य मु न्यायमूर्ति य यायमू त या अन्य अ य न्यायाधीश यायाधीश के रूप में वास्तविक वा सेवा त में बिताए से वा म बताए समय के लिए इस पैरा के उपपैरा (1) मैं विनिर्दिष्ट व वेतन न द ट वे तन के अतिरिक्त अ विशेष त वेतन र त वशेष वे तन के रूप में ऐसी रकम प्राप्त त करने का हकदार होगा जो इस प्रकार कार विनिर्दिष्ट व वेतन न द ट वे तन और ऐसे वेतन तन के अंतर के बराबर है जो वह ऐसे प्रारंभ भ से ठीक क पहले प्राप्त त कर रहा था ।
  6. (4) उ चतम यायालय का येक न्यायाधीश भारत के रा य के भीतर अपने उच्चतम न्यायालय प्रत्येक राज्यक्षेत्र कत य पालन में की गई या में म उपगत व्यय की तपू त के लिए ऐसे यु तयु त भ ते कर्तव्य यात्रा प्रतिपूर्ति युक्तियुक्त भत्ते त करे गा और या संबंधी उसे ऐसी यु तयु त सु वधाएं द जाएंगी जो रा प त प्राप्त करेगा यात्रा युक्तियुक्त सुविधाएं दी राष्ट्रपति समय-समय पर व हत करे । विहित (5) उ चतम यायालय के यायाधीश की अनु पि थ त छु के (जिसके अंतर्गत छु हैं) ते ह) और पेंशन के संबंध में अ धकार उन उपबंधों से शा सत ह गे जो इस उच्चतम न्यायालय न्यायाधीशों अनुपस्थिति छुट्टी सं वधान के भ से ठीक क पहले फेडरल न्यायालय के यायाधीश को लागू थे । संविधान प्रारंभ न्यायाधीशों लिए त मास न न ल खत दर से वेतन तन का संदाय किया जाएगा, अथात ्:— उच्च न्यायालय न्यायाधीशों वास्तविक सेवा बिताए थू9,000 य यायमू त.. 9,000 प्रति निम्नलिखित अर्थात्:-- 3 कोई अ य यायाधीश.. 8,000 मुख्य न्यायमूर्ति. रुपए अन्य न्यायाधीश.. अु8,000 रुपए:**. संविधान अधिनियम, त था पत । प्रतिस्थापित । 2. सं वधान (चौवनवां सशोधन) अ ध नयम, 1986 की धारा 4 द्वारा (1-4-1986 से) “4,000 रुपए” के स्थान पर त था पत । संविधान अधिनियम, उ च यायालय और उ चतम यायालय यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन अ ध नयम, 2018 (2018 का प्रतिस्थापित । 10) की धारा 2 के अनु सार (1-1-2016 भू तल भाव से) अब यह “दो लाख पचास हजार रुपए” है । उच्च न्यायालय उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम, त था पत । अनुसार भूतलक्षी प्रभाव उ च यायालय और उ चतम यायालय यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन अ ध नयम, 2018 (2018 का संविधान अधिनियम, 10) की धारा 2 के अनु सार (1-1-2016 भू तल भाव से) अब यह “दो लाख प चीस हजार रुपए” है । प्रतिस्थापित । उच्च न्यायालय उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश अधिनियम, अनुसार भूतलक्षी प्रभाव पच्चीस (दूसरी (द अनुसूची) यदि किसी नियक्ति परंत तु उच्च न्यायालय का कोई न्यायाधीश अपनी के समय पूर्ववर्ती भारत सरकार की या उसकी सरकारों में से किसी की अथवा राज्य की सरकार पूर्ववर्ती की या उसकी सरकारों में से किसी की पूर्व सेवा के संबंध में (निःशक्तता या क्षति पेंशन से भिन्न) कोई पेंशन प्राप्त कर रहा है तो उच्च न्यायालय में सेवा के लिए निम्नलिखित अर्थात्: उसके वेतन मैं से को घटा दिया जाएगा, अथार्त --
  7. (क) उस पेंशन की रकम; और
  8. (ख) यदि उसने ऐसी नियुक्ति क्त से पहले, ऐसी पूर्व पव र् सेवा के संबंध में अपने पेंशन को देय य के एक भाग के बदले में उसका संराशित मूल्य प्राप्त किया है तो पेंशन के उस भाग की रकम; और
  9. (ग) यदि उसने ऐसी नियुक्ति से पहले, ऐसी पूर्व सेवा के संबंध में निवृत्ति: उपदान प्राप्त किया है तो उस उपदान के समत॒ल्य पेंशन य ।
  10. (2) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले—
  11. (क) किसी प्रांत के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप मैं पद धारण कर रहा था और ऐसे प्रारंभ भ पर अनच्छेद द 376 के खंड (1) के अधीन तत्स्थानी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति बन गया है; या (ख) किसी प्रांत के उच्च न्यायालय के किसी अन्य न्यायाधीश के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ भ पर उक्त खंड के अधीन तत्स्थानी राज्य के उच्च न्यायालय का (मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न) न्यायाधीश बन गया है, यदि वह ऐसे प्रारंभ भ से ठीक पहले इस पैरा के उपपैरा में दर से उच्चतर दर पर वेतन प्राप्त कर रहा था तो, ऐसे मुख्य न्यायमूर्ति या अन्य न्यायाधीश के रूप में वास्तविक सेवा में बिताए समय के लिए इस पैरा के उपपैरा में विनिर्दिष्ट वेतन के अतिरिक्त विशेष वेतन के रूप में ऐसी रकम प्राप्त करने का हकदार होगा जो यथास्थिति, इस प्रकार वेतन और ऐसे वेतन के अंतर के बराबर है जो वह ऐसे प्रारंभ भ से विनिर्दिष्ट ठीक पहले प्राप्त कर रहा था । विनिर्दिष्ट (3) ऐसा कोई व्यक्ति, जो संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ भ से ठीक पहले, पहली अनसूची के भाग ख में किसी राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ भ पर उक्त अधिनियम दूवारा यथासंशोधित उक्त अनस में च विनिर्दिष्ट राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य य अनसूची विनिर्दिष्ट किसी बन गया है, यदि वह ऐसे प्रारंभ भ से ठीक पहले अपने वेतन के अतिरिक्त के न्यायमूर्ति भत्ते रूप में कोई रकम प्राप्त कर रहा था तो, ऐसे मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में वास्तविक सेवा में बिताए समय के लिए इस पैरा के उपपैरा में वेतन के अतिरिक्त के रूप विनिर्दिष्ट भत्ते में वही रकम प्राप्त करने का हकदार होगा । संविधान 1. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 25(ग)(ii) द्वारा (1-11-1956 से) उप-पैरा (3) और उप-पैरा (4) के स्थान पर प्रतिस्थापित । (दूसरी (द अनुसूची) अपेक्षित कार्यकारी (क) “मुख्य न्यायमूर्ति” पद के अंतर्गत मख्य न्यायमूर्ति है और “न्यायाधीश” पद के अंतर्गत तद्र्थ न्यायाधीश है
  12. (ख) “वास्तविक सेवा” के अंतर्गत-- (i) न्यायाधीश दूवारा न्यायाधीश के रूप में कर्तव्य पालन में या ऐसे अन्य कृत्यों के पालन मैं, जिनका राष्ट्रपति के अनुरोध पर उसने निर्वहन करने का भार अपने ऊपर लिया है, बिताया गया समय है; (ii) उस समय को छोड़कर जिसमें न्यायाधीश छूट्टी लेकर अनुपस्थित है, दीर्घीवकाश है; और (iii) उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय को या एक उच्च न्यायालय से दस रे उच्च न्यायालय को अंतरण पर जाने पर पदग्रहण-काल दूसरे है । भाग ड भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध से वेतन का संदाय किया जाएगा ।
  13. (2) ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत के के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ भ पर अनुच्छेद द 377 के अधीन भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक बन गया है, इस पैरा के उपपरा में वेतन के अतिरिक्त विशेष वेतन के रूप में ऐसी रकम प्राप्त करने का हकदार होगा जो इस प्रकार वेतन और ऐसे वेतन के अंतर के बराबर है जो वह ऐसे महालेखापरीक्षक प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत के के रूप में प्राप्त कर रहा था ।
  14. (3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की अनप और पेंशन तथा विनिर्दिष्ट अन्य के संबंध में अधिकार उन उपबंधों से, शासित होंगे या विनिर्दिष्ट शासित होते गे जो इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत के को महालेखापरीक्षक लागू थे और उन उपबंधों में गवनर् जनरल के प्रति सभी का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे राष्ट्रपति के प्रति हैं । अनपस्थिति छूट्टी सेवा-शर्तों यथास्थिति, रहेंगे महालेखापरीक्षक गवर्नर निर्देशों निर्देश ∗ नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां तथा सेवा की अधिनियम, 1971 (1971 का 56) की धारा 3 शर्ते) दूवारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के बराबर वेतन का संदाय किया जाएगा । उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन अधिनियम, 2018 (2018 का 10) की धारा 6 दूवारा (1-1-2016 प्रभाव से) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन भूतलक्षी “दो लाख पचास हजार रुपए” प्रति मास तक बढ़ा दिया गया है । तीसरी अनुसूची अनुच्छेद द 75(4), 99, 124(6), 148(2), 164(3), 188 और 219 * प्रतिज्ञान शपथ या के प्ररूप -- संघ के मंत्री के लिए पद की शपथ का प्ररूप:— ईश्वर की शपथ लेता हूं ६ अमक सत्यनिष्ठा द्वारा भारत प्रतिज्ञान से करता हूं मैं, अमुक, कि. मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, ' मैं भारत की प्रभुता और अखंडता रखूंगा, मैं संघ के मंत्री के रूप में अपने का श्रदूधापूर्वक और शुदूध अंतःकरण से निर्वहन करूंगा तथा मैं भय या अनरु या दूवेष के बिना, सभी अक्षुण्ण कर्तव्यों प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा ।” पक्षपात, अनुराग 2 संघ के मंत्री के लिए गोपनीयता की शपथ का प्ररूप:— ईश्वर की शपथ लेता हूं मैं, अमुक, कि जो विषय संघ के मंत्री के रूप -- सत्यनिष्ठा से करता हूं में मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे होगा उसे किसी व्यक्ति या को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप मैं अपने के सम्यक् निर्वहन के लिए ऐसा करना हो, मैं अथवा रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा ।” प्रतिज्ञान 2 ज्ञात 3 व्यक्तियों कर्तव्यों क अपेक्षित प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष संसद् के लिए के लिए दूवारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले का प्ररूप:— * निर्वाचन अभ्यर्थी अनुच्छे द 84(क) और अनुच्छेद द 173(क) भी दे । प्रतिज्ञान 2. (सोलहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 5 द्वारा (5-10-1963 से) प्ररूप 3 के स्थान पर प्रतिस्थापित । * अनुच्छेद देखिए । संविधान संविधान (तीसरी अनुसूची) अभ्यर्थी मैं, अमुक, जो राज्य सभा (या लोक सभा) में स्थान भरने के लिए के रूप में सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञान ईश्वर की शपथ लेता हूं हुआ हूं द्वारा भारत से करता हूं अक्षुण्ण के संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, और मैं भारत की प्रभुता नामनिर्देशित हुआ हं और अखंडता रखूंगा ।” हे कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत ख संसद् के सदस्य द्वारा जाने वाली शपथ या किए जाने वाले का प्ररूप:— ल्ली प्रतिज्ञान मैं, अमुक, जो राज्य सभा (या लोक सभा) का सदस्य निर्वाचित (या नामनिर्देशित) हुआ हूं ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं उसके का श्रदूधापूर्वक अक्षुण्ण कर्तव्यों निर्वहन करूंगा ।” उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले का प्ररूप:— प्रतिज्ञान मैं, अमुक, जो भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति (या न्यायाधीश) ईश्वर की शपथ लेता हूं (या भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक) नियुक्त हुआ हूं, सत्यनिष्ठा से करता हूं हआ हूं, ः ! नियुक्त प्रतिज्ञान कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता रखूंगा, तथा मैं सम्यक प्रकार से और अक्षुण्ण श्रदूधापूर्वक तथा अपनी पूरी योग्यता, और विवेक से अपने पद के का भय ज्ञान कर्तव्यों या अनुराग या द्वेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और की पक्षपात, विधियों मयार्दा बनाए रखूंगा ।” मर्यादा (तीसरी अनुसूची) -- ठु किसी राज्य के मंत्री के लिए पद की शपथ का प्ररूप:— सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञान ईश्वर की शपथ लेता हूं अमुक, द्वारा भारत के से करता हूं अक्षुण्ण मंत्री कर्तव्यों संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता श्रदूधापूर्वक शुदूध अंतःकरण निर्वहन करूंगा पक्षपात, अनुराग 1 अनुसार और अखंडता रखूंगा, मैं ---णण ----------------------राज्य के मं त्री के रूप में अपने का श्रद्धापव मैं, अमुक, कि मैं विधि दूवारा स्थापित भारत के क र् और श द् ध अं त ःकरण से न करू ं गा तथा मैं भय या अनरु या -- दवेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनस न्याय करूंगा ।” सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञान 6 ज्ञात किसी राज्य के मंत्री के लिए गोपनीयता की शपथ का प्ररूप:— व्यक्तियों कर्तव्यों ईश्वर की शपथ लेता हूं अपेक्षित प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष अमुक, जो ----------------------- से करता हूं राज्य के मंत्री के रूप में मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे होगा उसे मैं, अमृक, किसी व्यक्ति या को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप में अपने के सम्यक निर्वहन के लिए ऐसा करना हो, मैं अथवा रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा ।” 7 निर्वाचन अभ्यर्थी क प्रतिज्ञान किसी राज्य के विधान-मंडल के लिए के लिए दूवारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले का प्ररूप:— मैं, अमुक, ---------------- जो विधान सभा (या विधान परिषद्) में स्थान भरने के ईश्वर की शपथ लेता हूं सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञान के रूप हुआ हूं, से करता हूं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, और मैं अक्षुण्ण भारत की प्रभुता और अखंडता रखूंगा ।” लिए अभ्यर्थी के रूप में नामनिर्देशित हुआ हूं, कि मैं संविधान 2. (सोलहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 5 द्वारा (5-10-1963 से) प्ररूप 7 के स्थान पर प्रतिस्थापित । (तीसरी अनुसूची) ख ल्ली किसी राज्य के विधान-मंडल के सदस्य द्वारा जाने वाली शपथ या किए जाने प्रतिज्ञान वाले का प्ररूप:— मैं, अमुक, जो विधान सभा (या विधान परिषद) का सदस्य निर्वाचित (या नामनिर्देशित).... ईश्वर की शपथ लेता हूं मं संवि हुआ हूं ए- कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान थी सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूं उसके कर्तव्यों का श्रदूधापूर्वक श्रद्धापव निर्वहन र्क करूंगा ।” उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा ली जाने वाली शपथ या किए जाने वाले प्रतिज्ञान का प्ररूप:— मैं, अमुक, --ााणा जो ------------ उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति (या न्यायाधीश) ईश्वर की शपथ लेता हूं नियुक्त हआ हं 7एएए कि मैं विधि द्वारा दूवारा स्थापित भारत ?... *... *. सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं के संविधान के प्रति सच्ची श्रदूधा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, तथा मैं सम्यक प्रकार से और श्रदूधापूर्वक तथा अपनी पूरी योग्यता, ज्ञान और विवेक से अपने पद के कर्तव्यों का भय या पक्षपात, अनुराग अनरु या दवेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और विधियों की मर्यादा मयार्दा बनाए रखूंगा ।” चौथी अनुसूची अनुच्छेद द 4(1) और अनुच्छेद द 80(2) राज्य सभा में स्थानों का आबंटन निम्नलिखित विनिर्दिष्ट सारणी के पहले स्तंभ में प्रत्येक राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को उतने स्थान आबंटित किए जाएंगे जितने उसके दूसरे द स्तंभ मैं, यथास्थिति, उस राज्य या उस संघ राज्यक्षेत्र के सामने विनिर्दिष्ट हैं: सारणी 83 दया शू2. तेलंगाना....................................................................................... 7 न र बिहार................................... ध 3. असम........................................................................................ 7 गुधू5...................................न 85 गथधु6 ८८८०. दा धुधूधर...................८.-.८८८--०००--पटटपयपपययययरयायययायययययययायययया गु6 16 '"थूगू8. हरियाणा..................................... 86 धुू9. दया 5. झारखंड................................................................................... 6 6. गोवा..................................................................................................................८ 8 4 1 7. गुजरात............................................................................... ० 89 8 4 11 8. के 810 8 4 5 8 पा 9. केरल..................................................................................... 9 फ़ प्रतिस्थापित । ० 2. आंध्र प्रदेश श पुनगर्ठन 2014 (2014 का 6) की धारा 12 दूवारा (2-6-2014 से) “18” के स्थान पर प्रतिस्थापित।. संविधान प्रविष्टियों को क्रमशः 3 से 31 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । प्रतिस्थापित । पुनर्गठन अधिनियम, 6. पुनगर्ठन 2000 (2000 का 30) की धारा 7 द्वारा (15-11-2000 से) अंतःस्थापित । पुनर्गठन अधिनियम, प्रविष्टि 5 से 30 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । पुनर्गठन अधिनियम, “प्रविष्टि 6” पुनःसंख्यांकित किया गया । बिहार पुनर्गठन अधिनियम, बिहार पुनर्गठन अधिनियम, बिहार पुनर्गठन अधिनियम, (चौथी अनुसूची) थु0. गु् 81 धू. छत्तीसगढ़..........................८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८ 10. मध्य प्रदेश............................ श............................................................................ 11 धु2. तमिलनाड़ 13.........................८८८८...८८८८८८८८८८८०८ ८ गु।8 धू3. पृ कर्नाटक.................... ८.८८... ८८८००. ८८८५०५ ८८००५ (दि 11. 5 धू5. शूओडिशा.......................८८.........८८८८८८८८८...८८८८८८८८८०००० या 86...............................त.....०ा "गुर 14.............................८.८८८८८८८८८८५५०५५० 85 1 "थु१8. उत्तर प्रदेश.............................................................4..+.....ा 12. 18 'गथू49. धुउत्तराखंड...........................८.८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८८५५५५००० पश्चिमी 16 थी जे जे जे... कप 87 1 'गू2. नागालैंड.............................................................................०.. 13. महाराष्ट्र................................................................................... 19 बिहार पुनर्गठन अधिनियम, ' थु6. 1 14. कनार्टक.................................................................................... 12 पुनर्गठन अधिनियम, 1 15. 10 810 प्रदेश 1 16. पंजाब........................................................................................... 7 "थु7. पुनर्गठन अधिनियम, 17. राजस्थान..................................................................................... 10 थू20. 18. प्रदे श.................................................................................. 31 812 1 19. 813 3 20. पिश्चमी बंगाल............................................................................. 16 814 1 ** * * *............................................................................... * _ 21. उड़ीसा परिवर्तन) 15 1 प्रविष्टि 5 से 30 के रूप में पनःसंख्यांकित किया गया । प्रविष्टियों को क्रमशः 3 से 31 तक की प्रविष्टियों के रूप में पनःसंख्यांकित किया गया । उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, प्रतिस्थापित । उत्तरांचल परिवर्तन) “उत्तरांचल” के रूप में पुनःसंख्यांकित) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । स्थान पर प्रतिस्थापित । के रूप में पुनःसंख्यांकित) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापित । । प्रतिस्थापित । । स्थान पर प्रतिस्थापित । । से संबंधित प्रविष्टि 21 को हटा दिया गया है ।. 15 जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 8 द्वारा (31-10-2019 से) प्रविष्टि 22 से प्रविष्टि 31 को क्रमशः प्रविष्टि 21 से प्रविष्टि 30 के रूप में पनःसंख्यांकित किया गया है । (चौथी अनुसूची) 22. प्रदे श............................................................... 3 थृ भू हिमाचल प्रदेश..............................८८..त या 2 अूथूभू23. मणिपुर....................८८८८८८.-८८८८८८८८८८८८८८८-पपपपदयययााा 23. 1 अगूगू24. त्रिपुरा.................८८८८८८८८...८८८८८८८८८८८८८८८८पपपया 3 2 ुथूगू25. 24. 1 3 2 जगूगूप26. सिक्किम........................--.८.-.८..८८.-८८-.८ ०८८८८ 25. मेघालय.............................................................................. या गथथूगू2ा. मिजोरम........................८८८८८ दया 85 3 2 गगथू28. 26. 1 शुगूगू29. दिल्‍ली....... 86 3 2 अथूभू30. “पुड्चेरी 27. 1 शूगूथूभू3।...........................८....८८-----८८०----०८८०-----०८८०---००८ 87 3 2 28. अरुणाचल प्रदेश...................................... श............................................................... 1 3 2 29. 3 3 2 30. 1 बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 31. जम्मू-कश्मीर.................................................................... 4 योग:– 233. पुनर्गठन अधिनियम, 1 हिमाचल प्रदेश श राज्य अधिनियम, 1970 (1970 का 53) की धारा 5 द्वारा (25-1-1971 से) अंतःस्थापित । प्रविष्टि 5 से 30 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । संविधान (छत्तीसवां प्रविष्टियों को क्रमशः 3 से 31 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । मिजोरम प्रविष्टि 31 को क्रमशः प्रविष्टि 21 से प्रविष्टि 30 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया है । पर प्रतिस्थापित । स्थान पर प्रतिस्थापित । । हिल एज मी 6०; ए पांचवीं अनुसूची अनुच्छेद द 244 (1) अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध भाग क साधारण निर्वचन-- अपेक्षित “राज्य” पद के अंतर्गत 1*** असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्य नहीं हैं । उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उसके क्षेत्रों अनसूचित पर है । क्षेत्रों 5 अनसूचित क्षेत्रों ऐसे प्रत्येक राज्य का राज्यपाल 5***, अनसूचित हैं, या प्रतिवेदन-- जिसमें क्षेत्र प्रतिवर्ष जब भी राष्ट्रपति इस प्रकार करे, उस राज्य के अनुसूचित के प्रशासन के अपेक्षा क्षेत्रों संबंध मैं राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा गा और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार राज्य को उक्त के प्रशासन के बारे में निदेश श दे ने तक होगा । क्षेत्रों देने भाग ख अनुसूचित और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन और नियंत्रण क्षेत्रों हैं और यदि राष्ट्रपति ऐसा निदेश श दे तो, किसी ऐसे राज्य में भी, अनसूचित जनजातियां हैं किंत तु है, एक जनजाति सलाहकार परिषद् स्थापित की जिसमें जाएगी जो बीस से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी से यथाशक्य निकटतम क्षेत्र जिसमें तीन-चौथाई उस राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के होंगे: अनसूचित क्षेत्र नहीं जिनमें प्रतिनिधि 1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “पहली अनुसूची के भाग क या भाग ख में राज्य अभिप्रेत हैं परन्तु” शब्दों और का लोप किया गया । विनिर्दिष्ट अक्षरों स्थान पर प्रतिस्थापित । । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, प्रतिस्थापित । स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान 5. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमुख” शब्दों का लोप किया गया । संविधान (पांचवीं अनुसूची) यदि प्रतिनिधियों प्रतिनिधियों परंतु तु उस राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के की संख्या जनजाति सलाहकार परिषद् मैं ऐसे से भरे जाने वाले स्थानों की जनजाति संख्या से कम है तो शेष स्थान उन जनजातियों के अन्य सदस्यों से भरे जाएंगे । अनुसूचित जनजातियों (2) सलाहकार परिषद् का यह कर्तव्य होगा कि वह उस राज्य की निर्दिष्ट अनस चत के कल्याण और उन्नति से संबंधित ऐसे विषयों पर सलाह दे जो नियक्ति उसको राज्यपाल 1*** द्वारा किए जाएं । अध्यक्ष अधिकारियों नियक्ति (3) राज्यपाल 2***— यथास्थिति, विनियमित अनसूचित क्षेत्रों अधिसूचना दवारा निदेश (क) परिषद् के सदस्यों की संख्या को, उनकी की और परिषद् के क्षेत्र तथा उसके और सेवकों की की रीति को; क्षेत्र (ख) उसके अधिवेशनों के संचालन तथा साधारणतया उसकी प्रक्रिया को; और विनिर्दिष्ट (ग) अन्य सभी आनुष॑गिक विषयों को, भूतल्क्षी विहित या करने के लिए नियम बना सकेगा । क्षेत्र भी, राज्यपाल 1*** लोक ना द्वारा श दे सकेगा कि संसद् का या उस राज्य के विधान-मंडलर का कोई विशिष्ट अधिनियम उस राज्य के अनसूचित या उसके किसी भाग को लागू नहीं होगा अथवा उस राज्य के अनसूचित या उसके किसी भाग क्षेत्र को ऐसे अपवादों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना में निर्बंधन करे और इस उपपैरा के अधीन दिया गया कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका प्रभाव हो । क्षेत्र (2) राज्यपाल 1*** किसी राज्य मैं किसी ऐसे की शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा जो तत्समय अनस चत है । विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, “यथास्थिति, ऐसे विनियम--
  15. (क) ऐसे की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा या उनमें भूमि संविधान के अंतरण का प्रतिषेध या कर सकेंगे
  16. (ख) ऐसे की जनजातियों के सदस्यों को भूमि म के आबंटन का विनियमन कर सकेंगे; राज्यपाल या राजप्रमुख” शब्दों के स्थान पर उपरोक्त रूप में रखा गया । शब्दों का लोप किया गया । (पांचवीं अनुसूची)
  17. (ग) ऐसे व्यक्तियों दूवारा जो ऐसे क्षेत्र की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को धन उधार देते हैं, साहूकार के रूप में कारबार करने का विनियमन कर सकेंगे । ।
  18. (3) ऐसे किसी विनियम को बनाने मैं जो इस पैरा के उप-पैरा (2) में निर्दिष्ट है, राज्यपाल 1*** संसद् के या उस राज्य के विधान-मंडल के अधिनियम का या किसी विद्यमान विधि का, जो प्रश्नगत क्षेत्र मैं तत्समय लागू है, निरसन या संशोधन कर सकेगा ।
  19. (4) इस पैरा के अधीन बनाए गए सभी विनियम राष्ट्रपति के तुरन्त समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता ता है तब तक उनका कोई प्रभाव नहीं होगा ।
  20. (5) इस पैरा के अधीन कोई विनियम तब तक नहीं बनाया जाएगा जब तक विनियम बनाने वाले राज्यपाल 1*** ने जनजाति सलाहकार परिषद् वाले राज्य की दशा में ऐसी परिषद् से परामर्श नहीं कर लिया है । भाग ग अनुसूचित अभिप्रित हैं राष्ट्रपति आदेश” श ∗ द्वारा अनुसूचित घोषित करे । क्षेत्र-- क्षेत्र” क्षेत्र जिन्हें क्षेत्र (2) राष्ट्रपति, किसी भी समय आदेश ∗∗ द्वारा–
  21. (क) निदेश श दे सकेगा कि कोई संपूर्ण अनुसूचित या उसका कोई द्वारा भाग अनुसूचित या ऐसे का भाग नहीं रहेगा; क्षेत्र (कक) राज्य के किसी अनुसूचित के को उस राज्य के विनिर्दिष्ट क्षेत्र क्षेत्र राज्यपाल से परामर्श करने के पश्चात ् बढ़ा सकेगा;
  22. (ख) किसी अनुसूचित में, केवल सीमाओं का परिशोधन करके ही, शू(कक) किसी क्षेत्र क्षेत्र कर सकेगा, बढ़ा क्षेत्र 1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा “या राजप्रमुख” शब्दों का लोप परिवर्तन (1-11-1956 से) किया गया । ∗ (भाग क राज्य) आदेश, 1950 (सं.आ. 9), अनुसूचित (भाग ख राज्य) आदेश, 1950 (सं.आ. 26), अनुसूचित (हिमाचल प्रदेश) श) आदे श, 1975 (सं.आ. 102) और अनुसूचित (बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश श और उड़ीसा राज्य) आदेश, श, 1977 (सं.आ. 109) दे । अनुसूचित क्षेत्र क्षेत्र क्षेत्र आदेश, क्षेत्र ∗∗ मद्रास चत आदेश, 1950 (सं.आ. 30) और आंध्र चत आदेश, 1955 देखिए । (सं.आ. 50) दे । अनुसूचित क्षेत्र (समाप्ति) अनुसूचित क्षेत्र (समाप्ति) (संशोधन) अधिनियम, 1976 (1976 का 101) की धारा 2 दूवारा (7-9-1976 से) देखिए । अंतःस्थापित । । संविधान (पांचवीं अनुसूची) परिवर्तन (ग) किसी राज्य की सीमाओं के किसी पर या संघ में किसी नए राज्य के प्रवेश पर या नए राज्य की स्थापना पर ऐसे किसी क्षेत्र को, जो पहले से किसी राज्य में सम्मिलित नहीं है, अनुसूचित क्षेत्र या उसका भाग घोषित कर सकेगा,
  23. (घ) किसी राज्य या राज्यों के संबंध में इस पैरा के अधीन किए गए आदेश श या आदेशों को विखंडित कर सकेगा और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करके उन क्षेत्रों को, जो अनुसूचित क्षेत्र होंगे, पुनः परिनिश्चित करने के लिए नए आदेश श कर सकेगा, और ऐसे किसी आदेश में ऐसे आनुषांगिक और पारिणामिक उपबंध हो सकेंगे जो राष्ट्रपति को आवश्यक और उचित प्रतीत हों, किंतु तु जैसा ऊपर कहा गया है उसके सिवाय इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन किए गए आदेश में किसी पश्चात्वर्ती आदेश आदे श द्वारा परिवर्तन नहीं किया जाएगा । भाग घ अनुसूची का संशोधन संसद, के उपबंधों में से किसी का, या निरसन के रूप में, संशोधन कर सकेगी और जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची निर्देश अनसु च निर्देश के प्रति किसी श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति श है । उल्लिखित (2) ऐसी कोई विधि, जो इस पैरा के उप-पैरा (1) में है, इस संविधान के अनुच्छेद द 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी संविधान । अंतःस्थापित । । छठी अनुसूची अनच्छेद द 244(2) और अनच्छेद द 275(1) असम, मेघालय, त्रिपरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध हए, इस अनसूची के पैरा 20 से संलग्न सारणी के थृधूभाग, भाग 1, भाग 2 और भाग 2क की प्रत्येक मद के और भाग 3 के जनजाति क्षेत्रों का एक स्वशासी जिला होगा ।
  24. (2) यदि किसी स्वशासी जिले में भिन्न-भिन्न अनुसूचित जनजातियां हैं तो राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, ऐसे या को, वे बसे हए हैं, स्वशासी क्षेत्र क्षेत्रों जिनमें प्रदेशों में कर सकेगा । विभाजित (3) राज्यपाल, लोक अधिसूचना दूवारा,--
  25. (क) उक्त सारणी के 3 भाग में किसी को कर सकेगा; थृकिसी क्षेत्र सम्मिलित (ख) उक्त सारणी के 3 भाग में किसी को अपविजर्त कर सकेगा; शृकिसी क्षेत्र अपवर्जित (ग) नया स्वशासी जिला बना सकेगा
  26. (घ) किसी स्वशासी जिले का बढ़ा सकेगा
  27. (ड) किसी स्वशासी जिले का घटा सकेगा
  28. (च) दो या अधिक स्वशासी या उनके भागों को सकेगा जिससे एक स्वशासी जिला बन सके; क्षेत्र शू(चच) किसी स्वशासी जिले के नाम में कर सकेगा; क्षेत्र जिलों मित्रा (छ) किसी स्वशासी जिले की सीमाएं परिनिश्चित कर सकेगा: परिवर्तन 1. राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा (20-2-1987 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । लिए पैरा 1 में उप-पैरा (2) के पश्चात ् परं तुक कर संशोधित किया गया, अथार्त ्:— मिजोरम “परन्तु इस उप-पैरा की कोई बात, बोडोलैंड प्रादे को (7-9-2003 से) लागू नहीं होगी ।”। (21-1-1972 से) "भाग क" के स्थान पर प्रतिस्थापित । निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित अर्थात्:-- स्थान पर प्रतिस्थापित । । प्रादेशिक क्षेत्र जिले से) अंतःस्थापित । । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 280 संविधान ्ज नि (छठी अनुसूची) परंतु तु राज्यपाल इस उप-पैरा के खंड (ग), खंड (घ), खंड (ड) और खंड (च) के अनुसूची नियुक्त अधीन कोई आदेश श इस अनस करेगा, च के पैरा 14 के उप-पैरा (1) के अधीन परंतु त आयोग के प्रतिवेदन पर विचार करने के पश्चात ही करे गा, अन्यथा नहीं: अंतर्विष्ट परं तु यह और कि राज्यपाल द्वारा इस उप-पैरा के अधीन किए गए आदेश में ऐसे आनुष॑ंगिक और पारिणामिक उपबंध (जिनके अंतर्गत पैरा 20 का और उक्त सारणी जिला परिषदों प्रादेशिक परिषदों के किसी भाग की किसी मद का कोई संशोधन है) हो सकेंगे जो राज्यपाल को जिनमें उस आदेश श के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों । नामनिर्देशित किए 2 निर्वाचित के लिए एक जिला परिषद् होगी जो तीस से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, से चार से अनधिक व्यक्ति राज्यपाल दूवारा जाएंगे और शेष वयस्क मताधिकार के आधार पर किए जाएंगे । निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित अर्थात्:- (21-1-1972 से) अंतःस्थापित । “परंतु प्रादेशिक परिषद् छियात्लीस जिनमें लिए पैरा 2 में उप-पैरा (1) के पश्चात ् परं तुक कर संशोधित किया गया, अथार्त ्:— आरक्षित “परं तु यह कि बोडोलैंड प्रादे से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनेगी से नामनिर्देशित किए चालीस सदस्यों को वयस्क मताधिकार के आधार पर किया. जाएगा, से तीस अनुसूचित प्रादेशिक क्षेत्र जिले जनजातियों के लिए, पांच गैर जनजातीय समुदायों के लिए, पांच सभी समुदायों के लिए होंगे तथा शेष छह राज्यपाल द्वारा जाएंगे जिनके अधिकार और विशेषाधिकार, जिनके अंतर्गत मत देने ने के अधिकार भी हैं, वही होंगे जो अन्य सदस्यों के हैं, बोडोलैंड प्रादे के उन समुदायों में से, जिनका संविधान छठी प्रतिनिधित्व नहीं है, कम से कम दो महिलाएं होंगी:”। । निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 दूवारा आसाम में लागू अर्थात्: होने के लिए पैरा 2 में उप-पैरा (3) के पश्चात ् परं तुक कर संशोधित किया गया, अथार्त “परंतु ्:— उत्तरी उत्तरी “परं तु कछार पहाड़ी जिले के लिए गठित जिला परिषद्, कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद् कहलाएगी कार्बी कार्बी और आंगलांग जिले के लिए गठित जिला परिषद्, आंगलांग स्वशासी परिषद् कहलाएगी ।”; संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा आसाम में लागू होने के लिए पैरा 2 के उप-पैरा (3) में परन्तुक के पश्चात निम्नलिखित ् परंतुक अंतःस्थापित परं तुक कर संशोधित किया गया, अर्थात्:- अथार्त ्:— “परं तु यह और कि बोडोलैंड प्रादे के लिए गठित जिला परिषद् बोडोलैंड प्रादे “परंतु प्रादेशिक क्षेत्र जिले प्रादेशिक परिषद् कहलाएगी ।” । (2-4-1970 से) उप-पैरा (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (छठी अनुसूची)
  29. (2) इस अनुसूची के पैरा 1 के उप-पैरा (2) के अधीन स्वशासी प्रदेश श के रूप में क्षेत्र पृथक प्रादेशिक परिषद् गठित प्रत्येक के लिए प होगी ।
  30. (3) प्रत्येक जिला परिषद् और प्रत्येक प्रादेशिक प्रादे परिषद् क्रमशः “(जिले का नाम) की जिला परिषद्” और “(प्रदेश श का नाम) की प्रादेशिक प्रादे परिषद्” नामक निगमित निकाय होगी, उसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और उसकी सामान्य मुद्रा होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।
  31. (4) इस अनस च अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए, स्वशासी जिले का प्रशासन ऐसे जिले की जिला परिषद् में वहां तक निहित होगा जहां तक वह इस अनूसूची अनस च के अधीन प्रादेशिक परिषद् में निहित ऐसे जिले के भीतर किसी प्रादे नहीं हैं और स्वशासी प्रदेश श का प्रादेशिक परिषद् निहित प्रशासन ऐसे प्रदेश की प्रादे में होगा । प्रादेशिक (5) परिषद् प्रादे वाले स्वशासी जिले में प्रादेशिक प्रादे परिषद् के प्राधिकारी के अधीन क्षेत्रों के संबंध में जिला परिषद् को, इस अनुसूची द्वारा ऐसे क्षेत्रों के संबंध में प्रदत्त शक्तियों के अतिरिक्त केवल ऐसी शक्तियां होंगी जो उसे प्रादेशिक प्रादे परिषद् द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं ।
  32. (6) राज्यपाल, संबंधित स्वशासी या प्रदेशों के भीतर विद्यमान जनजाति जिलों परिषदों या अन्य जनजाति संगठनों से परामर्श करके, जिला परिषदों और प्रतिनिधि प्रादे के प्रथम गठन के लिए नियम बनाएगा और ऐसे नियमों में प्रादेशिक परिषदों के लिए उपबंध किए जाएंगे, अथार्त ्:— निम्नलिखित अर्थात्:--
  33. (क) जिला परिषदों और प्रादे संरचना तथा उनमें स्थानों का आबंटन; प्रादेशिक परिषदों की (ख) उन परिषदों के लिए के प्रयोजन के लिए प्रादे का परिसीमन
  34. (ग) ऐसे में मतदान के लिए अहताएं और उनके लिए निर्वाचनों प्रादेशिक नामावलियों की तैयारी; निर्वाचन-क्षेत्रों (घ) ऐसे मैं ऐसी परिषदों के सदस्य होने के लिए अहताएं; निर्वाचनों निर्वाचक (ड) प्रादे के सदस्यों की पदावधि; निर्वाचनों निर्वाचित (2-4-1970 से) "ऐसी परिषदों" के स्थान पर प्रतिस्थापित । । प्रादेशिक परिषदों (छठी अनुसूची) निर्वाचन नामनिर्देशन (च) ऐसी परिषदों के लिए या शन से संबंधित या संसक्त कोई अन्य विषय
  35. (छ) जिला परिषदों और प्रादेशिक प्रादे परिषदों की प्रक्रिया और उनका कार्य संचालन (जिसके अंतर्गत किसी रिक्ति के होते हुए भी कार्य करने की शक्ति है)
  36. (ज) जिला और प्रादे के और की " (6क) प्रादेशिक परिषदों अधिकारियों कर्मचारिवृंद । नियुक्ति । 1 जिला परिषद् (6क) के निर्वाचित सदस्य, यदि जिला परिषद् पैरा 16 के अधीन पहले ही विघटित नहीं कर दी जाती है तो, परिषद् के लिए साधारण निर्वाचन के पश्चात ् परिषद् के प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेंगे गे और नामनिर्देशित सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यत पद धारण करेगा: गा: परं तु पांच वर्ष की उक्त अवधि को, जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब परंत या यदि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण कराना राज्यपाल की राय निर्वाचन में असाध्य है तो, राज्यपाल ऐसी अवधि के लिए बढ़ा सकेगा जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी और जब आपात की उदूघोषणा प्रवर्तन में है तब उद्घोषणा के प्रव न प्रवृत्त रह जाने के पश्चात ् भी दशा में उसका विस्तार छह मास की अवधि से अधिक किसी नहीं होगा: परंतु तु यह और कि आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए सदस्य उस सदस्य की, जिसका स्थान वह लेता है, शेष पदावधि के पद धारण करेगा गा । निर्वाचित (7) या प्रादे अपने प्रथम गठन के पश्चात ् राज्यपाल के ल्रिए अनुमोदन से इस पैरा के उप-पैरा (6) में विषयों के लिए नियम बना सकेगी और वैसे ही अनुमोदन से — जिला परिषद् प्रादेशिक परिषद् (क) अधीनस्थ स्थानीय परिषदों या के बनाए जाने तथा उनकी विनिर्दिष्ट प्रक्रिया और उनके कार्य संचालन का; और
  37. (ख) जिले या प्रदेश श के प्रशासन विषयक कार्य करने से संबंधित साधारणतया सभी विषयों का, बोर्डों विनियमन करने वाले नियम भी, बना सकेगी: यथास्थिति, से) अंतःस्थापित । । (छठी अनुसूची) प्रादेशिक परिषद् दूवारा परंतु तु जब तक जिला परिषद् या प्रादे द्वारा इस उप-पैरा के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उप-पैरा (6) के अधीन बनाए गए निर्वाचनों, अधिकारियों कर्मचारियों नियम, प्रत्येक ऐसी परिषद् के लिए उसके और तथा उसकी प्रक्रिया और उसके कार्य संचालन के संबंध में प्रभावी होंगे । । कि न न न 1* * * * विधि प्रादेशिक परिषदों की शक्ति-- से) दुवितीय परन्तुक का लोप किया गया । संविधान छठी आसाम राज्य को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया जिससे उप-पैरा (3) रूप से अर्थात्:- प्रतिस्थापित हो सके, अथार्त ्:— “(3) पैरा 3क के उप-पैरा (2) या पैरा उख के उप-पैरा (2) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय इस पैरा या पैरा 3क के उप-पैरा (1) या पैरा 3उख के उप-पैरा (1) के अधीन बनाई गई सभी विधियां राज्यपाल के समक्ष तुरन्त प्रस्तुत की जाएंगी और जब तक वह उन पर अनुमति नहीं दे देता ता है तब तक प्रभावी नहीं होंगी ।”। संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा आसाम राज्य को निम्नलिखित अर्थातु:- लागू होने के लिए पैरा 3 के पश्चात ् पैरा (12-9-1995 से) अंतःस्थापित किया गया, अथार्त ्:— उत्तरी कार्बी “3क. कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद् और आंगलांग स्वशासी परिषद् की विधि बनाने की अतिरिक्त उत्तरी कार्बी शक्तियां-
  38. (1) पैरा 3 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद् और जिलों निम्नलिखित आंगलांग स्वशासी परिषद् को, संबंधित के भीतर की बाबत विधियां बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्:- अथार्त ्:—
  39. (क) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 7 और प्रविष्टि 52 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उद्योग; अर्थात, सड़कें,
  40. (ख) संचार, अथार्त ्, पुल, फेरी और अन्य संचार साधन, जो सातवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट नहीं नगरपालिक अंतर्देशीय जलमार्गों हैं, ट्राम, रज्जुमार्ग, शीय के संबंध में सातवीं अनुसूची अंतर्देशीय जलमार्ग की सूची 1 और सूची 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, शीय जलमागर् और उन पर यातायात, यंत्र नोदित यानों से भिन्न यान; परिरक्षण, संरक्षण प्रशिक्षण (ग) पशुधन का और सुधार तथा जीवजंतुओं के रोगों का निवारण, पशु चिकित्सा और व्यवसाय; कांजी हाउस; शिक्षा
  41. (घ) प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा संरक्षण (ड) कृषि जिसके अंतर्गत कृषि और अनुसंधान, नाशक जीवों से और पादप रोगों का निवारण है
  42. (च) मत्स्य उद्योग; (छठी अनुसूची) की प्रविष्टि अर्थातु, (पाद-टिप्पण जारी),- सुरक्षा (छ) सातवीं अनुसूची की सूची 1 56 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जल, अथार्त ्, जल संरक्षण प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकासी और तटबंध, जल भंडारण और जल शक्ति
  43. (ज) सामाजिक और सामाजिक बीमा; नियोजन और बेकारी; की प्रविष्टि (झ) ग्रामों, धान के खेतों, बाजारों, शहरों, आदि के के लिए बाढ़ नियंत्रण स्कीमें (जो तकनीकी प्रकृति की न हों)
  44. (ज) नाट्यशाला औंर नाट्य प्रदर्शन; सातवीं अनुसूची की सूची 1 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सिनेमा, खेल-कूद, मनोरंजन जन और आमोद
  45. (ट) लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, अस्पताल और औषधालय
  46. (ठ) लघु सिंचाई; वित्तपोषित (ड) खाद्य पदार्थ, पशुओं के चारे, कच्ची कपास और कच्चे जूट का व्यापार और वाणिज्य तथा उनका उत्पादन, प्रदाय और वितरण
  47. (ढ) राज्य द्वारा नियंत्रित या पुस्तकालय, संग्रहालय और वैसी ही अन्य संस्थाएं संसद् दूवारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए प्राचीन और ऐतिहासिक उत्तरी कार्बी संस्मारकों और अभिलेखों से भिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख; और विनिर्दिष्ट (ण) भूमि का अन्य संक्रामण । समक्ष आरक्षित (2) पैरा 3 के अधीन या इस पैरा के अधीन कछार पहाड़ी स्वशासी परिषद् और आगंलांग स्वशासी परिषद् द्वारा बनाई गई सभी विधियां, जहां तक उनका संबंध सातवीं अनुसूची की सूची 3 में विषयों से आरक्षित ल्री है, राज्यपाल के तुरन्त प्रस्तुत की जाएंगी, जो उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए रखेगा ।
  48. (3) जब कोई विधि राष्ट्रपति के विचार के लिए रख जाती है तब राष्ट्रपति घोषित करेगा कि वह उक्त विधि पर अनुमति देता ता है या अनुमति रोक लेता है: राष्ट्रपति यथास्थिति, उत्तरी परंतु तु राज्यपाल को यह निदेश श दे सकेगा कि वह विधि को, कछार पहाड़ी स्वशासी कार्बी आगंत्रांग परिषद् या आगंलांग स्वशासी परिषद् को ऐसे संदेश के साथ यह अनुरोध करते हुए लॉटा दे कि उक्त परिषद् विनिर्दिष्ट विधि या उसके किन्हीं उपबंधों पर पुनर्विचार करे और विशिष्टतया, किन्हीं ऐसे संशोधनों पर पुरःस्थापन जिनकी की वांछनीयता पर विचार करे उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधि इस प्रकार लौटा दी जाती है तब ऐसा संदेश मिलने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर परिषद् ऐसी विधि पर तदनुसार विचार करेगी गी और यदि विधि उक्त परिषद् द्वारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दी जाती है तो उसे समक्ष राष्ट्रपति के उसके विचार के लिए फिर से प्रस्तुत किया जाएगा संविधान । छठी के लिए पैरा 3क के पश्चात ् क्रमशः (7-9-2003 से) अंतःस्थापित किया गया, अथार्त ्:— प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् को, अपने क्षेत्रों में, निम्नलिखित के संबंध में विधियां बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्:- अथार्त ्:— (i) अंतगर्त और अनुसंधान, नाशक जीवों से और पादप रोगों का कृषि, जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा संरक्षण निवारण है; (ii) पशुपालन और पशु चिकित्सा अथार्त ् पशुधन का और सुधार तथा जीव अर्थात् परिरक्षण, संरक्षण जंतुओं के रोगों का निवारण, पशु चिकित्सा और व्यवसाय, कांजी हाऊस; (iii) सहकारिता; (४) प्रशिक्षण सांस्कृतिक कार्य; (५) अथार्त ् उच्चतर माध्यमिक व प्रौढ़ शिक्षा अर्थात् प्राइमरी शिक्षा, शिक्षा जिसमें वृत्तिक प्रशिक्षण, प्रौढ़ (साधारण) भी है; (५४) मत्स्य उद्योग; (भी) ग्राम, धान के खेतों, बाजारों और शिक्षा, महाविद्यालय शिक्षा (छठी अनुसूची) संरक्षण आपूर्ति; (आरक्षित शहरों के के लिए बाढ़ नियंत्रण (जो तकनीकी प्रकृति का न हो); (५) खाद्य और सिविल (ix) वन वनों को छोड़कर); (१0 हथकरघा और वस्त्र; (४) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण; (१) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 84 के उपबंधों के अधीन रहते हुए मादक लिकर, अफीम और व्युत्पन्न; (१) सिंचाई; (५४) श्रम और रोजगार; (१४) भूमि और राजस्व; (५५४) (xvi) पुस्तकालय सेवाएं (राज्य सरकार दूवारा वित्तपोषित और नियंत्रित); (»५ो) लाटरी (सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 40 के उपबंधों के अधीन रहते हुए), नाट्यशाला, नाट्य प्रदर्शन और सिनेमा (सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 60 के उपबंधों के अधीन रहते हुए); (५५) बाजार और मेले; (५) नगर निगम, सुधार न्यास, जिला बोर्ड और अन्य स्थानीय प्राधिकारी; (xx) राज्य द्वारा नियंत्रित या वित्तपोषित संग्रहालय और पुरातत्व विज्ञान संस्थान, संसद् दूवारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारकों और अभिलेखों से भिन्न, प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख; (9०९) पंचायत और ग्रामीण विकास
  49. (90प) योजना और विकास; (१00) मुद्रण और लेखन सामग्री; (१00४) लोक स्वास्थ्य इंजीनियरी; (990४) लोक विभाग; (00५) प्रचार और लोक संपर्क; (९५) जन्म और म का रजिस्ट्रीकरण; (९५) सहायता और पुनवार्स; (xxix) रेशम शम उत्पादन; (१900 सातवीं अनुसूची की सूची 1 7 और प्रविष्टि 52 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लघु, कुटीर और ग्रामीण उद्योग; (xxxi) निर्माण मृत्यु समाज कल्याण; (१00) मृदा (१00०0) (xxxiii) खेलकूद और युवा कल्याण; (9000४) (9000४) पुनर्वास; पर्यटन; (xxxvi) परिवहन पुल, फेरी और अन्य संचार साधन, जो सातवीं अनुसूची की सूची में हैं, ट्राम, रज्जुमार्ग, शीय के संबंध में सातवीं अनुसूची की सूची की प्रविष्टि 1 और सूची 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, शीय जलमागर् और उन पर यातायात, यंत्र नोदित यानों से भिन्न यान); (000५) राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और जनजाति अनुसंधान संस्थान; संरक्षण; सांख्यिकी; (0०00५) शहरी विकास-नगर और ग्रामीण योजना); (xxxix) सातवीं अनुसूची की सूची 1 की प्रविष्टि 50 के उपबंधों के अधीन रहते हुए बाट और माप; और (४) मैदानी जनजातियों और का कल्याण: (१०0१४) (सड़कें, परंतु तु ऐसी की कोई बात,—
  50. (क) इस अधिनियम के प्रारंभ की पर किसी नागरिक के उसकी भूमि के संबंध में विद्यमान विनिर्दिष्ट नहीं नगरपालिका अन्तर्देशीय जलमार्गों अधिकारों और विशेषाधिकारों को समाप्त या उपांतरित नहीं करेगी; गी; और
  51. (ख) किसी नागरिक को विरासत, आबंटन, व्यवस्थापन के रूप में या अंतरण की किसी अन्य रीति से अन्तर्देशीय जलमार्ग भूमि अिजर्त करने से नहीं करेगी गी ऐसा नागरिक बोडोलैंड प्रादे के भीतर भूमि के ऐसे अर्जन के लिए अन्यथा पात्र है । वित्तपोषित (2) पैरा 3 के अधीन या इस पैरा के अधीन बनाई गई सभी विधियां, जहां तक उनका संबंध सातवीं अनुसूची की सूची 3 में विषयों से है, राज्यपाल के तुरन्त प्रस्तुत की जाएंगी जो उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए रखेगा ।
  52. (3) जब कोई विधि राष्ट्रपति के विचार के लिए रख ली जाती है, तब राष्ट्रपति घोषित करेगा कि पिछड़े वर्गों वह उक्त विधि पर अनुमति देता ता है या अनुमति रोक लेता है: परंतु तु राज्यपाल को यह संदेश दे सकेगा कि वह विधि को, बोडोलैंड प्रादे को ऐसे विधियों - संदेश के साथ यह अनुरोध करते हुए लौटा दे कि उक्त परिषद् विधि या उसके उपबंधों पर पुनर्विचार करे और विशिष्टतया, किन्हीं ऐसे संशोधनों को पुरःस्थापित करने की वांछनीयता पर विचार करे तारीख उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधि इस प्रकार लौटा दी जाती है तब उक्त परिषद्, ऐसे संदेश की प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी विधि पर तदनुसार विचार करेगी गी और यदि विधि उक्त परिषद् द्वारा, संशोधन सहित या उसके बिना, फिर से पारित कर दी जाती है तो उसे राष्ट्रपति के उसके विचार के लिए फिर से प्रस्तुत किया जाएगा ।”। अर्जित अनुज्ञात यदि प्रादेशिक क्षेत्र जिले विनिर्दिष्ट समक्ष आरक्षित आरक्षित राष्ट्रपति प्रादेशिक परिषद् किन्‍्हीं विनिर्दिष्ट जिनकी समक्ष (छठी अनुसूची) प्रादेशिक परिषद् क्षेत्रों प्रादे को ऐसे प्रदेश श के भीतर के सभी के संबंध में और स्वशासी जिले क्षेत्रों प्रादेशिक परिषदों की जिला परिषद् को ऐसे को छोड़कर जो उस जिले के भीतर की प्रादे क्षेत्रों के, यदि कोई हों, प्राधिकार के अधीन हैं, उस जिले के भीतर के अन्य सभी के निम्नलिखित अर्थात्:- संबंध मैं विषयों के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी, अथार्त ्:–
  53. (क) किसी आरक्षित वन की भूमि से भिन्न अन्य भूमि का, कृषि या चराई के प्रयोजनों के लिए अथवा निवास के या कृषि से भिन्न अन्य प्रयोजनों के लिए अथवा किसी ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए जिससे किसी ग्राम या नगर के निवासियों के हितों की अभिवृद्धि संभाव्य है, आंबटन, अधिशभोग या उपयोग अथवा अलग रखा जाना: परंतु तु ऐसी की कोई बात संबंधित राज्य की सरकार को विधियों अनिवार्य अर्जन प्राधिकृत करने वाली तत्समय प्रव के अनुसार किसी भूमि का, चाहे प्रवृत्त विधि वह अधिभोग में हो या नहीं, लोक प्रयोजनों के लिए अर्जन करने से अनिवार्य निवारित नहीं करेगी; गी
  54. (ख) किसी ऐसे वन का प्रबंध जो वन नहीं है
  55. (ग) कृषि के प्रयोजन के लिए किसी नहर या जलसरणी का उपयोग; आरक्षित (घ) झूम की का या खेती की अन्य पद्धतियों का विनियमन
  56. (ड) ग्राम या नगर या परिषदों की स्थापना और उनकी शक्तियां; पदुधति परिवर्ती (च) ग्राम या नगर प्रशासन से संबंधित कोई अन्य विषय जिसके अंतर्गत ग्राम या नगर लस और लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता है
  57. (छ) प्रमुखों या मुखियों की या समितियों (ज) की विरासत
  58. (झ) और विवाह-विच्छेद; (जअ) पुलिस (ञ) ।
  59. (2) इस पैरा में, वन” से ऐसा अभिप्रेत है जो असम वन विनियम, नियुक्ति उत्तराधिकार; 1891 के अधीन या प्रश्नगत में तत्समय अन्य विधि के अधीन संपत्ति वन है । थू(झ) विवाह “आरक्षित क्षेत्र (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । क्षेत्र प्रवृत्त किसी आरक्षित (2-4-1970 से) खंड झ के स्थान पर प्रतिस्थापित । । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (छठी अनुसूची) समक्ष (3) इस पैरा के अधीन बनाई गई सभी विधियां राज्यपाल के तुरन्त प्रस्तुत अनुमति नहीं की जाएंगी और जब तक वह उन पर अनम दे देता है तब तक प्रभावी नहीं होंगी । । 1 जिलों प्रादे ऐसे प्रदेश श के भीतर के के संबंध में और स्वशासी जिले की क्षेत्रों प्रादेशिक परिषदों जिला परिषद् ऐसे से भिन्न जो उस जिले के भीतर की प्रादे के, यदि क्षेत्रों कोई हों, प्राधिकार के अधीन हैं, उस जिले के भीतर के अन्य के संबंध में, ऐसे वादों पक्षकारों जिनमें पक्षकार और मामलों के विचारण के लिए जो ऐसे के बीच हैं से सभी क्षेत्रों ऐसे के भीतर की अनुसूचित जनजातियों के हैं तथा जो उन वादों और मामलों से भिन्न हैं जिनको इस अनुसूची के पैरा 5 के उप-पैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं, उस राज्य के किसी न्यायालय का अपवर्जन करके ग्राम परिषदों या न्यायालयों का गठन कर उपुयक्त व्यक्तियों सकेगी और उपय क्त को ऐसी ग्राम परिषद् के सदस्य या ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर सकेगी और ऐसे अधिकारी भी नियुक्त कर सकेगी जो विधियों इस अनुसूची के पैरा 3 के अधीन बनाई गई के प्रशासन के लिए आवश्यक हों । ।
  60. (2) इस संविधान मैं किसी बात के होते हुए भी, स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक प्रादे परिषद् या उस प्रादेशिक प्रादे परिषद् द्वारा इस निमित्त गठित कोई न्यायालय या यदि किसी स्वशासी जिले के भीतर के किसी क्षेत्र के लिए कोई प्रादेशिक प्रादे परिषद् नहीं है तो, ऐसे जिले की जिला परिषद् या उस जिला परिषद् दूवारा इस निमित्त गठित कोई न्यायालय ऐसे सभी वादों और मामलों के संबंध में जो, यथास्थिति, ऐसे प्रदेश श या क्षेत्र के भीतर इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन गठित किसी ग्राम परिषद् या न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं तथा जो उन वादों और मामलों से भिन्न हैं जिनको इस अनुसूची के पैरा 5 के उप-पैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं अपील न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेगा गा तथा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से भिन्न किसी अन्य न्यायालय को ऐसे वादों या मामल्रों में अधिकारिता नहीं होगी ।
  61. (3) उच्च न्यायालय 2*** को, उन वादों और मामलों में जिनको इस पैरा के उप- पैरा (2) के उपबंध लागू होते हैं, ऐसी अधिकारिता होगी और वह उसका प्रयोग करेगा गा जो राज्यपाल समय-समय पर आदेश श द्वारा करे । विनिर्दिष्ट संविधान 1. छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा (7-9-2003 से) पैरा 4 आसाम राज्य को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया जिससे उप-पैरा (5) के पश्चात ् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जा सके, अर्थात्:- अथार्त ्:— “(6) इस पैरा की कोई बात, इस अनुसूची के पैरा 2 के उप-पैरा (3) के परं तुक के अधीन गठित बोडोलैंड परंतुक प्रादे को लागू नहीं होगी ।”। प्रादेशिक परिषद् 2. (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71(झ) और आठवीं अनुसूची दूवारा (21-1-1972 से) "आसाम के" शब्दों का लोप किया गया । पूर्वोत्तर क्षेत्र (छठी अनुसूची) यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् (4) प्रादे या जिला परिषद् राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से निम्नलिखित अर्थात्:-- के विनियमन के लिए नियम बना सकेगी, अथार्त ्:—
  62. (क) ग्राम परिषदों और न्यायालयों का गठन और इस पैरा के अधीन उनके दूवारा प्रयोक्तव्य शक्तियां
  63. (ख) इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन वादों और मामलों के विचारण में ग्राम परिषदों या न्यायालयों द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
  64. (ग) इस पैरा के उप-पैरा (2) के अधीन अपीलों और अन्य में प्रादे या जिला परिषद् अथवा ऐसी परिषद् द्वारा गठित किसी न्यायालय कार्यवाहियों दूवारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया; प्रादेशिक परिषद् (घ) ऐसी परिषदों और न्यायालयों के और आदेशों का प्रवर्तन
  65. (ड) इस पैरा के उप-पैरा (1) और उप-पैरा (2) के उपबंधों को करने के लिए अन्य सभी आनुष॑गिक विषय । । विनिश्चयों (5) उस तारीख को और से जो राष्ट्रपति राज्य की सरकार से परामर्श कार्यान्वित करने के पश्चात ् द्वारा, इस नियत करे, यह पैरा ऐसे स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श के संबंध में, जो उस में जाए, इस प्रकार थूसंबंधित प्रभावी होगा मानो— (i) उप-पैरा में, “जो ऐसे के बीच हैं से सभी अधिसूचना निमित्त ऐसे के भीतर की अनुसूचित जनजातियों के हैं तथा जो उन वादों और मामलों अधिसूचना विनिर्दिष्ट किया से भिन्न हैं जिनको इस अनस च के पैरा 5 के उप-पैरा (1) के उपबंध लागू होते हैं” शब्दों के स्थान पर, “जो इस अनुसूची के पैरा 5 के उप-पैरा में पक्षकारों जिनमें पक्षकार के ऐसे वाद और मामले नहीं हैं राज्यपाल इस क्षेत्रों करे,” शब्द रख दिए गए हों; अनुसूची (ii) उप-पैरा (2) और उप-पैरा (3) का लोप कर दिया गया हो; निर्दिष्ट (iii) उप-पैरा (4) में- प्रकृति जिन्हें निमित्त विनिर्दिष्ट (क) प्रादे या जिला परिषद्, राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से, के विनियमन के लिए नियम बना सकेगी, अथार्त ्:–” के स्थान पर, “राज्यपाल के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा, अथार्त ्:–” शब्द रख दिए गए हों; और
  66. (ख) खंड (क) के स्थान पर, खंड रख दिया गया हो, अथार्त ्:– “यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् निम्नलिखित 1. आसाम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 (६969 का 55) की धारा 74 और चौथी अनुसूची द्वारा अर्थात्:-” शब्दों निम्नलिखित (2-4-1970 से) अंतःस्थापित । । (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । निम्नलिखित अर्थात्:- पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (छठी अनुसूची) “(क) ग्राम परिषदों और न्यायालयों का गठन, इस पैरा के अधीन उनके दवारा प्रयोक्तव्य शक्तियां और वे न्यायालय जिनको विनिश्चयों ग्राम परिषदों और न्यायालयों के से अपीलें हो सकेंगी;”; निम्नलिखित (ग) खंड (ग) के स्थान पर, खंड रख दिया गया हो, अर्थात्:- अथार्त ्:– “(ग) प्रादे या जिला परिषद् अथवा ऐसी परिषद् प्रादेशिक परिषद् दूवारा गठित किसी न्यायालय के उप-पैरा (5) के अधीन रा- समक्ष ष्ट्रपति दूवारा नियत तारीख से ठीक पहले लंबित अपीलों और अन्य का अंतरण,”; और कार्यवाहियों (घ) खंड (ड) में “उप-पैरा (1) और उप-पैरा (2)” शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के स्थान पर, “उप-पैरा (1)” शब्द, कोष्ठक और अंक रख दिए गए हों । परिषदों को तथा किन्हीं न्यायालयों और को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 और दंड ड 1898 1 के अधीन का प्रदान किया जाना—
  67. (1) प्रादेशिक परिषदों राज्यपाल, किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश में ऐसी प्रव से, जो ऐसी जिल्ला अधिकारियों विधि है जिसे राज्यपाल इस करे, उद्भूत वादों या मामलों के विचारण प्रक्रिया संहिता, शक्तियों के लिए अथवा भारतीय दंड ड के अधीन या ऐसे जिले या प्रदेश में तत्समय लागू किसी प्रवृत्त विधि किसी अन्य विधि के अधीन म से, आजीवन से या पांच वर्ष से अन्यून निमित्त विनिर्दिष्ट अवधि के लिए कारावास से दं डनीय के विचारण के लिए, ऐसे जिले या प्रदेश श पर संहिता प्राधिकार रखने वाली जिला परिषद् या प्रादे को अथवा ऐसी जिला परिषद् मृत्यु निर्वासन द्वारा गठित न्यायालयों को अथवा राज्यपाल द्वारा इस नियुक्त किसी अधिकारी दंडनीय अपराधों को, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 या दंड ड 18981 के अधीन प्रादेशिक परिषद् ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकेगा जो वह समचित समझे और तब उक्त परिषद् निमित्त न्यायालय या अधिकारी इस प्रकार का प्रयोग करते हुए वादों, मामलों या यथास्थिति, प्रक्रिया संहिता, अपराधों का विचारण करे गा ।
  68. (2) राज्यपाल, इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन किसी जिला परिषद, प्रादे प्रदत्त शक्तियों न्यायालय या अधिकारी को में से किसी शक्ति को वापस ले सकेगा या उपांतरित कर सकेगा ।
  69. (3) इस पैरा में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, सिविल प्रक्रिया संहिता, प्रादेशिक 1908 और दंड ड 18981 किसी स्वशासी जिले में या किसी स्वशासी प्रदेश में, परिषद्, प्रदत्त शक्तियों इस पैरा के उपबंध लागू होते हैं, किन्हीं वादों, मामलों या अपराधों के विचारण को लागू नहीं होगी । प्रक्रिया संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, (छठी अनुसूची) 1 राष्ट्रपति दूवारा किसी (4) द्वारा स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श के संबंध में पैरा 4 के उप-पैरा (5) के अधीन नियत तारीख को और से, उस जिले या प्रदेश श को लागू होने में इस पैरा की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी जिला परिषद् प्रादेशिक परिषद् या प्रादे को या जिला परिषद् दूवारा गठित न्यायालयों को इस पैरा के उप- निर्दिष्ट शक्तियों में पैरा में ष्ट से कोई शक्ति प्रदान करने के लिए राज्यपाल को प्राधिकृत करती है । यृ6. प्राथमिक विद्यालय, आदि स्थापित स्वशासी जिले की जिला परिषद् जिले में प्राथमिक विद्यालयों, औषधालयों, बाजारों, शूकांजी हाउसों, फेरी, मीनक्षेत्रों, सड़कों, परिवहन जलमार्गों 3 निर्माण पूर्व अनुमोदन कांजी सड़क सड़क और की स्थापना, और प्रबंध कर सकेगी तथा राज्यपाल के पव र् अनम शिक्षा से, उनके विनियमन और नियंत्रण के लिए विनियम बना सकेगी और, विशिष्टतया, वह भाषा और वह रीति विहित अधिकारियों कर सकेगी, जिससे जिले के प्राथमिक विद्यालयों में प्राथमिक दी जाएगी ।
  70. (2) राज्यपाल, जिला परिषद् की सहमति से उस परिषद् को या उसके को कृषि, पशुपालन, सामुदायिक परियोजनाओं, सहकारी सोसाइटियों, समाज कल्याण, ग्राम योजना या किसी अन्य ऐसे विषय के संबंध मैं, जिस पर 4*** राज्य की जिल्ला प्रादेशिक निधियां-- कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, कृत्य सशर्त या बिना शर्त सौंप सकेगा । प्रादेशिक निधि गठित की जिसमें प्रादेशिक परिषद् निधि और प्रत्येक स्वशासी प्रदेश श के लिए एक प्रादे जाएगी क्रमशः उस जिले की जिला परिषद् दवारा और उस प्रदेश की प्रादे द्वारा इस संविधान के उपबंधों के अनस उस जिले या प्रदेश श के प्रशासन के अनुक्रम में म प्राप्त सभी धनराशियां जमा की जाएंगी । निरसन (2-4-1970 से) अंतःस्थापित । । (2-4-1970 से) पैरा 6 के स्थान पर प्रतिस्थापित । । स्थान पर प्रतिस्थापित । । (21-1-1972 से) आसाम या मेघालय" शब्दों का लोप किया गया । (छठी अनुसूची) यथास्थिति, प्रादेशिक निधि (2) राज्यपाल, जिला निधि या प्रादे के प्रबंध के लिए 1 अभिरक्षा पूर्वोक्त अनुसरण और उक्त निधि में धन जमा करने, उसमैं से धनराशियां निकालने, उसके धन की और विषयों से संबंधित या आनुष॑गिक किसी अन्य विषय के संबंध में यथास्थिति, जिला परिषद् प्रादेशिक परिषद् अनस की रण जाने वाली प्रक्रिया के लिए नियम बना सकेगा ।
  71. (3) या प्रादे के लेखे ऐसे प्ररूप में रखे नियंत्रक-महालेखापरीक्षक जिला परिषदों प्रादेशिक परिषदों जाएंगे जो भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक राष्ट्रपति के अनुमोदन से, विहित करे । संपरीक्षा (4) और प्रादे के लेखाओं की समक्ष ऐसी रीति से कराएगा जो वह ठीक समझे और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के ऐसे समक्ष लेखाओं से संबंधित प्रतिवेदन राज्यपाल के प्रस्तुत किए जाएंगे जो उन्हें परिषद् के रखवाएगा । निर्धारण शक्तियां- स्वशासी प्रदेश श के भीतर की सभी भूमियों के संबंध में ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद् प्रादेशिक परिषद् हैं प्रादे को और यदि जिले मैं कोई प्रादे तो उनके प्राधिकार के क्षेत्रों भूमियों भूमियों अधीन आने वाले में स्थित को छोड़कर जिले के भीतर की सभी के संबंध में स्वशासी जिले की जिला परिषद् को ऐसी भूमियों की बाबत, उन सिद्धांतों के निर्धारण अनुसार राजस्व का ण और संग्रहण करने की शक्ति होगी, जिनका शुसाधारणतया निर्धारण राज्य मैं भू-राजस्व के प्रयोजन के लिए भूमि के में राज्य की सरकार द्वारा तत्समय अनुसरण किया जाता है ।
  72. (2) स्वशासी प्रदेश श के भीतर के क्षेत्रों के संबंध में ऐसे प्रदेश की प्रादेशिक परिषद् प्रादे को और यदि जिले मैं कोई प्रादेशिक प्रादे परिषद् हैं तो उनके प्राधिकार के अधीन आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर जिले के भीतर के सभी क्षेत्रों के संबंध में स्वशासी जिले की जिला परिषद् को, भूमि और भवनों पर करों का तथा ऐसे क्षेत्रों में निवासी व्यक्तियों पर पथकर का उद्ग्हण और संग्रहण करने की शक्ति होगी ।
  73. (3) स्वशासी जिले की जिला परिषद् को ऐसे जिले के भीतर सभी या निम्नलिखित किन्हीं करों का उद्ग्हण और संग्रहण करने की शक्ति होगी, अथार्त ्:– अर्थात्:-
  74. (क) व व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर
  75. (ख) जीवजंतुओं, यानों और नौकाओं पर कर; वृत्ति, (2-4-1970 से) उप-पैरा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (21-1-1972 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (छठी अनुसूची)
  76. (ग) किसी बाजार में विक्रय के लिए माल के प्रवेश पर कर और फेरी से ले जाए जाने वाले यात्रियों और माल पर पथकर; 1*** (घ) विद्यालयों, औषधालयों या सड़कों को बनाए रखने के लिए कर; और शु(ड)
  77. (ङ) मनोरंजन जन और आमोद-प्रमोद पर कर । विनिर्दिष्ट यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् (4) इस पैरा के उप-पैरा (2) और उप-पैरा (3) में करों में से किसी कर समक्ष तरन्त के उद्ग्रहण और संग्रहण का उपबंध करने के लिए, प्रादे या जिला परिषद् विनियम बना सकेगी और ऐसा प्रत्येक विनियम राज्यपाल के तरु न्त प्रस्तुत किया जाएगा और जब तक वह उस पर अनुमति नहीं दे देता ता है तब तक उसका कोई प्रभाव नहीं होगा । खनिजों पूर्वेक्षण निष्कर्षण अनुज्ञप्तियां 5 किसी क्षेत्र या पट्टे—
  78. (1) स्वशासी जिले के भीतर के किसी के संबंध में राज्य की सरकार द्वारा खनिजों के ण या के प्रयोजन के लिए दी गई या पट्टों से प्रत्येक वर्ष प्रोदूभूत होने वाले स्वामिस्व का ऐसा अंश, जिला परिषद् को दिया जाएगा जो यदि जिला परिषद् उस राज्य की सरकार और ऐसे जिले की जिला परिषद् के बीच करार पाया जाए । निर्देशित किया (2) को दिए जाने वाले ऐसे स्वामिस्व के अंश के बारे में कोई अनुसार अवधारित विवाद उत्पन्न होता है तो वह राज्यपाल को अवधारण के लिए जाएगा और राज्यपाल दूवारा अपने विवेक के अनस रकम इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन जिला परिषद् को संदेय रकम समझी जाएगी और राज्यपाल का विनिश्चय अंतिम होगा । संविधान संविधान किया गया । संविधान (2-4-1970 से) अंतःस्थापित । । संविधान 5. छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा (16-12-1988 से) पैरा 9 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में निम्नलिखित रूप से संशोधित किया गया जिससे उप-पैरा (2) के पश्चात निम्नलिखित ् उप-पैरा अंतःस्थापित किया जा सके, अर्थात्: अथार्त ्:— “(3) राज्यपाल, आदेश श द्वारा, यह निदेश श दे सकेगा कि इस पैरा के अधीन जिला परिषद् को दिया जाने वाला दूवारा, स्वामिस्व का अंश उस परिषद् को, उप-पैरा (1) के अधीन किसी करार या उप-पैरा (2) के अधीन यथास्थिति, किसी अवधारण की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर किया जाएगा ।”। (21-1-1972 से) "आसाम सरकार" के स्थान पर प्रतिस्थापित ।:ि पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (८0. (७४ फभ (छठी अनुसूची) जनजातियों व्यक्तियों लिए विनियम बनाने की जिला परिषद् की शक्ति--()
  79. (1) स्वशासी जिले की जिला परिषद् विशिष्टतया पूर्वगामी शक्ति की उस जिले में निवासी जनजातियों से भिन्न की उस जिले के भीतर साहूकारी या व्यापार के विनियमन और नियंत्रण के लिए विनियम बना सकेगी । निमित्त अनुज्ञप्ति (2) और पव र्गामी शिक्त व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे किए विनियम-
  80. (क) विहित कर सकेंगे कि उस दी गई के धारक के निमित्त अधिकारियों निरीक्षण अतिरिक्त और कोई साहूकारी का कारोबार नहीं करेगा; गा
  81. (ख) साहूकार द्वारा प्रभारित या वसूल निमित्त अनुज्ञप्ति जाने वाले ब्याज की अधिकतम दर विहित कर सकेंगे; संविधान छठी निम्नलिखित (ग) साहूकारों द्वारा लेखे रखे जाने का और जिला परिषदों द्वारा इस व्यक्तियों नियुक्त दूवारा ऐसे लेखाओं के का उपबंध कर निम्नलिखित अर्थात्: निमित्त सकेंगे; अनुज्ञप्ति (घ) विहित कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति, जो जिले में निवासी अनुसूचित जनजातियों का सदस्य नहीं है, जिला परिषद् द्वारा इस दी गई के अधीन ही किसी वस्तु का थोक या फुटकर कारबार करेगा, गा, अन्यथा नहीं:. त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया:—
  82. (क) शीर्षक में से “जनजातियों से भिन्न की” शब्दों का लोप किया जाएगा
  83. (ख) उप-पैरा (1) में से “जनजातियों से भिन्न” शब्दों का लोप किया जाएगा
  84. (ग) उप-पैरा (2) में, खंड (घ) के स्थान पर, खंड रखा जाएगा, अथार्त ्:— “(घ) विहित कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति, जो जिले में निवासी है जिला परिषद् द्वारा इस दी गई के अधीन कोई थोक या फुटकर व्यापार करेगा गा अन्यथा नहीं ।”। (छठी अनुसूची) परंतु तु इस पैरा के अधीन ऐसे विनियम तब तक नहीं बनाए जा सकेंगे जब तक वे जिला परिषद् की कुल सदस्य संख्या के कम से कम तीन चौथाई बहुमत द्वारा पारित नहीं कर दिए जाते हैं: परंतु तु यह और कि ऐसे किन्हीं विनियमों के अधीन किसी ऐसे साहूकार या व्यापारी को जो ऐसे विनियमों के बनाए जाने के पहले से उस जिले के भीतर कॉरबार करता रहा है, अनुजप्ति देने ने से इंकार करना सक्षम नहीं होगा ।
  85. (3) इस पैरा के अधीन बनाए गए सभी विनियम राज्यपाल के तुरन्त प्रस्तुत समक्ष किए जाएंगे और जब तक वह उन पर अनम दे देता ता है तब तक उनका कोई प्रभाव अनुमति नहीं नहीं होगा । ∗ * * * अनुसूची के अधीन बनाई गई विधियों, नियमों और विनियमों का प्रकाशन— जिला परिषद या प्रादेशिक प्रादे परिषद् द्वारा इस अनुसूची के अधीन बनाई गई सभी विधियां, नियम और विनियम राज्य के राजपत्र मैं तुरन्त प्रकाशित किए जाएंगे और ऐसे प्रकाशन पर विधि का बल रखेंगे । । ∗∗--∗∗∗ असम राज्य के विधान-मंडल के अधिनियमों का लागू होना —
  86. (1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,— निम्नलिखित जिसमें निम्नलिखित अंतःस्थापित किया ∗ संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 दूवारा (7-9-2003 से) पैरा 10 आसाम राज्य को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया उप-पैरा (3) के पश्चात ् गया:— "(4) इस पैरा की कोई बात, इस अनुसूची के पैरा 2 के उप-पैरा (3) के परन्तुक के अधीन गठित बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद् को लागू नहीं होगी ।"। निम्नलिखित अर्थात्: ∗∗ संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1995 (1995 का 42) की धारा 2 द्वारा (12-9-1995 से) पैरा 12 आसाम राज्य को लागू करने के लिए रूप से संशोधित किया गया, अथार्त ्:— विनिर्दिष्ट अक्षर 'पैरा 12 के उप-पैरा (1) के खंड (क) में, “इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट अक्षर किया गया है” शब्दों, अंकों और के स्थान पर, “इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क या पैरा 3उख में ऐसे विषयों के रूप में किया गया है” शब्द, अंक और रखे जाएंगे;'। निम्नलिखित अर्थात्: ∗∗∗ संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 2003 (2003 का 44) की धारा 2 द्वारा (7-9-2003 से) पैरा 12 आसाम राज्य को लागू करने के लिए रूप से संशोधित किया गया, अथार्त ्:— 'पैरा 12 के उप-पैरा (1) के खंड (क) में, “ इस अनुसूची के पैरा 3 या पैरा 3क में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट अक्षर किया गया है” शब्दों, अंकों और के स्थान पर, “इस अनुसूची के पैरा 3क या पैरा 3उख में ऐसे विनिर्दिष्ट अक्षर विषयों के रूप में किया गया है” शब्द, अंक और रखे जाएंगे;'। (21-1-1972 से) शीर्षक के स्थान पर प्रतिस्थापित । (छठी अनुसूची)
  87. (क) 1 अनुसूची असम राज्य के विधान-मंडल । का कोई अधिनियम, जो ऐसे विषयों विनिर्दिष्ट प्रादेशिक में से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनस परिषद् विधियां च अधिनियम, प्रतिषिदूध के पैरा 3 में ऐसे विषयों निर्बंधित के रूप मैं किया गया है, जिनके संबंध में जिला परिषद् या प्रादे बना सकेगी और असम राज्य के विधान-मंडल का कोई 1 नहीं जो किसी अनासुत ऐल्कोहाली लिकर के उपभोग को या धत करता है, धूउस राज्य में किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को तब तक लागू नहीं होगा जब तक दोनों दशाओं में से हर एक में ऐसे जिले की जिला परिषद् या ऐसे प्रदेश श पर अधिकारिता रखने वाली जिला परिषद्, लोक अधिसूचना विधान-मंडल्र । दूवारा, इस प्रकार निदेश श दे देती है और जिला परिषद् किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश श देते समय यह निदेश श दे सकेगी कि वह अधिनियम ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है; विनिर्दिष्ट (ख) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश श दे सकेगा कि संसद् का या असम राज्य के का कोई अधिनियम, जिसे इस उप-पैरा के खंड भूतलक्षी (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं शूउस राज्य में किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को जिलों ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में करे । अधिनियमों (2) इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन दिया गया कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका प्रभाव हो भ 2क. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, मेघालय राज्य के विधान-मंडल के का लागू होना— इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी— 3. (2-4-4972 (21-1-1972 से) "राज्य का विधान-मंडल" के स्थान पर प्रतिस्थापित । (21-1-1972 से) अंतःस्थापित । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, । (21-1-1972 से) पैरा 12क के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (छठी अनसूची) विनिर्दिष्ट विषयों में (क) यदि इस अनसूची के पैरा 3 के उप-पैरा मैं प्रादेशिक से किसी विषय के संबंध में मेघालय राज्य मैं किसी जिला परिषद् या प्रादे परिषद् दूवारा द्वारा बनाई गई किसी विधि का कोई उपबंध या यदि इस अनूसूची के प्रादेशिक पैरा 8 या पैरा 10 के अधीन उस राज्य में किसी जिला परिषद् या प्रादे परिषद् दूवारा द्वारा बनाए गए किसी विनियम का कोई उपबंध, मेघालय राज्य के विधान-मंडल दूवारा उस विषय के संबंध में बनाई गई किसी विधि के किसी यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् उपबंध के विरुदूध है तो, उस जिला परिषद् या प्रादे दूवारा द्वारा बनाई गई विधि या बनाया गया विनियम, चाहे वे मेघालय राज्य के विधान-मंडल दूवारा बनाई गई विधि से पहले बनाया गया हो या उसके पश्चात ्, उस विरोध की मात्रा तक शून्य होगा और मेघालय राज्य के विधान-मंडल दूवारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी
  88. (ख) राष्ट्रपति, संसद् के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश श दे सकेगा कि वह मेघालय राज्य मैं किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो । जिलों 1 त्रिपुरा अधिनियमों राज्य के विधान-मंडल के का लागू होना— इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,—
  89. (क) त्रिपरा राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम, जो ऐसे विषयों मैं से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है जिनके संबंध में जिला परिषद् या प्रादेशिक प्रादे परिषद् विधियां बना सकेगी, और त्रिपरा राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम जो किसी अनासत ऐल्कोहालिक लिकर के उपभोग को प्रतिषिदूध या निर्वंधित धत करता है, उस राज्य में किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को तब तक लागू नहीं होगा जब तक, दोनों दशाओं में से हर एक में, उस जिले की जिला परिषद् या ऐसे प्रदेश श पर अधिकारिता रखने वात्ली जिला परिषद् लोक अधिसूचना दूवारा, इस प्रकार निदेश नहीं श दे देती ती है और जिला परिषद् किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश श देते दे ते समय यह निदेश श दे सकेगी कि वह अधिनियम उस जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है; किया गया और तत्पश्चात ् अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा (16-12-1988 से) पैरा के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (छठी अनुसूची)
  90. (ख) राज्यपाल, लोक अधिसूचना द्वारा, निदेश श दे सकेगा कि त्रिपुरा राज्य के विधान-मंडलर का कोई अधिनियम, जिसे इस उप-पैरा के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं, उस राज्य मैं किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या विनिर्दिष्ट उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में करे
  91. (ग) राष्ट्रपति, संसद् के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश श दे सकेगा कि वह त्रिपुरा राज्य में किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना मैं विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो । मिजोरम राज्य के विधान-मंडल के को लागू होना— इस संविधान मैं किसी अधिनियमों बात के होते हुए भी,—
  92. (क) मिजोरम राज्य के का कोई अधिनियम जो ऐसे विषयों में से किसी विषय के संबंध में है जिनको इस अनुसूची के पैरा 3 में ऐसे विषयों के विधान-मंडतर रूप मैं किया गया है जिनके संबंध में जिला परिषद् या प्रादे बना सकेगी, और मिजोरम राज्य के का कोई अधिनियम, जो विनिर्दिष्ट प्रादेशिक परिषद् किसी अनासुत ऐल्कोहालिक लिकर के उपभोग को प्रतिषिद्ध या धत करता विधियां विधान-मंडत्र है, उस राज्य में किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को तब तक लागू नहीं निर्बधित होगा, जब तक, दोनों दशाओं में से हर एक में, उस जिले की जिला परिषद् या ऐसे प्रदेश श पर अधिकारिता रखने जिला परिषद्, लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश श दे देती ती है और जिला परिषद् किसी अधिनियम के संबंध मैं ऐसा वाल्ली निदेश श दे ते समय यह निदेश श दे सकेगी कि वह अधिनियम उस जिले या प्रदेश श या नहीं उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए देते प्रभावी होगा जो वह ठीक समझती है
  93. (ख) राज्यपाल, लोक ना द्वारा, निदेश श दे सकेगा कि मिजोरम राज्य के विधान-मंडलर का कोई अधिनियम, जिसे इस उप-पैरा के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होते हैं, उस राज्य मैं किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श अधिसूचना को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह उस अधिसूचना में करे; विनिर्दिष्ट (छठी अनुसूची)
  94. (ग) राष्ट्रपति, संसद् के किसी अधिनियम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा निदेश श दे सकेगा कि वह मिजोरम राज्य मैं किसी स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श को लागू नहीं होगा अथवा ऐसे जिले या प्रदेश श या उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगा जो वह अधिसूचना मैं विनिर्दिष्ट करे और ऐसा कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी भत प्रभाव हो । विवरण में पृथक् पथ क् रूप से दिखाया जाना— किसी स्वशासी जिले से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय, जो 1*** राज्य की संचित निधि में जमा होनी हैं या उसमें से किए जाने हैं, पहले जिला परिषद् के समक्ष विचार-विमर्श के लिए रखे जाएंगे और फिर ऐसे विचार-विमर्श के पश्चात अनुच्छेद ् अनुच्छे द 202 के अधीन राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखे जाने वाले वार्षिक वित्तीय विवरण में पृथक क् रूप से दिखाए जाएंगे । प्रतिवेदन देने ने के लिए आयोग की नियुक्ति-- क्त—
  95. (1) राज्यपाल, राज्य में स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों के प्रशासन के संबंध मैं अपने द्वारा विनिर्दिष्ट किसी विषय की, जिसके अंतर्गत इस अनुसूची के पैरा 1 के उप-पैरा (3) के खंड (ग), खंड (घ), खंड (ड) और खंड (च) में विनिर्दिष्ट विषय हैं, जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने ने के लिए किसी भी समय आयोग नियुक्त त कर सकेगा, या राज्य में स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों के साधारणतया प्रशासन की और विशिष्टतया-
  96. (क) ऐसे और प्रदेशों में और चिकित्सा की वधाओं और जिलों शिक्षा सुविधाओं की संचार की व्यवस्था की
  97. (ख) ऐसे और प्रदेशों के संबंध में किसी नए या विशेष विधान की जिलों आवश्यकता थी; और
  98. (ग) जिला परिषदों और प्रादे द्वारा बनाई गई प्रादेशिक परिषदों विधियों, नियमों और के प्रशासन की, विनियमों समय-समय पर जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने ने के लिए आयोग त कर नियुक्त सकेगा और ऐसे आयोग दूवारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चित कर सकेगा । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (21-1-1972 से) "आसाम" शब्द का लोप किया गया । संविधान छठी लागू होने के लिए (12-9-1995 से) रूप से संशोधित किया गया, अथार्त ्:— सिफारिशों 'पैरा 14 के उप-पैरा (2) में, “राज्यपाल की उससे संबंधित के साथ” शब्दों का लोप किया जाएगा ।'। (छठी अनुसूची)
  99. (2) संबंधित मंत्री, प्रत्येक ऐसे आयोग के प्रतिवेदन को, राज्यपाल की उससे सिफारिशों संबंधित के साथ, उस पर राज्य की सरकार दूवारा की जाने के लिए ज्ञापन प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध मैं स्पष्टीकारक सहित, राज्य के विधान-मंडलर के समक्ष रखेगा ।
  100. (3) राज्यपाल राज्य की सरकार के कार्य का अपने मंत्रियों में आबंटन करते समय अपने मंत्रियों मैं से एक मंत्री को राज्य के स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों के कल्याण का विशेषतया भारसाधक बना सकेगा । निलंबित किया जाना— यदि (1) राज्यपाल का किसी समय यह समाधान हो जाता है कि जिला परिषद् या प्रादेशिक प्रादे परिषद् के किसी कार्य या संकल्प से भारत की सुरक्षा का संकटापन्न होना संभाव्य है या लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है तो वह ऐसे कार्य या संकल्प को निप्रभाव या निलंबित कर सकेगा और ऐसी कार्रवाई (जिसके अंतर्गत परिषद् का निलंबन और परिषद् मैं निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों को अपने हाथ में ले लेना है) कर सकेगा जो वह ऐसे कार्य को किए जाने या उसके चालू रखे जाने का अथवा ऐसे संकल्प को प्रभावी किए जाने का निवारण करने के लिए आवश्यक समझे ।
  101. (2) राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन किया गया आदेश, श, उसके लिए जो कारण हैं उनके सहित, राज्य के के यथासंभवशीघ्र रखा विधान-मंडत्र समक्ष जाएगा और यदि वह आदेश, श, राज्य के विधान-मंडल द्वारा प्रतिसंहत नहीं कर दिया जाता है तो वह उस तारीख से, जिसको वह इस प्रकार किया गया था, बारह मास की अवधि तक प्रव बना रहेगा: प्रवृत्त परन्तु यदि और जितनी बार, ऐसे आदेश श को प्रव बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला संकल्प राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित कर दिया जाता है तो और उतनी प्रवृत्त बार वह आदेश, श, राज्यपाल द्वारा रदूद नहीं कर दिया जाता है तो, उस तारीख से, जिसको वह इस पैरा के अधीन अन्यथा प्रवर्तन में नहीं रहता, बारह मास की और अवधि यदि तक प्रव बना रहेगा । प्रवृत्त पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (21-1-1972 से) "आसाम सरकार" के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान छठी त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया है:— निम्नलिखित 'पैरा 15 के उप-पैरा (2) में, -- '(क) आरं भाग में, “राज्य के विधान-मंडल द्वारा” शब्दों के स्थान पर, “राज्यपाल द्वारा” शब्द रखे आरंभिक जाएंगे
  102. (ख) परन्तुक का लोप किया जाएगा ।'। अंतःस्थापित । एज (छठी अनुसूची) जिला परिषद् प्रादेशिक परिषद् (1) राज्यपाल, इस अनुसूची के पैरा 14 के अधीन नियुक्त आयोग की सिफारिश पर, लोक अधिसूचना दूवारा, किसी जिला परिषद् या प्रादे का विघटन कर सकेगा, और–– निर्वाचन (क) निदेश श दे सकेगा कि परिषद् के पुनर्गठन के लिए नया साधारण तुरन्त कराया जाए; या क्षेत्र क्षेत्र (ख) राज्य के विधान-मंडल के पूर्व अनुमोदन से ऐसी परिषद् के प्राधिकार के अधीन आने वाले का प्रशासन बारह मास से अनधिक अवधि के लिए अपने हाथ मैं ले सकेगा अथवा ऐसे का प्रशासन ऐसे आयोग को जिसे उक्त पैरा के अधीन नियुक्त किया गया है या अन्य ऐसे किसी निकाय को जिसे वह किया उपयुक्त समझता है, उक्त अवधि के लिए दे सकेगा: क्षेत्र निर्वाचन निर्दिष्ट परन्तु जब इस पैरा के खंड (क) के अधीन कोई आदेश श गया है तब राज्यपाल प्रश्नगत के प्रशासन के संबंध में, नया साधारण होने पर परिषद् यथास्थिति, प्रादेशिक परिषद् के पुनर्गठन के लंबित रहने तक, इस पैरा के खंड (ख) मैं कार्रवाई कर सकेगा: समक्ष परन्तु यह और कि, जिला परिषद् या प्रादे को राज्य के विधान-मंडल के अपने विचारों को रखने का अवसर दिए बिना उस पैरा के खंड संविधान छठी अनुसूची (ख) के अधीन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी । निम्नलिखित -- निम्नलिखित अर्थात्: (संशोधन) अधिनियम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 द्वारा (16-12-1988 से) पैरा 16 त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया है:— '(क) उप-पैरा (1) के खंड (ख) में आने वाले “राज्य के विधान-मंडल के पूर्व अनुमोदन से” शब्दों और दूसरे परन्तुक का लोप किया जाएगा
  103. (ख) उप-पैरा (3) के स्थान पर उप-पैरा रखा जाएगा, अथार्त -- “(3) इस पैरा के उप-पैरा (1) या उप-पैरा (2) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, श, उसके लिए जो कारण है उनके सहित, राज्य के के रखा जाएगा ।”।'. (2-4-1970 से) पैरा 16 को उसके उप-पैरा (1) के रूप में पुनर्सख्यांकित किया गया । (छठी अनुसूची) 1 यदि स्थिति (2) राज्यपाल का किसी समय यह समाधान हो जाता है कि ऐसी जिसमें उत्पन्न हो गई है स्वशासी जिले या स्वशासी प्रदेश श का प्रशासन इस अनसूची के यथास्थिति, उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है तो वह, जिला परिषद् या प्रादेशिक परिषद में निहित प्रादे या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या कोई कत्य या शक्तियां, लोक अधिसूचना दूवारा, छह मास से अनधिक अवधि के लिए अपने हाथ में ले सकेगा और यह घोषणा कर सकेगा कि ऐसे कृत्य या शक्तियां उक्त अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या जिस निमित्त विनिर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य होंगी वह इस करे: परन्त राज्यपाल आरंभिक आरं आदेश आदे श का प्रवर्तन, अतिरिक्त आदेश श या आदेशों द्वारा, एक बार में छह मास से अनधिक अवधि के लिए बढ़ा सकेगा ।
  104. (3) इस पैरा के उप-पैरा (2) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, श, उसके लिए जो कारण हैं उनके सहित, राज्य के विधान-मंडल के रखा जाएगा और वह आदेश श उस समक्ष तारीख से जिसको राज्य विधान-मंडल उस आदेश श के किए जाने के पश्चात ् प्रथम बार बैठता है, तीस दिन की समाप्ति पर प्रवर्तन में नहीं रहेगा यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले राज्य विधान-मंडल द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है । जिलों निर्वाचन-क्षेत्रों जिलों क्षेत्रों राज्यपाल, शूअसम या मेघालय या त्रिपरा या मिजोरम की विधान सभा के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए, आदेश श द्वारा, यह घोषणा कर सकेगा कि, असम या दवारा, यृथास्थिति, मेघालय या त्रिपुरा शूया मिजोरमा राज्य में किसी स्वशासी जिले के भीतर का कोई क्षेत्र ऐसे किसी जिले के लिए विधान सभा में स्थान या स्थानों को भरने के लिए आरक्षित किसी का भाग नहीं होगा, किन्त विधान सभा मैं इस प्रकार न निर्वाचन-क्षेत्र आरक्षित किए गए ऐसे स्थान या स्थानों को भरने के आदेश में का ल्रिए विनिर्दिष्ट निर्वाचन-क्षेत्र भाग होगा । श् नि हल न न तर (2-4-1970 से) जोड़ा गया। आसाम राज्य को लागू करने में परन्तुक अंतःस्थापित कर संशोधित किया गया, अथार्त ्:— निम्नलिखित अर्थात्:- “परन्तु इस पैरा की कोई बात बोडोलैंड प्रादे को लागू नहीं होगी ।”। प्रादेशिक क्षेत्र जिला (21-1-1972 से) "आसाम की विधान सभा" के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 5. राज्य अधिनियम, 1986 (1986 का 34) की धारा 39 द्वारा (20-2-1987 से) अंतःस्थापित ।. । (21-1-1972 से) "आसाम की विधान सभा" के स्थान पर अंतःस्थापित । । (21-1-1972 से) पैरा 18 का लोप किया गया । मिजोरम पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, एज (छठी अनुसूची) 1 संक्रमणकालीन पश्चात ् यथासंभव शीघ्र, इस अनस च के अधीन राज्य में प्रत्येक स्वशासी जिले के लिए क्षेत्रों जिला परिषद् के गठन के लिए कार्रवाई करेगा गा और जब तक किसी स्वशासी जिले के पूर्वगामी उपबंधों निम्नलिखित अर्थात्:-- लिए जिला परिषद् इस प्रकार गठित नहीं की जाती है तब तक ऐसे जिले का प्रशासन राज्यपाल मैं निहित होगा और ऐसे जिले के भीतर के के प्रशासन को इस अनुसूची क्षेत्र के पव अधिसूचना र्गामी के स्थान पर उपबंध लागू होंगे, अथार्त ्:— नहीं देते क्षेत्र विनिर्दिष्ट (क) संसद् का या उस राज्य के विधान-मंडल का कोई अधिनियम ऐसे को तब तक लागू नहीं होगा जब तक राज्यपाल, लोक ना द्वारा, इस प्रकार निदेश श दे देता ता है और राज्यपाल किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश श दे ते क्षेत्र समय यह निदेश श दे सकेगा कि वह अधिनियम ऐसे या उसके किसी भाग को लागू होने मैं ऐसे अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा क्षेत्र जो वह ठीक समझता है
  105. (ख) राज्यपाल ऐसे किसी की शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए विनियम संसद् के या उस राज्य के भूतलक्षी विधान-मंडल के किसी अधिनियम का या किसी विद्यमान विधि का, जो ऐसे को तत्समय लागू हैं, निरसन या संशोधन कर सकेंगे । । संविधान छठी निम्नलिखित (2) राज्यपाल दूवारा इस पैरा के उप-पैरा (1) के खंड (क) के अधीन दिया गया निम्नलिखित अंतःस्थापित किया अर्थात्:- कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका प्रभाव हो । प्रादेशिक क्षेत्र जिले ज्ञापन आसाम राज्य को लागू करने में रूप से संशोधित किया गया जिससे उप-पैरा (3) के पश्चात ् गया, अथार्त ्:— '(4) इस अधिनियम के प्रारंभ भ के पश्चात ्, यथाशीघ्र आसाम में बोडोलैंड प्रादे के लिए एक अन्तरिम परिषद् निर्वाचन अंतरिम कार्यपालक परिषद्, राज्यपाल द्वारा बोडो आन्दोलन के नेताओं में से, जिनके अंतर्गत समझौते के के भी हैं, बनाई जाएगी और उसमें उस के गैर जनजातीय समुदायों को भी पयार्प्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा:
  106. व्याख्या।स्पष्टीकरण- ज्ञापन” परंतु तु छह मास की अवधि के लिए होगी जिसके दौरान परिषद् का कराने का लिबरेशन टाइगर्स हस्ताक्षरित ज्ञापन प्रयास किया जाएगा । इस उप-पैरा के प्रयोजनों के लिए, “समझौते का पद से भारत सरकार, आसाम सरकार और बोडो शन टाइगसर् के बीच 10 फरवरी, 2003 को अभिप्रेत है ।'। (छठी अनुसूची)
  107. (3) इस पैरा के उप-पैरा (1) के खंड (ख) के अधीन बनाए गए सभी विनियम समक्ष तुरन्त प्रस्तुत किए अनुमति नहीं राष्ट्रपति के तरु न्त प्रस्तत जाएंगे और जब तक वह उन पर अनम दे जनजाति क्षेत्र- देता ता है तब तक उनका कोई प्रभाव नहीं होगा । विनिर्दिष्ट क्षेत्र श्रत्रिपुरा क्षेत्र और भाग 3 में क्रमशः असम राज्य, मेघालय राज्य, राज्य और निर्देश पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, मिजोरम राज्य के जनजाति होंगे । । राज्यक्षेत्रों निर्देश (2) नीचे दी गई सारणी के भाग 1, भाग 2 या भाग 3 में किसी जिले के प्रति श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह पव (पन गर्ठन) 1971 की धारा 2 के खंड (ख) के अधीन नियत किए गए दिन से ठीक पहले विद्यमान उस नाम क्षेत्र के स्वशासी जिले में समाविष्ट के प्रति हैं: परन्तु इस अनुसूची के पैरा 3 के उप-पैरा (1) के खंड (ड) और खंड (च), पैरा 4, क्षेत्र पैरा 5, पैरा 6, पैरा 8 के उप-पैरा (2), उप-पैरा (3) के खंड (क), खंड (ख) और खंड (घ) निर्देश क्षेत्र और उप-पैरा (4) तथा पैरा 10 के उप-पैरा (2) के खंड (घ) के प्रयोजनों के लिए, अनुसूची विनिर्दिष्ट जनजाति क्षेत्रों समाविष्ट राज्यक्षेत्र शिलांग नगरपालिका में समाविष्ट के किसी भाग के बारे में यह नहीं समझा जाएगा निर्देश कि वह खासी पहाड़ी जिले के भीतर है । पूर्वोत्तर क्षेत्र शू(3)
  108. (3) नीचे दी गई सारणी के भाग 2क में “त्रिपुरा जनजाति जिला” के प्रति श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह त्रिपुरा जनजाति स्वशासी जिला परिषद् संविधान अधिनियम, 1979 की पहली अनस में च मिजोरम में के प्रति श है । संविधान (21-1-1972 से) पैरा 20 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । । पर प्रतिस्थापित । । शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । तारीख 23-6-1973, प.ृ 200 दूवारा प्रतिस्थापित । (छठी अनुसूची) सारणी भाग १. ' कार्बी 2 थू3. बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला 3. प्रादे । भाग भाग 2क भूभाग त्रिपुरा जनजाति जिला । । क्षेत्र भाग 3 5्द हज हज गु।. बात के मिजो जिला परिषद् होते हुए भी, विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान मिजो जिले की जिला परिषद् (जिसे इसमें इसके पश्चात ् कहा गया है) विघटित हो जाएगी और विद्यमान नहीं रह जाएगी (का दि । लय जिला" के स्थान पर प्रतिस्थापित ।.. । अंतःस्थापित ।.. । तारीख 23-6-1973, पृ. 200 दूवारा प्रतिस्थापित ।.. । संविधान छठी 5. संघ राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) अधिनियम, 1971 (1971 का 83) की धारा 13 द्वारा (16-2-1972 से) "मिजो जिला" शब्दों का लोप किया गया । (प्रकीर्ण उपबंध) आदेश, श, 1972 दूवारा (29-4-1972 से) अंतःस्थापित । सं0 2 और 3 तथा उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । (21-1-1972 से) पैरा 20 के स्थान पर पैरा प्रतिस्थापित किया गया और तत्पश्चात ् संघ राज्यक्षेत्र शासन संविधान (संशोधन) अधिनियम, 1971 (1971 का 83) की धारा 13 दवारा (16-2-1972 से) पैरा 20क के स्थान पर प्रतिस्थापित । मिजोरम संविधान छठी पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, (छठी अनुसूची)
  109. (2) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक, एक या अधिक आदेशों द्वारा, निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेगा, अर्थात्:- अथार्त ्:–
  110. (क) मिजो जिला परिषद् की अधिकारों और दायित्वों का आस्तियों, (जिनके अतंर्गत उसके द्वारा की गई किसी संविदा के अधीन अधिकार और दायित्व हैं) पूर्णतः या भागतः संघ को या किसी अन्य प्राधिकारी को अंतरण
  111. (ख) किन्हीं ऐसी विधिक मैं, मिजो जिला परिषद् एक है, मिजो जिला परिषद् के स्थान पर संघ का या किसी अन्य प्राधिकारी कार्यवाहियों जिनमें का के रूप में रखा जाना अथवा संघ का या किसी अन्य प्राधिकारी का पक्षकार के रूप में जोड़ा जाना; पक्षकार (ग) मिजो जिला परिषद् के किन्हीं का संघ को या किसी पक्षकार अन्य प्राधिकारी को अथवा उसके द्वारा अंतरण या पुनर्नियोजन, ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात ् उन को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और कर्मचारियों (घ) मिजो जिला परिषद् द्वारा बनाई गई और उसके विघटन से ठीक पहले प्रव का, ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के, चाहे वे निरसन के रूप कर्मचारियों शर्ते; में हों या संशोधन के रूप में, अधीन रहते हुए जो प्रशासक दूवारा इस किए जाएं, तब तक प्रव बना रहना जब तक किसी विधान-मंडल द्वारा या अन्य प्राधिकारी दूवारा ऐसी मैं निरसन या संशोधन नहीं प्रवृत्त किन्हीं विधियों कर दिया जाता है; निमित्त (ड) ऐसे आनुष॑गिक, पारिणामिक और अनुपूरक विषय जो प्रशासक आवश्यक समझे। प्रवृत्त सक्षम स्पष्टीकरण-- इस पैरा में और इस अनुसूची के पैरा 20ख में, “विहित तारीख” पद सक्षम विधियों परिवर्तन, से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा का, संघ राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1963 (1963 का 20) के उपबंधों के अधीन और उनके अनुसार, सम्यक् रूप से गठन होता है । उसके पारिणामिक संक्रमणकालीन उपबंध—
  112. (1) इस अनुसूची में किसी बात के होते हुए भी,–
  113. (क) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र मैं विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान प्रत्येक स्वशासी प्रदेश श उस तारीख को और से उस संघ राज्यक्षेत्र का स्वशासी जिला (जिसे इसमें इसके पश्चात ्, तत्स्थानी नया जिला कहा गया है) हो जाएगा और उसका प्रशासक, एक या अधिक आदेशों द्वारा, श दे सकेगा कि इस 3 अनुसूची के पैरा 20 में (जिसके अंतर्गत उस पैरा से संलग्न सारणी का भाग 3 है) ऐसे पारिणामिक संशोधन किए जाएंगे जो इस खंड के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक हैं और तब उक्त पैरा और उक्त भाग 3 के बारे में यह समझा जाएगा कि उनका तदनुसार संशोधन कर दिया गया है; दूवारा, निदेश पैरा 20 का के स्थान पर प्रतिस्थापित । (छठी अनुसूची)
  114. (ख) मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र मैं विहित तारीख से ठीक पहले विद्यमान स्वशासी प्रादेशिक परिषद् (जिसे इसमें विद्यमान प्रादेशिक परिषद् प्रदेश की प्रत्येक प्रादे (िजसे इसके पश्चात ् प्रादे कहा गया है) उस तारीख को और से और जब तक तत्स्थानी नए जिले के लिए परिषद् का सम्यक् रूप से गठन नहीं होता है तब तक, उस जिले की जिला परिषद् (जिसे इसमें इसके पश्चात ् तत्स्थानी नई जिला परिषद् कहा गया है) समझी जाएगी । विद्यमान प्रादेशिक परिषद् निर्वाचित नामनिर्देशित (2) प्रादे का प्रत्येक या सदस्य यथास्थिति, निर्वाचित नामनिर्देशित तत्स्थानी नई जिला परिषद् के लिए, या समझा जाएगा और तब तक पद धारण करेगा जब तक इस अनुसूची के अधीन तत्स्थानी नए जिले के लिए जिला परिषद् का सम्यक् रूप से गठन नहीं होता है (3) जब तक तत्स्थानी नई जिला परिषद् द्वारा इस अनुसूची के पैरा 2 के उप-पैरा (7) और पैरा 4 के उप-पैरा (4) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक विद्यमान प्रादेशिक परिषद् दूवारा प्रादे द्वारा उक्त उपबंधों के अधीन बनाए गए नियम, जो विहित तारीख से प्रवृत्त ठीक पहले प्रव हैं, तत्स्थानी नई जिला परिषद् के संबंध मैं ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे जो मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक द्वारा उनमें किए जाएं । मिजोरम (4) संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक, एक या अधिक आदेशों द्वारा, निम्नलिखित अर्थात्:-- सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेगा, अथार्त ्:— प्रादेशिक परिषद् की आस्तियों, अधिकारों (क) विद्यमान प्रादे और दायित्वों का (जिनके अंतर्गत उसके द्वारा की गई किसी संविदा के अधीन अधिकार और पूर्णतः दायित्व हैं) पण र्तः या भागतः तत्स्थानी नई जिला परिषद् को अंतरण; कार्यवाहियों जिनमें प्रादेशिक परिषद् पक्षकार प्रादेशिक परिषद् (ख) किन्हीं ऐसी विधिक में, विद्यमान प्रादे पक्षकार एक है, विद्यमान प्रादे के स्थान पर तत्स्थानी नई जिला परिषद् का के रूप में रखा जाना; प्रादेशिक परिषद् कर्मचारियों पुनर्नियोजन
  115. (ग) विद्यमान प्रादे के किन्हीं का तत्स्थानी नई कर्मचारियों जिला परिषद् को अथवा उसके दूवारा अंतरण या पन शर्तैं; ऐसे अंतरण या पुनर्नियोजन के पश्चात ् उन को लागू होने वाले सेवा के निबंधन और भारत का संविधान सं वधान 308 अनुसूची) (छठी अनु सू ची) विद्यमान प्रादेशिक परिषद् दूवारा विहित तारीख (घ) व यमान शक प रष वारा बनाई गई और व हत तार ख से ठीक क प्रवृत्त किन्हीं विधियों अनुकूलनों पहले वृ त क ह ं व धय का, ऐसे अनु कूलन और उपांतरणों के, चाहे वे प्रशासक निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, अधीन रहते हुए ए जो शासक द्वारा निमित्त किए प्रवृत्त सक्षम विधान-मंडल इस न म त कए जाएं, तब तक वृ त बना रहना जब तक स म दूवारा वधान-मंडल अन्य सक्षम प्राधिकारी दूवारा विधियों परिवर्तन, निरसन वारा या अ य स म धकार वारा ऐसी व में म प रवतन, नरसन या संशोधन नहीं ं कर दिया जाता है; आनुष॑गिक, पारिणामिक अनुपूरक विषय प्रशासक आवश्यक (ड) ऐसे आनु षं गक, पा रणा मक और अनु पू रक वषय जो शासक आव यक समझे । 1 राज्यपाल द्वारा कृत्यों निर्वहन वैवेकिक शक्तियों 20खक.– रा यपाल वारा अपने कृ य के नवहन में वैवे कक शि तय का प्रयोग- राज्यपाल, अनुसूची योग— रा यपाल, इस अनु सूची के पैरा 1 के उप-पैरा (2) और उप-पैरा (3), पैरा 2 के परंतुक उप-पैरा(1), उप-पैरा(6), उप-पैरा(6क) के पहले परं तु क को छोड़कर और उप-पैरा (7) पैरा रा 3 के उप-पैरा (3) पैरा 4 के उप-पैरा (4) पैरा 5 के पैरा 6 के उप-पैरा(1), पैरा 7 के उप- पैरा(2), पैरा 8 के उप-पैरा (4), पैरा 9 के उप-पैरा (3), पैरा 10 के उप-पैरा (3), पैरा 14 पैरा के उप-पैरा (1), पै रा 15 के उप-पैरा (1), और पैरा 16 के उप-पैरा (1), और उप-पैरा (2), कृत्यों निर्वहन मंत्री परिषद यथास्थिती, उत्तरी के अधीन अपने कृ य के नवहन में, मं - प रषद और थती, उ तर कछार परिषद कार्बी आंगल्लांग पहाड़ी स्वशासी परिषद पहाड़ी स्वशासी प रषद या काब आं गलांग पहाड़ी वशासी प रषद से परामर्श से परामर्श पश्चात् स्वविवेकानुसार आवश्यक करने के प चात ् ऐसी कार्रवाई करेगा, गा, जो वह व ववे कानु सार आव यक मानता है । शू20खख.- राज्यपात्र 2 द्वारा कृत्यों निर्वहन वैवेकिक शक्तियों 20खख.– रा यपाल वारा अपने कृ य के नवहन में वैवे कक शि तय का प्रयोग- राज्यपाल, अनुसूची योग— रा यपाल, इस अनु सू ची के पैरा 1 के उप-पैरा (2) और उप-पैरा (3) पैरा 2 के उप-पैरा(1), उप-पैरा(7), पैरा रा 3 के उप-पैरा (3) पैरा 4 के उप-पैरा (4) पैरा 5, पैरा रा 6 के उप-पैरा(1), पैरा 7 के उप-पैरा(2), पैरा 9 के उप-पैरा (3), पैरा 14 के उप-पैरा (1) पैरा 15 के उप-पैरा (1), और पैरा रा 16 के उप-पैरा (1), और उप-पैरा (2), के अधीन अपने कृत्यों निर्वहन मंत्री-परिषद आवश्यक संबंधित जिला कृ य के नवहन में, मं रषद से और यदि द वह आव यक समझे तो संबं धत परिषद प्रादेशिक परिषद पश्चात् प रषद या शक प रषद से परामर्श करने के प चात ् ऐसी कार्रवाई करेगा, गा, जो वह स्वविवेकानुसार व ववे कानु सार समझे। संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, राज्य पश्चात् अंत:स्थापित किया संविधान छठी अनुसूची (संशोधन) अधिनियम, असम रा य को लागू करने में पैरा 20ख के प चात ् पैरा 20खक अंत: था पत कया गया। 2 सं वधान छठ अनु सू ची (सं शोधन) अ ध नयम, 1988 (1988 का 67) की धारा 2 दवारा (16-12-1988 से) पैरा 20ख के प चात ् पैरा 20खख अंत: था पत कया गया। (छठी अनसूची) निमित्त अनसु च निर्देश के उपबंध मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र को उनके लागू होने में इस प्रकार प्रभावी अनुच्छेद नियुक्त निर्देश होंगे-- निर्देश मिजोरम (1) मानो राज्य के राज्यपाल और राज्य की सरकार के प्रति श निर्देश निर्देश मिजोरम छे द 239 के अधीन त संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक के प्रति हों; निर्देश (“राज्य की सरकार” पद के सिवाय) राज्य के प्रति श संघ राज्यक्षेत्र के प्रति हों और राज्य विधान-मंडल के प्रति श संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा के प्रति हों
  116. (2) मानो–
  117. (क) पैरा 4 के उप-पैरा (5) में संबंधित राज्य की सरकार से परामर्श करने के उपबंध का लोप कर दिया गया हो
  118. (ख) पैरा 6 के उप-पैरा (2) में, “जिस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है” शब्दों के स्थान पर “जिसके संबंध में मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा को विधियां बनाने की शक्ति है” शब्द रख दिए गए हों
  119. (ग) पैरा 13 में, “अनुच्छेद द 202 के अधीन” शब्दों और अंकों का लोप कर दिया गया हो । के उपबंधों में से किसी का, या निरसन के रूप में संशोधन कर सकेगी संसद, और जब अनसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनसूची परिवर्धन, परिवर्तन के प्रति किसी श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनस च निर्देश अनसूची के प्रति श है । निर्देश (2) ऐसी कोई विधि जो इस पैरा के उप-पैरा में है, इस संविधान के अनच् उल्लिखित छे द 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी । अनुच्छेद पैरा 20क के स्थान पर प्रतिस्थापित । । सातवीं अनुसूची (अनुच्छेद द 246) सूची 1– संघ सूची. रक्षा, रक्षा तैयारी और ऐसे सभी कार्य हैं, जो यद् ध के समय यद् ध के संचालन और उसकी समाप्ति के पश्चात ् प्रभावी सैन्यवियोजन में सहायक हों । वायुसेना; संघ के अन्य सशस्त्र बल । 1 यूनिट का या उसकी किसी टुकड़ी या नट का किसी राज्य में सिविल शक्ति की सहायता में अभिनियोजन; ऐसे अभिनियोजन के समय ऐसे बलों के सदस्यों की शक्तियां, अधिकारिता, विशेषाधिकार और दायित्व । क्षेत्रों क्षेत्रों क्षेत्रों भीतर छावनी प्राधिकारियों का गठन और उनकी शक्तियां तथा ऐसे में गृह वास- सुविधा का विनियमन (जिसके अंतर्गत भाटक का नियंत्रण है) । रक्षा आवश्यक घोषित किए गए उद्योग । केन्द्रीय प्रकार निरोध में रखे गए व्यिक्त । रक्षा, विदेश कार्य सुरक्षा है । किए गए का कायार्न्वयन। राजनयिक, कौंसलीय अभिसमयों का कायार्न्वयन । अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संगमों विनिश्चयों कार्यान्वयन। 310 विदेशों विदेशों कार्यान्वयन ।. संविधान (बयाल्लीसवां (सातवीं अनुसूची) वैदेशिक अधिकारिता । 16. । समद्र या आकाश में राष्ट्रों की विधि के विरुदूध किए गए अपराध । राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया है । और नौ परिवहन जो संसद् द्वारा द्वारा जलमागर् गए हैं; ऐसे जिन्हें पर मार्ग का नियम । । 25.समद्र पोत परिवहन और नौ परिवहन, जिसके अतंर्गत ज्वारीय जल में अंतर्देशीय जलमार्गों पोत परिवहन और नौ परिवहन है; वाणिज्यिक समृद्री बेड़े के लिए और दूवारा विधि राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए की व्यवस्था तथा राज्यों और अन्य अभिकरणों द्वारा दी जाने वाली ऐसी और जलमार्गों का विनियमन । । 25.समृद्री वायय शिक्षा प्रशिक्षण की सरु के लिए अन्य व्यवस्था है । प्रशिक्षण उसके अधीन घोषित किया जाता है, जिसके अंतर्गत उनका परिसीमन और उनमें प्राधिकारियों का गठन और उनकी शक्तियां हैं । वायुयानों सुरक्षा समुद्रीय अस्पताल । पत्तन जिन्हें यातायात और का विनियमन और संगठन; वैमानिक और के महापत्तन लिए व्यवस्था तथा राज्यों और अन्य अभिकरणों द्वारा दी जाने वाली ऐसी और पत्तन का विनियमन । । पत्तन दवारा यात्रियों और माल का वहन । वायमार्ग, विमानक्षेत्रों विमानक्षेत्रों शिक्षा प्रशिक्षण शिक्षा प्रशिक्षण रेल, समद्र जलमार्गों मात्र (सातवीं अनुसूची) टेलीफोन, कं न न न थी देशी राज्यों के संबंध में, वहां तक के सिवाय जहां तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध करे, उस राज्य के विधान के अधीन रहते हुए । 2 करेंसी, सिक्का निर्माण विदेशी 33* * * * * विदेशों आयात और सीमाशुल्क सीमांतों का परिनिश्चय । । अंतरराज्यिक तु हैं, और परिसमापन । । वित्तीय नहीं, जिनके उद्दे श्य एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, निगमन, विनियमन और किंतु सहकारी सोसाइटी नहीं निगमन, विनियमन परिसमापन । । 45. । बैंककारी वस्तु चिहन ।. । विनिमय-पत्र, लिखरतें । 1. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) "पहली अनूसूची के भाग क या भाग ख में शब्दों और का लोप किया गया । गया । पेटेंट, आविष्कार प्रतिल्रिप्यधिकार; संविधान विनिर्दिष्ट" अक्षरों संविधान (सातवीं अनुसूची) परिवहन किए जाने वाले माल की क्वालिटी के मानक नियत करना । संघ का नियंत्रण लोक हित में समीचीन है । पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद; अन्य द्रव और पदार्थ जिनके विषय में संसद् ने विधि तेबक्षेत्रों संपत्ति दूवारा घोषणा की है कि वे खतरनाक रूप से ज्वलनशील हैं । के नियंत्रण के अधीन ऐसे विनियमन और विकास को संसद, विधि द्वारा, लोक हित मैं समीचीन घोषित करे । विकास जिस तक संघ के नियंत्रण के अधीन ऐसे विनियमन और विकास को संसद, विधि दूवारा, लोक हित में समीचीन घोषित करे । दूनों अभिकरणों दूवारा किए गए नमक के प्रदाय और वितरण का विनियमन और नियंत्रण । । विनिर्माण, यद् विनिर्माण, ध संग्रहालय, विक्टोरिया स्मारक और भारतीय यद् ध स्मारक नामों से संस्थाएं और भारत सरकार दूवारा पूर्णतः या भागतः और संसद द्वारा, विधि द्वारा, राष्ट्रीय महत्व की घोषित वैसी ही कोई अन्य संस्था । और दिल्‍ली विश्वविद्यालय नामों से संस्थाएं; अनुच्छेद 375 371ङ के प्रदर्शन अनुसरण में स्थापित विश्वविद्यालय; संसद् द्वारा, विधि द्वारा राष्ट्रीय महत्व की घोषित कोई अन्य संस्था । कर्मचारियों युदूध युदूध ज्ञात 1. संशोधन) अधिनियम, 1973 की धारा 4 द्वारा (1-7-1974 से) "दिल्ली विश्वविद्यालय और" के वित्तपोषित स्थान पर प्रतिस्थापित । । विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ज्ञात संविधान (बत्तीसवां (सातवीं अनुसूची) वित्तपोषित दूवारा, राष्ट्रीय महत्व की घोषित या तकनीकी संस्थाएं ।
  120. (क) या तकनीकी के लिए हैं जिसके अंतर्गत अधिकारियों प्रशिक्षण पुलिस का है; या अभिवृद्धि (ख) विशेष अध्ययन या अनुसंधान की के लिए हैं; या वैज्ञानिक (ग) अपराध के अन्वेषण या पता चलाने में या तकनीकी सहायता के लिए हैं । शिक्षा वैज्ञानिक संस्थाओं में मानकों का समन्वय और अवधारण । प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख तथा परु स्थल और 1 सर्वेक्षण, भू-वैज्ञानिक, विज्ञान, विज्ञान सर्वेक्षण; विज्ञान अवशेष । मानव शास्त्र ण; मौसम संगठन । अर्थात् संदेय पैंशनें । उपराष्ट्रपति के पदों के लिए आयोग । संसद समितियों सभा के और के वेतन और । समक्ष साक्ष्य व्यक्तियों शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मक्तियां; संसद् की या संसद् द्वारा नियक्त राष्ट्रपति भत्ते, आयोगों के देने ने या दस्तावेज पेश करने के लिए को हाजिर भत्ते; कराना । महालेखापरीक्षक भत्ते अनपस्थिति अनुपस्थिति छुट्टी के संबंध में अधिकार; संघ के मंत्रियों के वेतन और नियंत्रक- के वेतन, और छूट्टी के संबंध में अधिकार और सेवा संविधान की अन्य । घोषित" के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (सातवीं अनुसूची) संपरीक्षा । अंतर्गत उस न्यायालय का अवमान है) और उसमें त्ली जाने वात्री फीस; उच्चतम न्यायालय के समक्ष विधि-व्यवसाय करने के हकदार व्यिक्त । अधिकारियों उच्च न्यायालयों का गठन और संगठन ' (जिसके अंतर्गत है); उच्च दीर्घावकाश न्यायालयों के विधि-व्यवसाय करने के हकदार व्यक्ति। समक्ष थू79. किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता का किसी संघ राज्यक्षेत्र पर विस्तारण और उससे अपवजर्न । किसी शक्तियों राज्य से बाहर किसी पर विस्तारण, किन्तु इस प्रकार नहीं कि एक राज्य की पुलिस क्षेत्र उस राज्य से बाहर किसी में उस राज्य की सरकार की सहमति के बिना क्षेत्र जिसमें ऐसा स्थित है, और अधिकारिता का प्रयोग करने में समर्थ हो सके; किसी क्षेत्र शक्तियों राज्य के पुलिस बल के सदस्यों की और अधिकारिता का उस राज्य से बाहर शक्तियों रेल ल पर विस्तारण । ।
  121. (क) अपरिष्कृत पैट्रोलियम; निर्यात (ख) उच्च गति डीजल
  122. (ग) मोटर (सामान्य रूप से पेट्रोल के रूप में विनिर्मित निम्नलिखित --
  123. (घ) प्राकृतिक गैस
  124. (ड) विमानन टबार्इन ईंधन; और
  125. (च) तंबाकू और तंबाकू उत्पाद । टर्बाइन स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (भूतलक्षी 3. (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 17(क)(i) दूवारा (16-9-2016 से) प्रविष्टि 84 के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान संविधान पन्ि (सातवीं अनुसूची) व्यथ्टियों आस्तियों है, पूंजी मूल्य पर कर; कंपनियों की पूंजी पर कर । कर; रेल ल और माल पर कर । भाड़ों भाड़ों कर । के अंतरण, और प्राप्तियों के संबंध में स्टांप-शुल्क की दर । न न न थी * * * विनिमय-पत्रों, चेकों, वचनपत्रों, प्रत्ययपत्रों, पालिसियों, 2 ऐसा क्रय या विक्रय अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है । थू92क. समाचारपत्रों मात्र अन्य व्यक्ति को किया गया है), उस दशा में कर ऐसा परेषण षण जिसमें व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है । अपराध । विधियों और आंकड़े । किसी विषय के संबंध में अधिकारिता और शक्तियां; नावधिकरण विषयक अधिकारिता । । अंतर्गत किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीस नहीं है । 3 में प्रगणित नहीं है और जिसके अंतर्गत कोई ऐसा कर है जो उन सूचियों में से किसी सूची में नहीं है । लोप किया गया । उल्लिखित 3. संशोधन) अधिनियम, 1982 की धारा 5 द्वारा (2-2-1983 से) अंतःस्थापित । । संविधान अंतःस्थापित की गई थी और उसका संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 17(क)(ii) दूवारा (16-9-2016 से) लोप किया गया । संविधान संविधान (छियाबीसवां प्रविष्टि (सातवीं अनुसूची) सूची 2 2– राज्य सूची 1 की प्रविष्टि नौसेना, सेना या वायु सेना या संघ के किसी अन्य सशस्त्र बल का या संघ के नियंत्रण अंतर्गत रेल पत्सि के अधीन किसी अन्य बल का या उसकी किसी टुकड़ी या यूनिट का प्रयोग नहीं है) । 2 बौर्स्टल अंतगर्त रे ल और ग्राम है)। की प्रक्रिया; उच्चतम न्यायालय से भिन्न सभी न्यायालयों में ली जाने वाली फीस । । उनमें निरुदूध व्यक्ति; कारागारों और अन्य संस्थाओं के उपयोग के लिए अन्य राज्यों से ठहराव । प्राधिकारियों और स्थानीय स्वशासन या ग्राम प्रशासन के प्रयोजनों के लिए अन्य अर्थात् विनिर्माण, स्थानीय प्राधिकारियों का गठन और शिक्तयां । क्रय और विक्रय । । 11* * * * * वित्तपोषित संस्थाएं; संसद दूवारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व के शूघोषित 5 किए गए प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारकों और अभिलेखों से भिन्न प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक और अभिलेख ।. । संविधान (बयाल्लीसवां प्रतिस्थापित । संविधान (बयाल्लीसवां प्रतिस्थापित । संविधान 3. (बयाल्लीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 57 दूवारा (3-1-1977 से) कुछ शब्दों का लोप किया गया । संविधान (बयालीसवां गया । घोषित" प्रतिस्थापित । हर संविधान एज मी पा (सातवीं अनुसूची) अर्थात् सड़कें, हैं; ट्राम; रज्जमु शीय के संबंध में सूची अंतर्देशीय जलमार्ग और सूची 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, शीय जलमागर् और उन पर यातायात; यंत्र-नोदित यानों से भिन्न यान । कृषि जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा संरक्षण पादप रोगों का निवारण है । निवारण; पशुचिकित्सा प्रशिक्षण और व्यवसाय । प्रदाय, सिंचाई और नहरें, जल निकास और तटबंध, जल भंडारकरण और जल शिक्त । और अभिधारी का संबंध है और भाटक का संग्रहण; कृषि भूमि का अंतरण और अन्य संक्रामण; भूमि म और कृषि उधार; उपनिवेशन । । भूमि, अर्थात् भूमि 19* * * * * विकास 20* * * * * 21. । प न न न न 22. सच ई ई कं थी 1 34 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, प्रतिपाल्य-अधिकरण; मत्स्यिकी । विल्लंगमित और कुर्क की गई संपदा । सूची की प्रविष्टि उपबंधों के अधीन रहते हुए, खानों का विनियमन और खनिज विकास । । 24. की 7 और प्रविष्टि 52 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उद्योग । व्यापार और वाणिज्य ।. । का लोप किया गया । संविधान (बयाललीसवां प्रतिस्थापित । संविधान (सातवीं अनुसूची) प्रदाय और वितरण । । 29. * कर कं कर कं थी 1 साहूकारी * * * * विनिर्दिष्ट निगमों विश्वविद्यालयों का निगमन, विनियमन और परिसमापन; अनिगमित व्यापारिक, साहित्यिक, और अन्य सोसाइटियां और संगम; सहकारी सोसाइटियां । । रहते हुए, सिनेमा; खेलकूद, मनोरंजन जन और आमोद । 36. * * * * विधान-मंडल के लिए । निर्वाचन । के और, यदि विधान परिषद् है तो, उसके सभापति और उपसभापति के वेतन और । अध्यक्ष उपाध्यक्ष परिषद् है तो, उस विधान परिषद् की और उसके सदस्यों और की शक्तियां, भत्ते । विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां; राज्य के विधान-मंडल की के देने ने या दस्तावेज पेश करने के लिए को हाजिर कराना । व्यक्तियों पेंशन । । भत्ते 44. । अर्थात् गया । निखात निधि ।. गया । संविधान (बयाल्लीसवां संविधान (सातवीं अनुसूची) निर्धारण राजस्व के प्रयोजनों के लिए और अधिकारों के अभिलेखों के लिए ण और राजस्व का अन्य संक्रामण है । के अधीन रहते हुए, खनिज संबंधी अधिकारों पर कर । भारत में अन्यत्र या उत्पादित वैसे ही माल पर उसी दर या निम्नतर दर से निर्बन्धनों प्रतिशुल्क-
  126. (क) मानवीय उपभोग के लिए ऐल्कोहाली लिकर
  127. (ख) अफीम, इंडियन हेंप प और अन्य स्वापक ओषधियां तथा स्वापक विनिर्मित निम्नलिखित पदार्थ, विनिर्मित किन्तु जिसके अंतर्गत ऐसी ओषधियां और प्रसाधन नहीं हैं ऐल्‍्कोहाल या इस प्रविष्टि के उप-पैरा(ख) का कोई पदार्थ है । अंतर्विष्ट पेट्रोल के रूप में प्राकृतिक गैस, विमानन टबार्इन ईंधन और मानवीय उपभोग के लिए लिकर के विक्रय पर कर तु इसके अंतर्गत ऐसे माल का न कर कर कर भी अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनुक्रम मैं विक्रय या अन्तरराष्ट्रीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान विक्रय नहीं आता है । विद्युत 3 ज्ञात), टर्बाइन पर कर । एल्‍कोहाल्ली किंत॒ मात्र लोप किया गया । शु55. न न न न भी 2. (छठा संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 2 द्वारा (11-9-1956 से) प्रतिस्थापित तथा पुनः संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 17(ख)(ii) दूवारा (16-9-2016 से) प्रतिस्थापित । सड़कों अन्तर्देशीय जलमार्गों दवारा 3. संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 17(ख)(iii) दूवारा (16-9-2016 से) लोप किया गया । संविधान संविधान (सातर्वी अनसूची) सड़कों के योग्य यानों पर कर, चाहे वे यंत्र नोदित हों या नहीं, जिनके अंतर्गत ट्रामकार हैं । ं और नौकाओं पर कर । किसी नगरपालिका या किसी प्रादे या किसी जिला परिषद् दवारा उद्गह मनोरंजन और संग जाए । संगहीत किया से भिन्न दस्तावेजों के संबंध में स्टांप-शुल्क की दर । विनिर्दिष्ट अपराध । किसी विषय के संबंध में अधिकारिता और शिक्तयां । अंतर्गत किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीस नहीं है । सूची 3– सूची दंड दं ड अंतगर्त ऐसे सभी विषय हैं जो इस संविधान के प्रारंभ भ पर भारतीय दंड ड के अंतर्गत आते हैं, किन्त इसके अंतर्गत सूची 1 या सूची 2 में विषयों में से किसी विषय से संबंधित के विरुद्ध अपराध और सिविल शक्ति की सहायता के लिए नौसेना, सेना या वायसेना अथवा संघ के किसी अन्य सशस्त्र बल का प्रयोग नहीं है । - समवर्ती दंड ड के अंतर्गत हैं । विधि जिसके अंतर्गत आवश्यक प्रदायों और सेवाओं को बनाए रखने संबंधी कारणों से निवारक निरोध, इस संहिता प्रकार निरोध में रखे गए व्यिक्त । से निवारक निरोध मैं रखे गए का एक राज्य से द राज्य को हटाया जाना । प्रक्रिया जिसके अंतर्गत प्रक्रिया संहिता 1. (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 7(ख)(४) दूवारा (16-9-2016 से) प्रविष्टि 62 के स्थान पर प्रतिस्थापित । । सुरक्षा, बंदियों, अभियक्त व्यक्तियों विनिर्दिष्ट व्यक्तियों दूसरे संविधान (सातवीं अनुसूची) शिशु दत्तक- और अविभक्त कुटुम्ब और विभाजन; वे सभी विषय, जिनके संबंध में न्यायिक कार्यवाहियों पक्षकार में इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले अपनी स्वीय विधि के अधीन थे । रजिस्ट्रीकरण । । संविदाएं, जिनके अंतर्गत भागीदारी, अभिकरण, विशेष प्रकार की संविदाएं हैं, किन्तु कृषि भूमि संबंधी संविदाएं नहीं हैं । का गठन और संगठन । को मान्यता । न्यायालयों पर सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत आते हैं, परिसीमा और माध्यस्थम ् । साक्ष्य विधियों, कार्यों नहीं है । सिविल प्रक्रिया, जिसके अंतर्गत को ग्रहण करने या उनका उपचार करने के स्थान हैं । ं के प्रति क्रूरता का निवारण । । व्यक्तियों मादक द्रव्य और विष । । पक्षियों संरक्षण और 20क अंतःस्थापित । । पदार्थों अफीम आर्थिक संविधान (बयाल्लीसवां (सातवीं अनुसूची) का दायित्व, कर्मकार प्रतिकर, अशक्तता और वार्धक्य पेंशन तथा प्रसूति सुविधाएं हैं । शिक्षा जिसके अंतर्गत तकनीकी शिक्षा, आयर्विज्ञान शिक्षा और विश्वविद्यालय हैं; अंतगर्त और प्रशिक्षण । का व्यावसायिक और तकनीकी । डोमिनियनों निवास-स्थान से विस्थापित की सहायता और पुनवार्स । पूर्त कार्य धार्मिक धार्मिक रोगों अथवा नाशकजीवों के एक राज्य से द राज्य मैं फैलने का निवारण । । दूसरे घोषित से भिन्न । सांख्यिकी, मृत्यु रजिस्ट्रीकरण शीय पर यंत्र नोदित जलयानों के संबंध में पोत परिवहन और नौ परिवहन तथा ऐसे पर मार्ग का नियम और दवारा यात्रियों और माल का वहन शू33. महापत्तन पत्तनों पत्तन । 2 राष्ट्रीय जलमार्गों लोकहित में समीचीन घोषित किया जाता है वहां उस उद्योग के उत्पादों का और उसी अंतर्देशीय जलमार्गों प्रकार के आयात किए गए माल का ऐसे उत्पादों के रूप में; जलमार्गों अंतर्देशीय जलमार्गों (ख) खाद्य का जिनके अंतर्गत खाद्य तिलहन और तेल हैं (ग) पशुओं के चारे का जिसके अंतर्गत और अन्य सारकृत चारे हैं:
  128. (घ) कच्ची कपास का, चाहे वह ओटी हुई हो या हो, और बिनौले का; और
  129. (ड) कच्चे जूट का, व्यापार और वाणिज्य तथा उनका उत्पादन, प्रदाय और वितरण । पदार्थों खल्ली 1. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 57 दूवारा (3-1-1977 से) प्रतिस्थापित । ओटी प्रतिस्थापित । संविधान (बयाल्लीसवां (सातवीं अनुसूची) है । ऐसे यानों पर कर उद्ग जाना है । 38. । शूघोषित 2 पुरातत्वीय स्थलों पुरातत्वीय परु और अवशेषों से भिन्न परु स्थल और अवशेष । जो विधि द्वारा निष्क्रांत संपत्ति घोषित की जाए अु42. लोक मांगों की वसूली जिनके अंतर्गत भू-राजस्व की अंतगर्त भ-ू राजस्व बकाया और ऐसी बकाया के रूप में वसूल की जा सकने वाली राशियां हैं । संगृहीत शुल्कों किन्तु इसके अंतर्गत स्टांप-शुल्क की दरें क नहीं हैं । विनिर्दिष्ट लिए जांच और आंकड़े । किसी विषय के संबंध में अधिकारिता और शिक्तयां । अंतर्गत किसी न्यायालय में ली जाने वाली फीस नहीं है । संविधान (बयाल्लीसवां 2. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 27 दवारा (1-11-1956 से) "संसद् दूवारा बनाई गई विधि दूवारा या उसके अधीन घोषित" के स्थान पर प्रतिस्थापित । । प्रतिस्थापित । । संविधान आठवीं अनुसूची अनुच्छेद द 344(1) और अनुच्छेद द 351 भाषाएं असमिया । 1. । 2 हिन्दी 5. गुजराती । 3 अू8. कश्मीरी अू7. । “थू9. कॉंकणी 3 मैथिली 7. कन्नड । 3 " ग।2. मणिपुरी 8. । गु3. मराठी गु. । “धुध4. नेपाली 4 3 ' ओडिया 10. । 5 नि 11. मलयालम । 12. । ्ज गु5. 6 (जा ए़ि ०46. 13. । 14. । 4 6 लय 6 संविधान 15. 16. पंजाबी गू7. संविधान 17. संस्कृत । संविधान अन्तःस्थापित ।. । में पुनःसंख्यांकित किया गया । संविधान प्रविष्टि 6 से प्रविष्टि 9 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । प्रविष्टि 12 से प्रविष्टि 17 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । संविधान (छियानवेवां 7. संशोधन) अधिनियम, 2011 की धारा 2 द्वारा (23-9-2011 से) “उड़िया” के स्थान पर प्रतिस्थापित। भारत का संविधान सं वधान 326 (आठवीं अनुसूची) अनु सू ची) संथाली 1 थूगू9. सिंधी 2 तेलुगू 19. संधी । ू22. उर्दू दि.. 20. त मल । (० 21. तेलु गू । 22. उदू । संविधान अधिनियम, अन्तःस्थापित ।.. संविधान (इक्कीसवां अधिनियम, संविधान अधिनियम, प्रविष्टि प्रविष्टि रूप में पु नःसं यां कत कया गया । वि ट 20 से वि ट 22 के रूप में पु नःसं यां कत कया गया । नवीं अनुसूची (अनच्छेद द 31ख) बिहार भूमि सधार अधिनियम, 1. सुधार 1950 (1950 का बिहार अधिनियम 30) । अधिनियम 67) । 62) । मुंबई तालुकदारी भूधृति 63) । अधिनियम 6. मंबु ई खेती उत्सादन अधिनियम, 1950 (1950 का मंबई ई 6) । भूधृति मंबई अधिनियम ई 60) । मुंबई अधिनियम अधिनियम, 1950 (मध्य प्रदेश श क्रमांक 1 सन ् 1951) । कलकर्णी (1948 का मद्रास अधिनियम 26) । 1950 (1950 का मद्रास अधिनियम)|. 1) । अधिनियम प्रदेश श संख्या 1, 1951) । रैय्यतवाड़ी में संपरिवर्तन) का बिहार अधिनियम 38) । 1948 ई0 (संयुक्त त प्रांतीय ऐक्ट संख्या 26, 1948) । (उत्तर अधिनियम अधिनियम 60) । दूवारा यथा अंतःस्थापित बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का अधिनियम 4) की धारा 52क से धारा 52छ । थृ।4. बिहार विस्थापित व्यक्ति पुनर्वास (भूमि अर्जन) अधिनियम, प्रविष्टि 13) को जोड़ा गया । शरणार्थियों 2. (चौथा संशोधन) अधिनियम, 1955 की धारा 5 दूवारा (27-4-1955 से) प्रविष्टि 14 से प्रविष्टि 20 तक को जोड़ा गया । विस्थापित व्यक्ति पुनर्वास (भूमि अर्जन) अधिनियम, (ध948 327 रेल संविधान संविधान (नवीं अनुसूची) अधिनियम 26) की धारा 13 द्वारा यथा अंतःस्थापित उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का अधिनियम 65) का अध्याय 3क । बंगाल भूमि विकास और योजना अधिनियम, 1948 (1948 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 21) । प्रदेश अधिनियम श 10) । क्षेत्र) अभिधृति (विधिमान्यकरण) 1961 (1961 का आंध्र प्रदेश श 21) । रदूदकरण और रियायती ण उत्सादन अधिनियम, 1961 (1961 का आंध्र प्रदेश श क्षेत्र) 36)। अधिनियम 1959 (1961 का असम अधिनियम 9) । 1961 (1962 का बिहार अधिनियम सं0 12), जिसके अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 28 नहीं है । मुंबई अधिनियम)| 1) । अधिनियम, मुंबई ई 18) । अधिनियम 98) । का गज रात 16) । अधिनियम 26) । 1962 (1962 का गज रात 1) । क्षेत्र) गुजरात अधिनियम स्पष्टीकरण को जोड़ा गया । (सांपत्तिक गुजरात विनियम)|. संविधान (नवीं अनुसूची) अधिनियम 33), वहां तक के सिवाय जहां तक यह अधिनियम इसकी धारा 2 के खंड (3) के उपखंड (घ) मैं निर्दिष्ट अन्य संक्रामण के संबंध में है । महाराष्ट्र अधिनियम 27) । अतिरिक्त संशोधन) अधिनियम, 1961 (1961 का महाराष्ट्र अधिनियम 45) । अधिनियम 21) । 1959) । भूमि-कर अधिनियम, क्रमांक 20 सन ् 1960) । सुधार अधिनियम, अधिनियम 25) । भू-राजस्व संहिता, अधिनियम, का मद्रास अधिनियम 24) । का मद्रास अधिनियम 38) । अधिनियम (1961 का मद्रास अधिनियम 57) । संरक्षण (1961 का मद्रास अधिनियम 58) । (1961 का मैसूर अधिनियम 36) । कोड़गू अभिधारी अधिनियम, सुधार अधिनियम, (नवीं अनुसूची) उड़ीसा अधिनियम 10) । राजस्थान अधिनियम 8) । जर्मीदारी 1960 प्रदेश श 17, 1960) । संख्या 1, 1961) । (उत्तर अधिनियम अधिनियम)| 1) । उत्तर अधिकतम (उत्तर अधिनियम 10) । पश्चिमी अधिनियम 24) । अधिनियम 33) । अधिनियम 43) । 35) । 25) थृ67. (1973 का आंध्रि प्रदेश श 1) । त्रिपरा (संशोधन) अधिनियम, 1972 (1973 का बिहार अधिनियम). 1) । तक अंतःस्थापित । । अंतःस्थापित । । भूमि अधिनियम) बिहार भूमि निर्धारण संविधान संविधान (चौंतीसवां (नवीं अनुसूची) निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 1973 (1973 का बिहार अधिनियम 9) । अधिनियम सं0 5) । का गुजरात अधिनियम 2) । हरियाणा अधिनियम 26) । हिमाचल प्रदेश श 19) । हिमाचल प्रदेश अधिकतम भूमि अधिनियम 17) । प्रदेश श क्रमांक 12 सन ् 1974) । (मध्य प्रदेश श क्रमांक 13 सन ् 1974) । कृषिक अधिनियम)| 1) । कृषिक (1973 का राजस्थान 11)। 1969 (1969 का अधिनियम 24) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 12) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 22) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) । ई त और कृषि भूमि म (गज रात संशोधन) अधिनियम, 1972 (1973 गुडलूर जन्मम् रैय्यतवाड़ी में संपरिवर्तन) अधिनियम, का गुजरात अधिनियम 5) । अधिनियम 9) । (1974 का त्रिपुरा अधिनियम 7) । पश्चिमी पश्चिमी (दूसरा मुंबई अभिधृति (गुजरात उड़ीसा भूमि त्रिपुरा भू-राजस्व सुधार (दूसरा भारत का संविधान सं वधान 332 (नवीं अनुसूची) अनु द ची) जद जद जद जद थी 1 2 अधिनियम * * * * स्थावर संपत्ति अधिग्रहण अधिनियम, केन्द्रीय अ ध नयम 65) । अ ध नयम 30) । केन्द्रीय अधिनियम के य अ ध नयम 67) । एकाधिकार व्यापारिक व्यवहार अधिनियम, केन्द्रीय अधिनियम के य अ ध नयम 54) थू92 दर कं कं कं भी । के य अ ध नयम 64) । अधिनियम अ ध नयम 36) । (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, केन्द्रीय अ ध नयम 57) । के य अ ध नयम 58) । केन्द्रीय अधिनियम अ ध नयम 72) । रुगण कपड़ा उपक्रम (प्रबंध ग्रहण) अधिनियम, केन्द्रीय अ ध नयम 15) । अ ध नयम 26) । (प्रबंध ग्रहण) अधिनियम, केन्द्रीय 973 46) । अधिनियम (1973 का के य अ ध नयम 56) । विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, केन्द्रीय अधिनियम की सं वधान (उनताल सवां सं शोधन) अ ध नयम, 1975 क धारा 5 दूवारा (10-8-1975 से) वि ट 87 और वि ट लिमिटेड (उपक्रमों अधिनियम, 124 तक अं तः था पत । का लोप किया गया । संविधान (उनताबीसवां संशोधन) अधिनियम, प्रविष्टि प्रविष्टि 2002 त पधा अ ध नयम, 2002 (2003 का 12) की धारा 66 दूवारा (1-9-2009 से) नर सत । अंतःस्थापित । 999 वदे शी मु बंध अ ध नयम, 1999 (1999 का 42) की धारा 49 द्वारा (1-6-2000 से) नर सत । संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, प्रविष्टि प्रविष्टि प्रतिस्पर्धा अधिनियम, निरसित । विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, निरसित । (नवीं अनुसूची) (संरक्षण अधिनियम 28) । केन्द्रीय अधिनियम 37) । विदेशी संरक्षण केन्द्रीय अधिनियम 52) । अधिनियम 57) । (1965 का महाराष्ट्र अधिनियम 16) । (1965 का महाराष्ट्र अधिनियम 32) । (1968 का महाराष्ट्र अधिनियम 16) । 1968 (1968 का महाराष्ट्र अधिनियम 33) । (1969 का महाराष्ट्र अधिनियम 37) । 1969 (1969 का महाराष्ट्र अधिनियम 38) । (1970 का महाराष्ट्र अधिनियम 27) । (1972 का महाराष्ट्र अधिनियम 13) । (1973 का महाराष्ट्र अधिनियम 50) । अधिनियम 13) । अधिनियम 8) । अधिनियम 13) । उड़ीसा भूमि उड़ीसा भूमि (नवीं अनुसूची) अधिनियम 13) । अधिनियम 18) । उत्तर प्रदेश अधिकतम प्रदेश श 18, 1973) । प्रदेश श 2, 1975) । (उत्तर अधिनियम (1975 का त्रिपुरा अधिनियम 3)। (1973 का 5) । धारा 66क और अध्याय 4क * । 10 (1976 का केन्द्रीय अधिनियम 13)। अधिनियम 19) । (1976 का केन्द्रीय अधिनियम 20) । विदेशी संरक्षण 130* * * * अधिनियम 31) । केन्द्रीय अधिनियम 33) । नगर-भूमि (अधिकतम तक अंतःस्थापित । । * अब मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के सुसंगत उपबंध देखिए । संविधान (चालीसवां किया गया । (नवीं अनुसूची) (कार्मिक केन्द्रीय अधिनियम 59) । असम अधिनियम)| 1) । (विदर्भ क्षेत्र) मुंबई अधिनियम 99) । अधिनियम 14) । (1976 का हरियाणा अधिनियम 17) । हरियाणा भूमि-जोत की अधिकतम हिमाचल प्रदेश श 8) । अधिनियम, 1974 (1974 का हिमाचल प्रदेश श 18) । अधिनियम (1974 का कनार्टक अधिनियम 31) । हिमाचल प्रदेश शामित्राती अधिनियम 27) । अधिनियम 12) । कर्नाटक अधिनियम 19) । कर्नाटक भूमि (दूसरा कर्नाटक अधिनियम 20) । केरल अधिनियम 20) । केरल अधिनियम 26) । अधिनियम 29) । भूमि म का प्रत्यावर्तन) अधिनियम, 1975 (1975 का केरल अधिनियम 31) । विमुक्ति) निर्बंधन (नवीं अनुसूची) अधिनियम 15) । अधिनियम 16) । कृषिक प्रदेश श क्रमांक 20 सन ् 1974) । प्रदेश श क्रमांक 2 सन ् 1976) । अधिनियम विनियम, 1961 (1962 का महाराष्ट्र विनियम)| 1) । (सांपत्तिक (1975 का महाराष्ट्र अधिनियम 14) । अधिनियम, 1972 (1975 का महाराष्ट्र अधिनियम 21) । थी)। दे अधिनियम 29) । अधिनियम, 1975 (1975 का महाराष्ट्र अधिनियम 47) । (1976 का महाराष्ट्र अधिनियम 2) । अधिनियम 27) । 1963 (1964 का राजस्थान अधिनियम सं0 11) । (अधिकतम 1976 (1976 का राजस्थान अधिनियम सं0 8) । अधिनियम सं0 12) । (1970 का तमिलनाडु अधिनियम 17) । 1971 (1971 का तमिलनाडु अधिनियम 41) । अभिधृति तमिलनाडु भूमि तमिलनाडु भूमि (नवीं अनुसूची) 1972 (1972 का तमिलनाडु अधिनियम 10) । अधिनियम, 1972 (1972 का तमिलनाडु अधिनियम 20) । तमिलनाडु भूमि अधिनियम, 1972 (1972 का तमिलनाडु अधिनियम 37) । अधिनियम, 1972 (1972 का तमिलनाडु अधिनियम 39) । अधिनियम, 1972 (1974 का तमिलनाडु अधिनियम 7) । अधिनियम, 1972 (1974 का तमिलनाडु अधिनियम 10) । 1974 (1974 का तमिलनाडु अधिनियम 15) । अधिनियम, 1974 (1974 का तमिलनाडु अधिनियम 30) । तमिलनाडु भूमि अधिनियम, 1974 (1974 का तमिलनाडु अधिनियम 32) । 1975 (1975 का तमिलनाडु अधिनियम)| 11) । अधिनियम, 1975 (1975 का तमिलनाडु अधिनियम 21) । तमिलनाडु भूमि दूसरा संख्या 21, 1971) तथा प्रदेश श (संशोधन) अधिनियम, 1974 प्रदेश अधिनियम संख्या 34, 1974) द्वारा 1950 ई0 का प्रदेश श और भूमि-व्यवस्था. अधिनियम प्रदेश श संख्या 1, 1951) में किए गए तमिलनाडु भूमि सुधार (अधिकतम भूमि संशोधन । प्रदेश श संख्या 20, 1976) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 28) । उत्तर प्रदेश भूमि-विधि (उत्तर अधिनियम का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 23) । उत्तर भूमि-विधि (उत्तर उत्तर जमींदारी विनाश (उत्तर अधिनियम उत्तर प्रदेश अधिकतम (उत्तर अधिनियम (दूसरा पश्चिमी (नवीं अनुसूची) पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 23) । पश्चिमी पश्चिमी बंगाल अधिनियम 12) । केन्द्रीय अधिनियम 15) । (1976 का गोवा, दमण और दीव अधिनियम)| 1) । (बेदखल्ली संरक्षण) (1974 का पांडिचेरी अधिनियम 9) । पांडिचेरी भूमि (1971 का असम अधिनियम 23) । क्षेत्र) 1974 (1974 का असम अधिनियम 18) । (संशोधन) संशोधी अधिनियम, 1974 (1975 का बिहार अधिनियम 13) । (संशोधन) अधिनियम, 1976 (1976 का बिहार अधिनियम 22) । बिहार भूमि निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 1978 (1978 का बिहार अधिनियम 7) । बिहार भूमि निर्धारण (1977 का हरियाणा अधिनियम 14) । 1978 (1978 का तमिलनाडु अधिनियम 25) । 1979 (1979 का तमिलनाडु अधिनियम)|. 11) । हरियाणा (भूमि-जोत की अधिकतम 1. संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 2 द्वारा (26-8-1984 से) प्रविष्टि 189 से प्रविष्टि 202 तक अंतःस्थापित । । तमिलनाडु भूमि तमिलनाडु भूमि संविधान (सैंताबीसवां (नवीं अनुसूची) उत्तर जमींदारी विनाश विधि प्रदेश श 15) । 1978 (1978 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 24) । पश्चिमी 1980 (1980 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 56) । दमण और दीव अधिनियम 7) । (1976 का गोवा, दमण और दीव अधिनियम 17) । प्रदेश श 1) । अनुसूचित क्षेत्र भूमि (1963 का आंध्र प्रदेश श 2) । का आंध्रि प्रदेश श 1) । विनियम का आंध्रि प्रदेश श 1) । अनुसूचित क्षेत्र भूमि का आंध्रि प्रदेश श 1) । अनुसूचित क्षेत्र भूमि (अध्याय 8—धारा 46, धारा 47, धारा 48, धारा 48क और धारा 49; अध्याय 10—धारा विनियम)| 71, धारा 71क और धारा 71ख और अध्याय 18—धारा 240, धारा 241, धारा 242) । अनुसूचित क्षेत्र भूमि बिहार अधिनियम 14) धारा 53 को छोड़कर । चत 1969 (1969 का बिहार विनियम) 1) (संशोधन) अधिनियम, 1982 (1982 का बिहार अधिनियम 55) । 8. 0- तक अंतःस्थापित । । बिहार अनुसूचित क्षेत्र विनियम, बिहार भूमि निर्धारण संविधान (छियासठवां (नवीं अनुसूची) देवस्थान अधिनियम 16) । अधिनियम 37) । का राष्ट्रपति अधिनियम 43) । गुजरात अधिनियम 27) । अधिनियम 30) । गुजरात अधिनियम 37) । अधिनियम, 1982 (1982 का गुजरात अधिनियम 8) । हिमाचल प्रदेश श 15) । (1986 का हिमाचल प्रदेश श 16) । प्रतिषेध) अधिनियम, 1978 (1979 का कनार्टक अधिनियम 2) । अधिनियम अधिनियम 13) । हिमाचल प्रदेश भूमि अधिनियम 19) । मध्य प्रदेश श 61) । कर्नाटक प्रदेश श 15) । प्रदेश श 11) । 1976 (1984 का मध्य प्रदेश श 1) । का मध्य प्रदेश श 14) । (तृतीय अधिनियम भू-राजस्व संहिता अधिनियम अकृषिक अधिनियम)। कृषिक अधिनियम)। कृषिक अधिनियम (नवीं अनुसूची) कृषिक का मध्य प्रदेश श 8) । धारा 36, धारा 36क और धारा 36ख । भू-राजस्व संहिता अनुसूचित जनजाति भूमि प्रत्यावर्तन चत म प्रत्यावतर्न (दूसरा (द संशोधन) अधिनियम, 1976 (1977 का महाराष्ट्र अधिनियम 30) । सांपत्तिक अधिकारों का उत्सादन अधिनियम, 1985 (1985 का महाराष्ट्र अधिनियम 16) । विनियम, 1956 (1956 का उड़ीसा विनियम 2) । अधिनियम 29) । उड़ीसा भूमि (दूसरा 30) । अधिनियम 44) । अधिनियम 12) । उड़ीसा भूमि (दूसरा अधिनियम 13) । अधिनियम 21) । अधिनियम, 1979 (1980 का तमिलनाडु अधिनियम 8) । 1980 (1980 का तमिलनाडु अधिनियम 21) । 1981 (1981 का तमिलनाडु अधिनियम 59) । अधिनियम, 1983 (1984 का तमिलनाडु अधिनियम 2) । तमिलनाडु भूमि दूसरा 20) । तमिलनाडु भूमि तमिलनाडु भूमि तमिलनाडु भूमि दूसरा उत्तर प्रदेश भूमि विधि उत्तर अधिनियम (नवीं अनुसूची) बंगाल अधिनियम 18) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम)| 11) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 23) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 36) । बंगाल अधिनियम 44) । बंगाल अधिनियम 41) । पश्चिमी पश्चिमी बंगाल अधिनियम 33) । का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 37) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 23) । कलकत्ता अभिधृति (अर्जन 1984 (1984 का पश्चिमी बंगाल अधिनियम 41) । पश्चिमी अधिनियम)| 1) । कलकत्ता अभिधृति (अर्जन के अधीन संस्थाओं में स्थानों और सेवाओं में या पदों का अधिनियम, 1993 (1994 का तमिलनाडु अधिनियम 45) । पिछड़ा शिक्षा नियुक्तियों आरक्षण) संविधान (छिहत्तरवां (नवीं अनुसूची) 1 बिहार विशेषाधिकार (1948 का बिहार अधिनियम 4) । अधिनियम 22) । बिहार चकबंदी अधिनियम 7) । अधिनियम, 1970 (1970 का बिहार अधिनियम 9) । का बिहार अधिनियम 27) । का बिहार अधिनियम 35) । (संशोधन) अधिनियम, 1987 (1987 का बिहार अधिनियम 21) । अधिनियम, 1989 (1989 का बिहार अधिनियम) 11) । निर्धारण अधिनियम)| 11) । प्रतिषेध) (संशोधन) अधिनियम, 1984 (1984 का कनार्टक अधिनियम 3) । अधिनियम 16) । बिहार भूमि अधिनियम 2) । 9) । कर्नाटक अधिनियम 16) । अधिनियम 2) । अधिनियम 12) । (दूसरा उड़ीसा भूमि 1. (अठहतरवां संशोधन) अधिनियम, 1995 की धारा 2 द्वारा (30-8-1995 से) प्रविष्टि 258 से प्रविष्टि 284 तक अंतःस्थापित । । संविधान भारत का संविधान ऊ (नवीं अनुसूची) अधिनियम, 1983 (1984 का तमिलनाडु अधिनियम 3) । अधिनियम, 1986 (1986 का तमिलनाडु अधिनियम 57) । तमिलनाडु भूमि दूसरा अधिनियम, 1987 (1988 का तमिलनाडु अधिनियम 4) । अधिनियम, 1989 (1989 का तमिलनाडु अधिनियम 30) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 50) । पश्चिमी पश्चिमी बंगाल अधिनियम 5) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 19) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 35) । पश्चिमी (दूसरा पश्चिमी बंगाल अधिनियम 23) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 24) । पश्चिमी बंगाल अधिनियम 12) । राजस्थान अभिधृति अधिनियम, 1955 (1955 का राजस्थान पश्चिमी अधिनियम सं0 3) के अधीन, अनुच्छेद द 31क के खंड (1) के द परंतुक के उल्लंघन में किया गया अर्जन उस उल्लंघन की मात्रा तक शून्य य होगा । पश्चिमी सुधार पश्चिमी 2) स्पष्टीकरण दूसरे दसवीं अनुसूची अनुच्छेद द 102(2) और अनुच्छेद द 191(2) परिवर्तन निरहता दल के आधार पर के बारे में उपबंध (क) “सदन” से, संसद् का कोई सदन या किसी राज्य की, यथास्थिति, विधान सभा या, विधान-मंडल का कोई सदन अभिप्रेत है
  130. (ख) सदन के किसी ऐसे सदस्य के संबंध में जो, पैरा 2 या यथास्थिति, *** पैरा 4 के उपबंधों के अनुसार किसी राजनीतिक दल का सदस्य है, विधान-दल” से, उस सदन के ऐसे सभी सदस्यों का समूह अभिप्रेत है जो उक्त उपबंधों के अनुसार तत्समय उस राजनीतिक दल के सदस्य हैं. (ग) सदन के किसी सदस्य के संबंध में, “मूल राजनीतिक दल” से ऐसा राजनीतिक दल अभिप्रेत है जिसका वह पैरा 2 के उप-पैरा (1) के प्रयोजनों के लिए सदस्य है
  131. (घ) “पैरा” से इस अनुसूची का पैरा अभिप्रेत है । के अधीन रहते हुए, सदन का कोई सदस्य, जो किसी राजनीतिक दल का सदस्य है, सदन का सदस्य होने के लिए उस दशा में होगा (क) उसने ऐसे राजनीतिक दल की अपनी सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी है; या (ख) वह ऐसे राजनीतिक दल दवारा जिसका वह सदस्य है अथवा उसके परिवर्तन निरहता - दूवारा इस प्राधिकत किसी व्यक्ति या प्राधिकारी दवारा दिए गए किसी निदेश श के विरुदूध, ऐसे राजनीतिक दल, व्यक्ति या प्राधिकारी की पूर्व के निरहिंत जिसमें- बिना, ऐसे सदन में मतदान करता है या मतदान करने से विरत रहता है और ऐसे मतदान या मतदान करने से विरत रहने को ऐसे राजनीतिक दल, व्यक्ति या प्राधिकारी ने ऐसे मतदान या मतदान करने से विरत रहने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर माफ नहीं किया है । इस उप-पैरा के प्रयोजनों के लिए, निमित्त (क) सदन के किसी सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि अन॒ज्ञा वह ऐसे राजनीतिक दल का, यदि कोई हो, सदस्य है जिसने उसे ऐसे सदस्य के रूप में के लिए के रूप मैं खड़ा किया था
  132. (ख) सदन के किसी सदस्य के बारे में,--. स्पष्टीकरण -- 1. (बावनवां संशोधन) अधिनियम, 1985 की धारा 6 दूवारा (1-3-1985 से) दसवीं अनुसूची से जोड़ा गया । निर्वाचित किया गया । निर्वाचन अभ्यर्थी प्रतिस्थापित । नामनिर्देशित 345 संविधान संविधान संविधान (दसवीं अनुसूची (i) उस दशा में, जिसमें वह ऐसे सदस्य के रूप में अपने नामनिर्देशन की तारीख को किसी राजनीतिक दल का सदस्य है, यह समझा जाएगा कि वह ऐसे राजनीतिक दल का सदस्य है; (ए) किसी अन्य दशा मैं, यह समझा जाएगा कि वह उस राजनीतिक दल का सदस्य है जिसका, अनच्छेद द 99 या अन॒च्छेद द 188 की यथास्थिति, का अनुपालन करने के पश्चात ् अपना स्थान ग्रहण करने की अपेक्षाओं तारीख से छह मास की समाप्ति के पूर्व वह, सदस्य बनता है यथास्थिति, या पहली बार बनता है ।
  133. (2) सदन का कोई सदस्य, जो किसी राजनीतिक दल द्वारा खड़े किए गए से भिन्न रूप में सदस्य हुआ है, सदन का सदस्य होने के लिए निर्वाचित होगा यदि वह ऐसे के पश्चात ् कसी राजनीतिक दल में हो अभ्यर्थी निर्वाचित जाता है । निरहिल निर्वाचन सम्मिलित (3) सदन का कोई सदस्य, सदन का सदस्य होने के लिए होगा यदि वह, अन॒च्छेद द 99 या अनच्छेद द 188 की का अनपालन करने के पश्चात ् अपना स्थान ग्रहण करने कीं तारीख से छह मास की समाप्ति के नामनिर्देशित निरर्हित पश्चात ् दल में हो जाता है । यथास्थिति, अपेक्षाओं (4) इस पैरा के पव र्गामी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जो, संवेधान, (बावनवां संशोधन) अधिनियम, 1985 के प्रारंभ भ पर, किसी राजनीतिक सम्मिलित सदन का सदस्य है (चाहे वह सदस्य हो या (i) उस दशा में, वह ऐसे प्रारंभ भ से ठीक पहले किसी राजनीतिक पूर्वगामी उपबंधों में किसी दल का सदस्य था वहां, इस पैरा के उप-पैरा (1) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि वह ऐसे राजनीतिक दल दवारा खड़े किए गए के रूप में ऐसे निर्वाचित नामनिर्देशित सदन का सदस्य हुआ है; (ii) अन्य दशा में, इस पैरा के उप-पैरा (2) के प्रयोजनों जिसमें के लिए, यह समझा जाएगा कि वह सदन का ऐसा सदस्य है जो किसी राजनीतिक दल द्वारा खड़े किए गए से भिन्न रूप में सदस्य अभ्यर्थी हआ है या, इस पैरा के उप-पैरा (3) के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि निर्वाचित वैह सदन का सदस्य है । किसी यथास्थिति, * * * * अभ्यर्थी निर्वाचित (1) सदन का कोई सदस्य पैरा 2 के उप-पैरा (1) के अधीन नहीं होगा यदि उसके मूल राजनीतिक दल का किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय हो जाता है और वह यह नामनिर्देशित दावा करता है कि वह और उसके मूल दल के अन्य सदस्य–
  134. (क) ऐसे अन्य राजनीतिक दल के या ऐसे विलय से बने नए परिवर्तन निरहता राजनीतिक दल के सदस्य बन गए हैं; या निरर्हित (ख) उन्होंने विलय स्वीकार नहीं किया है और एक प समूह के रूप में कार्य करने का विनिश्चय किया है, राजनीतिक - यथास्थिति, 1. (इक्यानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 5 द्वारा (1-1-2004 से) पैरा 3 का लोप किया गया । पृथक संविधान (दसवीं अनुसूची और ऐसे विलय के समय से, यथास्थिति, ऐसे अन्य राजनीतिक दल या नए राजनीतिक दल या समूह के बारे में यह समझा जाएगा कि वह, पैरा 2 के उप-पैरा (1) के प्रयोजनों के लिए, ऐसा राजनीतिक दल है जिसका वह सदस्य है और वह इस उप-पैरा के प्रयोजनों के लिए उसका मूल राजनीतिक दल है ।
  135. (2) इस पैरा के उप-पैरा (1) के प्रयोजनों के लिए, सदन के किसी सदस्य के मूल राजनीतिक दल का विलय हुआ तभी समझा जाएगा जब संबंधित विधान-दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसे के लिए सहमत हो गए हैं । - अनुसूची में किसी च बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति, जो लोक अध्यक्ष उपाध्यक्ष सभा के या अथवा राज्य सभा के उपसभापति अथवा किसी राज्य की विधान परिषद् के सभापति या उपसभापति अथवा किसी राज्य की विधान सभा के अध्यक्ष उपाध्यक्ष निर्वाचित निरर्हित या के पद पर हुआ है, इस अनुसूची के अधीन नहीं - होगा,–
  136. (क) यदि वह, ऐसे पद पर अपने निर्वाचन के कारण ऐसे राजनीतिक दल की जिसका वह ऐसे निर्वाचन से ठीक पहले सदस्य था, अपनी सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ देता ता है और उसके पश्चात ् जब तक वह पद धारण किए रहता है तब तक, उस राजनीतिक दल में पुनः सम्मिलित नहीं होता है या किसी दूसरे द राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बनता है; या (ख) यदि वह, ऐसे पद पर अपने के कारण, ऐसे राजनीतिक दल निर्वाचन की जिसका वह ऐसे से ठीक पहले सदस्य था, अपनी सदस्यता छोड़ निर्वाचन देता ता है और ऐसे पद पर न रह जाने के पश्चात ् ऐसे राजनीतिक दल में पुनः हो जाता है । यदि यह प्रश्न उठता है कि सदन का कोई सदस्य इस अनुसूची के अधीन से ग्रस्त परिवर्तन निरहता हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न, ऐसे सदन के, सभापति या के निर्रहता विनिश्चय के लिए जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा: यथास्थिति, अध्यक्ष परंतु तु जहां यह प्रश्न उठता है कि सदन का सभापति या से ग्रस्त निर्देशित किया हो गया है या नहीं वहां वह प्रश्न सदन के ऐसे सदस्य के विनिश्चय के लिए जाएगा जिसे वह सदन इस करे और उसका विनिश्चय अंतिम अध्यक्ष निरहता होगा । निर्देशित (2) इस अनुसूची के अधीन सदन के किसी सदस्य की के बारे में किसी किया निमित्त निर्वाचित प्रश्न के संबंध में इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन सभी के बारे में यह समझा जाएगा कि वे, अनुच्छेद द 122 के अर्थ में संसद् की कार्यवाहियां हैं या अनुच्छेद द 212 के अर्थ में राज्य के विधान-मंडल की कार्यवाहियां हैं । निरहता कार्यवाहियों यथास्थिति, (दसवीं अनुसूची ∗ न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन 7. का वजर्न— इस संविधान मैं किसी बात के होते हुए भी, किसी न्यायालय को इस अनुसूची के अधीन सदन के किसी सदस्य की निरहता संबंधित से किसी विषय के बारे में कौई अधिकारिता नहीं होगी । का सभापति या अध्यक्ष, इस अनसूची के उपबंधों को कार्यान्वित करने के नियम बना सकेगा तथा विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: अथार्त --
  137. (क) सदन के विभिन्‍न सदस्य जिन राजनीतिक दलों के सदस्य हैं, उनके बारे में रजिस्टर या अन्य अभिलेख रखना
  138. (ख) ऐसा प्रतिवेदन जो सदन के किसी सदस्य के संबंध में विधान-दल का नेता, उस सदस्य की बाबत पैरा 2 के उप-पैरा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकृति की माफी के संबंध में देगा, गा, वह समय जिसके भीतर और वह प्राधिकारी जिसको ऐसा प्रतिवेदन दिया जाएगा
  139. (ग) ऐसे प्रतिवेदन जिन्हें कोई राजनीतिक दल सदन के किसी सदस्य को ऐसे राजनीतिक दल में प्रविष्ट करने के संबंध में देगा गा और सदन का ऐसा अधिकारी जिसको ऐसे प्रतिवेदन दिए जाएंगे; और
  140. (घ) पैरा 6 के उप-पैरा में निर्दिष्ट किसी प्रश्न का विनिश्चय करने की प्रक्रिया जिसके अंतर्गत ऐसी जांच की प्रक्रिया है, जो ऐसे प्रश्न का विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए की जाए ।
  141. (2) सदन के सभापति या अध्यक्ष दूवारा इस पैरा के उप-पैरा (1) के अधीन बनाए गए नियम, बनाए जाने के पश्चात ् यथाशीघ्र, सदन के समक्ष, कल तीस दिन की अवधि के लिए रखे जाएंगे । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । वे नियम तीस दिन की उक्त अवधि की समाप्ति पर प्रभावी होंगे जब तक कि उनका सदन दवारा परिवर्तनों सहित या उनके बिना पहले ही अनमोदन या अननमोदन नहीं कर दिया जाता है । यदि वे नियम इस प्रकार अनमोदित कर दिए जाते हैं तो वे, यथास्थिति, ऐसे रूप में जिसमें वे रखे गए थे या ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होंगे । यदि नियम इस प्रकार अननमोदित कर दिए जाते हैं तो वे निष्प्रभाव हो जाएंगे ।
  142. (3) सदन का सभापति या अनच्छेद द 105 या अनच्छेद द 194 अध्यक्ष, यथास्थिति, के उपबंधों पर और किसी ऐसी अन्य शक्ति पर जो उसे इस संविधान के अधीन प्राप्त है, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यह निदेश श दे सकेगा कि इस पैरा के अधीन बनाए गए नियमों के किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर किए गए किसी उल्लंघन के बारे में उसी रीति से कार्रवाई की जाए जिस रीति से सदन के विशेषाधिकार के भंग के बारे में की जाती है । ∗ पैरा 7 को किहोतो होलोहन बनाम जेचिल्हु और अन्य ए.आई.आर. 1993 एस.सी. 412 में बहुमत की राय के अनुसार परंतुक अनुच्छेद द 368 के खंड (2) के परं तक के अनुसार अनुसमर्थन के अभाव में अविधिमान्य घोषित किया गया । 1 0० >4 0 छा दि 0० 3 ले ग्यारहवीं अनुसूची लघ॒ 21. । और औषधालय भी है । का कल्याण भी है । का कल्याण । सड़कें, पूलिया, पल, फेरी, जलमार्ग 28. । अपारंपरिक ऊर्जी गरीबी गया । शिक्षा, जिसके अंतर्गत प्राथमिक तकनीकी प्रशिक्षण शिक्षा ।. 349 प्रौढ़ शिक्षा ।. सांस्कृतिक क्रियाकलाप ।. परिवार महिला अंतर्गत विकलांगों.. व्यक्तियों जनजातियों सार्वजनिक वितरण प्रणाली सामुदायिक आस्पियों अनुरक्षण । संविधान (तिहत्तरवां दुर्बल वर्गों का. और विशिष्टतया, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित बारहवीं अनुसूची (अनुच्छेद (अनच् छे द 243ब) नगरीय । । रक्षा । व्यक्ति भी हैं, हितों की । गंदी-बस्ती सुधार और प्रोन्नयन । की व्यवस्था । शवदाह गह । सांख्यिकी, मृत्यु रजिस्ट्रीकरण है । बस स्टाप और जन सुविधाएं भी हैं । ७० 4 9 छा दी 6० 1. डा. संशोधन) अधिनियम, 1992 की धारा 4 दूवारा (1-6-1993 से) बारहवीं अनुसूची को जोड़ा गया । संविधान (चौहत्तरवां परिशिष्ट 1 (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 संविधान 28 मई, 2015 भारत सरकार और बांग्लादेश श सरकार के बीच किए गए करार और उसके प्रोटोकाल के अनसरण में का भारत दवारा अर्जन किए जाने और कतिपय का बांग्लादेश श को अंतरण किए जाने राज्यक्षेत्रों को प्रभावी करने के लिए भारत के संविधान राज्यक्षेत्रों का और संशोधन करने के लिए अधिनियम भारत गणराज्य के छियासठवें वर्ष में संसद् द्वारा रूप में यह हो:— निम्नलिखित संशोधन) अधिनियम, 2015 है । अधिनियमित (क) “अिजर्त राज्यक्षेत्र” से भारत-बांग्लादेश श करार और उसके प्रोटोकाल मैं समाविष्ट तथा पहली अनसूची में उतने राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं, जिनका संक्षिप्त संक्षिप्त खंड (ग) मैं करार और उसके प्रोटोकाल के अनुसरण में भारत दूवारा बांग्लादेश श से अर्जन किए जाने के प्रयोजन के लिए अभ्यंकन किया गया है
  143. (ख) “नियत दिन” से ऐसी तारीख अभिप्रेत है, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, भारत-बांग्लादेश श करार तथा उसके प्रोटोकाल के अनुसरण में पहली अनुसूची और द अनुसूची में यथानिर्दिष्ट कुछ का, जिनका इस प्रकार अर्जन और अंतरण कराए जाने और उस प्रयोजन के लिए अभ्यंकन “अर्जित कराए जाने के पश्चात ् बांग्लादे श से के अर्जन और बांग्लादेश श को निर्दिष्ट के अंतरण के लिए तारीख नियत करे; निर्दिष्ट (ग) “भारत-बांग्लादेश श करार” से भारत और बांग्लादेश श के बीच भूमि सीमा के अभ्यंकन और संबदूध विषयों के संबंध में भारत गणराज्य की सरकार और बांग्लादेश श गणराज्य की सरकार के बीच तारीख 16 मई, 1974 को हुआ करार, तारीख 26 दिसम्बर, 1974, तारीख 30 दिसम्बर, 1974, तारीखे 7 अक्तूबर, 1982 और तारीख 26 मार्च, 1992 का पत्र विनिमय तथा भारत दूसरी राज्यक्षेत्रों सरकार और बांग्लादेश श सरकार के बीच हुए तारीख 6 सितम्बर, 2011 के उक्त करार का प्रोटोकाल अभिप्रेत है, जिसके सुसंगत उद्धरण तीसरी अनुसूची में दिए बांग्लादेश राज्यक्षेत्रों गए हैं; राज्यक्षेत्रों ∗ तारीख 31 जुलाई, 2015, अधिसूचना सं0 का.आ. 2094(अ) तारीख 31 जुलाई, 2015 द्वारा अधिसूचित । जनवादी 351 (परिशिष्ट) 1)
  144. (घ) “अंतरित राज्यक्षेत्र” से भारत-बांग्लादेश श करार और उसके प्रोटोकाल में दूसरी निर्दिष्ट समाविष्ट तथा द अनुसूची मैं उतने राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं, जिनका निर्दिष्ट खंड (ग) में करार और उसके प्रोटोकाल के अनुसरण में भारत दूवारा बांग्लादेश श को अंतरित किए जाने के प्रयोजन के लिए अभ्यंकन किया गया है । संविधान की पहली नियत दिन से ही,-- राज्यक्षेत्रों (क) असम राज्य के से संबंधित पैरा में, “और वे राज्यक्षेत्र भी इसके अंतर्गत नहीं हैं, जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 अंतर्विष्ट के खंड (क) में किसी बात के होते हुए भी, जहां तक उसका संबंध दूसरी संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की द अनुसूची के भाग में निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों से है, संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की दूसरी अनुसूची निर्दिष्ट हैं” अक्षर, दसू अनस के भाग में शब्द, कोष्ठक, अंक और अंत मैं, जोड़े च जोड़े जाएंगे; राज्यक्षेत्रों निर्दिष्ट किंतु (ख) पश्चिमी बंगाल राज्य के से संबंधित पैरा में, “और वे राज्यक्षेत्र भी, जो पहली अनुसूची के भाग 3 में हैं तु वे राज्यक्षेत्र अंतर्विष्ट इसके अंतर्गत नहीं हैं, जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 के खंड (ग) में किसी बात के होते हुए भी, जहां तक उसका संबंध निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों दूसरी अनुसूची निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली अनुसूची के भाग 3 दूसरी में और दस निर्दिष्ट अक्षर, अनस च राज्यक्षेत्रों के भाग 3 में से है, अनुसूची निर्दिष्ट हैं किन्तु संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की द अनुसूची के भाग 3 दूसरी में हैं” शब्द, अंक, कोष्ठक और अंत में, जोड़े जाएंगे; निर्दिष्ट (ग) मेघालय राज्य के से संबंधित पैरा में, “और वे राज्यक्षेत्र, राज्यक्षेत्रों जो पहली अनस च अंतर्विष्ट के भाग में वे राज्यक्षेत्र इसके अंतर्गत नहीं हैं, जो संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की द अनुसूची निर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों के भाग 2 में हैं” शब्द, अंक और कोष्ठक, अंत में, जोड़े जाएंगे; निर्दिष्ट अक्षर,
  145. (घ) त्रिपुरा राज्य के से संबंधित पैरा में, “और वे राज्यक्षेत्र जो संविधान (नवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की धारा 3 के खंड (घ) में किसी बात के होते हुए भी जहां तक उनका संबंध संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली अनुसूची के भाग 2 में से है, संविधान (एक सौवां संशोधन) अधिनियम, 2015 की पहली अनुसूची के भाग 2 में हैं” शब्द, कोष्ठक, अंक और अंत में, जोड़े जाएंगे । (परिशिष्ट) पहली 1) देखिए अनुसूची १ धारा 2(क), धारा 2(ख) और धारा 3 दे तारीख भाग 1 30)
  146. (7) (ए7)(४)(अर्जित 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 2 और तारीख 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनुच्छेद द ४) v) के संबंध मैं अिजर्त राज्यक्षेत्र । । भाग 2 अर्जित तारीख 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 2 और तारीख 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनुच्छेद द 3(I)
  147. (ग) (i) के संबंध में अिजर्त राज्यक्षेत्र । । 3(0)
  148. (क) (ए0(५(५(४) भाग 3 अर्जित दूसरी अनुसूची तारीख 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 1(12) और अनुच्छेद द 2 तथा तारीख देखिए 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनुच्छेद द 2(II), 3(I)
  149. (क) (iii)(iv)(v)(vi) के संबंध में अिजर्त राज्यक्षेत्र । । तारीख अनुच्छेद दस अनस च धारा 2(ख), धारा 2(घ) और धारा 3 दे भाग 1 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 2 और तारीख 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनच् छे द 3(I)
  150. (घ) (i)(ii) के संबंध में अन्तरित राज्यक्षेत्र । । भाग 2 तारीख 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 2 और तारीख 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनुच्छेद द 3(I)
  151. (ख) (i) के संबंध में अन्तरित राज्यक्षेत्र । । भाग 3 तारीख 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 1(12) और अनुच्छेद द 2 तथा तारीख 6 सितम्बर, 2011 के प्रोटोकाल के अनुच्छेद द 2(II), 3(0(क) (0(४0 के संबंध मैं अन्तरित राज्यक्षेत्र । । (परिशिष्ट) 1) तीसरी अनुसूची धारा 2(ग) देखिए. दे I. भारत गणराज्य की सरकार और बांग्लादेश श गणराज्य की सरकार के बीच जनवादी भारत और बांग्लादेश श के बीच भूमि सीमा के अभ्यंकन तथा संबंधित विषयों के संबंध में तारीख 16 मई, 1974 को हुए करार से उद्धरण अनुच्छेद द 1(12): शी (एन्क्लेव) बांग्लादेश श भारतीय एन्क्लेवों और भारत स्थित बांग्लादेश श विदेशी अंतःक्षेत्र का, पैरा 14 में एन्क्लेवों को छोड़कर, बांग्लादेश में जाने वाले अतिरिक्त के लिए प्रतिकर का दावा किए बिना शीघ्रनतिशीघ्र आदान-प्रदान स्थित एन्क्लेवों किया जाना चाहिए । । उल्लिखित क्षेत्र अनुच्छे द 2: भारत और बांग्लादेश की इस बात के लिए सहमत हैं कि पहले से अभ्यंकित में प्रतिकूल कब्जे वाले राज्यक्षेत्र, जिनके संबंध में सीमा पट्टी अनुच्छेद मानचित्र पहले से तैयार हैं, दवारा सीमा पट्टी मानचित्रों पर किए जाने के छह मास के भीतर आदान-प्रदान किए जाएंगे । वे सुसंगत सरकारें मानचित्रों पर यथासंभवशीघ्र और किसी भी दशा में 31 दिसम्बर, 1974 के क्षेत्रों अपश्चात ् कर सकते हैं । ऐसे अन्य के, बाबत अभ्यंकन पूर्णाधिकारियों पहले ही किया जा चुका है, मानचित्रों के मुद्रण हेतु शीघ्र उपाय किए जाएं । हस्ताक्षर 31 मई, 1975 तक मुद्रित करा लिया जाना चाहिए और तत्पश्चात ् उन पर द्वारा करवा लिए जाने चाहिएं जिससे कि इन में हस्ताक्षर क्षेत्रों जिनकी प्रतिकूलतः धारित कब्जों का आदान-प्रदान 31 दिसम्बर, 1975 तक किया जा इन्हें सके । जिन सेक्टरों का अभी भी अभ्यंकन किया जाना है, उनमें राज्यक्षेत्रीय अधिकारिता का अन्तरण संबंधित सीमा पट्टी मानचित्रों पर द्वारा पूर्णाधिकारियों हस्ताक्षर क्षेत्रों किए जाने के छह मास के भीतर हो सकता है । पा. भारत गणराज्य की सरकार और बांग्लादेश श गणराज्य की सरकार के बीच भारत और बांग्लादेश श के बीच भूमि सीमा के अभ्यंकन तथा संबंधित विषयों पूर्णाधिकारियों के संबंध में तारीख 6 सितम्बर, 2011 को हुए करार के प्रोटोकाल से उद्धरण हस्ताक्षर अनुच्छेद द 2: (II) 1974 के करार के अनुच्छेद, द 1, खंड 12 को निम्नानुसार जनवादी किया जाएगा:— कार्यान्वित (परिशिष्ट) 1) एन्क्लेव संयक्त रूप से सत्यापित और डी.जी.एल.आर.एंड एस., बांग्लादेश श तथा डी.एल.आर.एंड एस., पश्चिमी बंगाल (भारत) के स्तर पर अप्रैल, 1997 में हस्ताक्षर किए गए भू-कर एन्क्लेव मानचित्रों के अनुसार बांग्लादेश में के 111 भारतीय एन्क्लेव और भारत में के 51 बांग्लादेश श एन्क्लेव का बांग्लादेश में जाने वाले अतिरिक्त क्षेत्रों के लिए प्रतिकर का दावा किए बिना आदान-प्रदान किया जाएगा । अनुच्छेद अनुच्छे द 3: (I) 1974 के करार के अनुच्छेद द 2 को निम्नानुसार कार्यान्वित किया जाएगा: भारत सरकार और बांग्लादेश श सरकार के बीच यह करार हआ है कि प्रतिकूल कब्जे मैं धारित राज्यक्षेत्रों के लिए, जैसा कि संयुक्त सर्वेक्षण ण के माध्यम से अवधारित किया गया था और अपने-अपने प्रतिकूल कूल कब्जा भू- क्षेत्र सूचक मानचित्र (एपीएल मानचित्र) मैं, जिसे दिसम्बर, 2010 और अगस्त, 2011 के बीच दोनों देशों के भू-अभिलेख और सर्वेक्षण विभागों ण दूवारा अंतिम द्वारा रूप दिया गया है, पूर्णतया चित्रित किया गया था, जिनका पूर्णतया वर्णन नीचे खंड (क) से खंड (घ) मैं किया गया है, एक नियत सीमा के रूप में सीमा रेखा खा खींची जाएगी । सुसंगत सीमा पट्टी से मानचित्रों को मुद्रित किया जाएगा और उन पर पूर्णीधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर किए. जाएंगे और राज्यक्षेत्रीय अधिकारिता का अन्तरण एन्क्लेवों के आदान-प्रदान के साथ-साथ पूर्ण किया जाएगा । ऊपर वर्णित सूचक मानचित्रों में यथा चित्रित सीमा का अभ्यंकन निम्नानुसार होगा:
  152. (क) पश्चिमी बंगाल सेक्टर बौसमारी-मधुगरी (i) (कुश्तिया-नाडिया) क्षेत्र विद्यमान सीमा स्तंभ सं०0 154/5-एस से 157/1- एस से होते हए मथबंगा नदी के पुराने बहाव मार्ग के मध्य तक, जैसा कि 1962 के चकबंदी मानचित्र में चित्रित है एक सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जून, 2011 में संयुक्त रूप से सर्वेक्षण किया ण गया था और सहमति हुई थी । (ii) अंधारकोटा (कुश्तिया-नाडिया) क्षेत्र विद्यमान सीमा स्तंभ सं०0 152/5-एस से सीमा स्तंभ सं0 153/1-एस से होते हुए विद्यमान मथबंगा नदी के किनारे तक एक सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जून, 2011 में संयक्त रूप से सर्वेक्षण किया ण गया था और सहमति हुई थी । (परिशिष्ट) 1) पकुरिया (कुश्तिया-नाडिया) (iii) क्षेत्र सीमा स्तंभ सं० 151/1-एस से सीमा विद्यमान स्तंभ सं० 152/2-एस से होते हुए मथबंगा नदी के किनारे तक एक सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जून, 2011 में संयुक्त रूप से ण गया था और सहमति हुई थी (४ सर्वेक्षण किया (iv) चार डी सीमा स्तंभ सं० 153/1-एस से सीमा स्तंभ सं० 153/9-एस से होते हुए मथबंगा नदी के किनारे महिष्कुंडी (कुश्तिया-नाडिया) क्षेत्र तक एक सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जून, 2011 में संयुक्त रूप से ण गया था और सहमति हुई विद्यमान थी (४) (v) पुर (नौगांव-मालदा) विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 242/एस/13 से सीमा सर्वेक्षण किया स्तंभ सं० 243/7-एस/5 को जोड़ने वाली रेखा खा के रूप में सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जून, 2011 में संयुक्त रूप से ण गया था और सहमति हुई थी । हरिपाल/खतादाह/बटोली/सपामेरी/एलएन पर (पटारी) (४) बेरुबाडी (पंचगढ़-जलपाईगड़ी) क्षेत्र बांग्लादेशी शी द्वारा प्रतिकूलतः धारित बेरुबाडी (पंचगढ़-जलपाईगुड़ी) और भारत द्वारा प्रतिकूलतः धारित बेरुबाडी और सिंघपारा-खुडीपारा (पंचगढ़-जलपाईगड़ी) में सीमा रेखा खा 1996-1998 के दौरान संयुक्त रूप से किए गए अभ्यंकन के अनसार खींची जाएगी । सर्वेक्षण किया (ख) मेघालय सेक्टर (i) लोबाचेरा-नूनचेरा क्षेत्र सीमा स्तंभ सं० 1315/4-एस से सीमा स्तंभ सं० 1315/15-एस तक क्षेत्र लईलांग-नूनचेरा में सीमा स्तंभ सं०0 1316/1-एस से सीमा स्तंभ सं०0 1316/11-एस तक लईलांग-लहिलिंग में सीमा स्तंभ सं० 1317 से सीमा स्तंभ सं० 1317/13-एस तक और लईलांग-लुभाचेरा में सीमा स्तंभ सं० 1318/1-एस से सीमा स्तंभ सं० 1318/2-एस से होते हए चाय बागानों के किनारे तक सीमा रेखा खींची जाएगी, जैसा 2010 में संयुक्त रूप से ण गया था और सहमति हुई थी । लोबाचेरा-नूनचेरा लईलांग-बलिचेरा. में विद्यमान कि दिसम्बर, सर्वेक्षण किया (परिशिष्ट) 1) पिरडीवाह/पड़आ क्षेत्र (ii) विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 1270/1-एस से सीमा स्तंभ सं० 27/-टी तक, संयुक्त रूप से किए गए सर्वेक्षण अनुसार ण और परस्पर सहमति अनस सीमा रेखा खा खींची पक्षकारों जाएगी । के बीच सहमति हुई है कि पिरडीवाह गांव से भारतीय राष्ट्रिकों को उस मानचित्र के, जिस पर सहमति हुई है, बिन्दु सं० सं0 6 के निकट पियांग नदी से पानी लेने की अनुमति दी जाएगी (फ) लिंगखाट (iii) क्षेत्र (कक) लिंगखाट- / कुलुमचेरा और लिंगखाट- II/कुलुमचेरा विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 1264/4-एस से सीमा स्तंभ सं०0 1265 और सीमा स्तंभ सं० 1265/6-एस से सीमा स्तंभ सं०0 1265/9-एस तक उस रेखा खा के अनुसार सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि संयुक्त रूप से ण गया था और परस्पर सहमति हुई थी । सर्वेक्षण किया (कख) लिंगखाट-एा/सोनारहाट विद्यमान सीमा स्तंभ सं0 1266/13-एस से दिशा के नाले के साथ-साथ वहां तक सीमा रेखा खा जहां तक वह पूवर्-पिश्चम दिशा में द नाले से मिलती है, खींची जाएगी उसके पश्चात ् यह पूवर् दिशा में नाले के किनारे से होते हए वहां तक दक्षिण चलेगी, जहां तक वह संदर्भ स्तंभ सं० १267/4-आर पूर्व-पश्चिम दूसरे बी. और 1267/3-आर. आई के में विद्यमान पर्व अन्तरराष्ट्रीय सीमा से मिलती है (४) उत्तरी (iv) सीमा स्तंभ सं० 1275/1-एस से सीमा उत्तर स्तंभ सं० 1275/7-एस को जोड़ने एक सीधी रेखा खा से सीमा रेखा खा खींची जाएगी । इस में “शून्य दावकी/तमाबिल क्षेत्र रेखा” खा” पर बाड़ लगाने पर सहमत हैं । विद्यमान वाल्ली पक्षकार क्षेत्र (परिशिष्ट) (४) नलजूरी/श्रीपुर क्षेत्र (v) दक्षिण दिशा में विद्यमान (कक) नलजूरी- दर्शित भू-खंडों सीमा रेखा खा सीमा स्तंभ सं० 1277/2-एस से पट्टी मानचित्र सं० 166 में यथा तीन भ-ू तक वहां तक की एक दक्षिण ऐसी रेखा खा होगी जहां तक वह सीमा स्तंभ सं० 277/5-टी से बहने वाले नाले से मिलती है पूर्व तत्पश्चात ् वह दिशा में नाले के पश्चिमी किनारे के साथ-साथ बांग्लादेश की ओर के दो भ-ू दक्षिण खंडों तक चलेगी, तत्पश्चात ् वह पवू की ओर वहां तक चलेगी जहां तक सीमा स्तंभ सं० 1277/4-एस से दिशा में खींची गई रेखा खा से मिलती है । (कख) नलजूरी-ा विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 1278/2-एस से सीमा स्तंभ सं० 1279/3-एस तक सीमा रेखा खा एक क्षेत्र सीधी रेखा खा के रूप में खींची जाएगी (५) पक्षकार राष्थट्रिकों (vi) मुक्तापुर / डिबिर हावोर अनुमति मुक्तापुर मुक्तापुर क्षेत्र इस बात से सहमत हैं कि भारतीय स्थित को काली मंदिर जाने की अनम दी जाएगी और उन्हें अनुज्ञा मक् की तापर ओर के तट से म तापरु / डिबिर हावोर त्रिपुरा/मौलवी में क्षेत्र जलाशय से पानी लेने और मछली पकड़ने के अधिकारों का प्रयोग करने की भी दी जाएगी ।
  153. (ग) त्रिपुरा सेक्टर सर्वेक्षण किया (i) बाजार सेक्टर में चन्दन नगर-चंपाराई चाय बागान विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 1904 से सीमा स्तंभ सं० 1905 तक सोनार चेरी नदी के साथ सीमा रेखा खा खींची जाएगी, जैसा कि जुलाई, 2011 में संयुक्त रूप से ण गया था और सहमति हुई थी । (परिशिष्ट) 1)
  154. (घ) असम सेक्टर (i) असम सेक्टर में कालाबाड़ी (बोरोईबारी) क्षेत्र विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 4066/24-टी से सीमा स्तंभ सं० 067/46-टी तक सीमा रेखा खींची जाएगी, जैसा कि अगस्त, 2011 में संयुक्त रूप से ण गया सर्वेक्षण किया था और सहमति हुई थी । (ii) असम सेक्टर में पल्‍्लाथाल क्षेत्र विद्यमान सीमा स्तंभ सं० 1370/3-एस से सीमा स्तंभ सं० 1371/6-एस से होते हुए चाय बागान के बाहरी किनारे से होते हुए पान बागान के बाहरी किनारे के साथ-साथ सीमा स्तंभ सं० 1372 से 1373/2-एस तक क्षेत्र सीमा रेखा खा खींची जाएगी । III. 16 मई, 1974 के करार के अनुच्छेद द 1(12) और तारीख 6 सितम्बर, 2011 के करार के प्रोटोकाल के अनुसरण में भारत और बांग्लादेश श के बीच एन्क्लेवों के आदान-प्रदान की सूची पा. तारीख अ. बांग्लादेश में के आदान-प्रदान योग्य भारतीय एन्क्लेव, सहित क्र्म छिटों का नाम छिट सं0 बांग्लादेश श के पश्चिमी सं0 पुलिस बंगाल के एकड़ मैं स्टेशन... शन के पुलिस भीतर स्थित. स्टेशन शन के क्षेत्रफल भीतर स्थित क्षेत्रफल 1 2 3 4 5 6 क. स्वतंत्र छिटों वाले एन्क्लेव हल्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 हल्दीबाड़ी सितलदहा देबीगंज हल्‍्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 हल्दीबाड़ी सितलदहा 40 बरा कुचलीबारी थाना पटग्राम मेकलीगंज 4.35 मेकलीगंज के जे0एल0० 107 का अपखंड बेलापुखारी कुचलीबारी कुचलीबारी मेकलीगंज के जे0एएल0० 107 का अपखंड (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 खासबाश व. बांसकाटा 119 पटग्राम मथबंगा 413.81 (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 भीतरकुथी दकिनिरकुथी पा भुंगामारी दिनहाटा दिघालतरी भुंगामारी दिनहाटा पा भुंगामारी दिनहाटा (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 जेण्एल० के छोर दक्षिणी और जे०एल0 सं० 39 के दक्षिणी छोर पर बिना नाम और जे0एएल0० सं० का ग छिटः* ∗ (स्थानीय रूप से अशोकाबाड़ी* ** के ज्ञात) हल्‍्दीबाड़ी हल्दीबाड़ी देबीगंज रूप में हल्‍्दीबाड़ी देबीगंज ख. अपखंड छिट वाले एन्क्लेव हल्दीबाड़ी देबीगंज 109 (i) बेवलाडांगा 34 बोडा 862.46 (पं) हल्‍्दीबाड़ी देबीगंज (ऐ) बेवल्लाडांगा अपखंड दे बीगंज (४) हल्दीबाड़ी देबीगंज.... (ii) कोतभाजनी अपखंड दे बीगंज हल्दीबाड़ी देबीगंज (iii) कोतभाजनी अपखंड दे बीगंज (फ) हल्‍्दीबाड़ी देबीगंज (iv) कोतभाजनी अपखंड दे बीगंज (४) हल्दीबाड़ी देबीगंज (ii) दहाला अपखंड दे बीगंज कर (iii) दहाला अपखंड दे बीगंज (iv) दहाला अपखंड दे बीगंज सीमा सम्मेलन दूवारा संशोधित । * सितम्बर, कूच बिहार (भारत) में आयोजित बावनवें (छप्पनवें) 29 सितम्बर, 2002 से 2 अक्तूबर, 2002 तक कोलकाता एक सौ भारत-बांग्लादेश श ∗ सितम्बर, अक्तूबर, कोलकाता में आयोजित पचासवें (चौवनवें) सीमा सम्मेलन दूवारा संशोधित । । ** 18 2003 से 20 2003 तक कूच (भारत) एक सौ भारत-बांग्लादेश श सीमा सम्मेलन द्वारा । (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 (४) 6 हल्दीबाड़ी देबीगंज (v) दहाला अपखंड दे (५) बीगंज हल्दीबाड़ी देबीगंज (vi) दहाला अपखंड दे बीगंज 17160.63 एन्क्लेवों के उपरोक्त ब्यौरों का 9 अक्तूबर, र, 1996 से 12 अक्तूबर, र, 1996 के कलकत्ता दौरान में आयोजित भारत-बांग्लादेश श सम्मेलन के दौरान और साथ ही 21 नवम्बर, 1996 से 24 नवम्बर, 1996 के दौरान जलपाईगुड़ी (पश्चिमी बंगाल)-पांचागढ़ क्षेत्र निरीक्षण (बांग्लादेश) श) सेक्टर में संयुक्त के दौरान भी भारत और बांग्लादेश श द्वारा धारित अभिलेखों से संयुक्त त रूप से मिलान किया गया है और उन्हें समाधानप्रद बनाया गया है । टिप्पण: क्षेत्र भूमि उपर्युक्त सीमन काल 1996-97 के दौरान संयुक्त त म सत्यापन द्वारा उपयुर्क्त क्रम सं0 108 के एन्क्लेव के नाम की अशोकाबाड़ी एन्क्लेव के रूप मैं पहचान की गई । बिग्रेडियर जे0आर0 पीटर मो0 शफी उद्दीन निदेशक, भू-अभिलेख सर्वेक्षण महानिदेशक, भू-अभिलेख शक, और ण शक, और पश्चिमी सर्वेक्षण, बांग्लादेश (पदेन), न), पिश्चमी बंगाल, भारत ण, बांग्लादे श और निदेशक, पूर्वी शक, क्षेत्र भारतीय सर्वेक्षण, कलकत्ता ण, आ. भारत में के आदान-प्रदान योग्य बांग्लादेश श एन्क्लेव, क्षेत्रफल सहित क्र्म छिटों का नाम पश्चिमी बंगाल के बांग्लादेश श के जे0एल0 क्षेत्रफल सं0 पुलिस स्टेशन लस स्टे शन के पुलिस स्टेशन. लस स्टे शन सं0 एकड़ मैं भीतर स्थित के भीतर स्थित 1 2 3 4 5 6 क. स्वतंत्र छिटों वाले एन्क्लेव भूमि छिट भूमि (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 छिट भूमि छिट भूमि छिट भूमि म छिट भूमि छिट भूमि म छिट भूमि छिट भूमि छिट भूमि (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 गितालदाहा मसालडांगा मसालडांगा ख. अपखंड छिट वाले एन्क्लेव (ए) नलग्राम सितलकुची पटग्राम 65 (अपखंड) (पर) नलग्राम सितलकुची पटग्राम 65 (अपखंड) (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 ग ठु (ए) छिट नलग्राम सितलकुची पटग्राम 66 (अपखंड) बतरीगाछ दिनहाटा काल्गींज बतरीगाछ दिनहाटा काल्गींज (पर) बतरीगाछ दिनहाटा फुलबारी (ii) 81 (अपखंड) (iii) 9 (अपखंड) सिबप्रसाद सिबप्रसाद दिनहाटा फुलबारी दक्षिण (प) कराला (अपखंड) दिनहाटा फुलबारी 9 दक्षिण (पं) कराता (अपखंड) दिनहाटा फुलबारी 8 दक्षिण (ii) 6 (४) दक्षिण दिनहाटा भुंगामारी मस् तती (अपखंड) (मा) दक्षिण दिनहाटा भुंगामारी (ii) दिनहाटा भुंगामारी 6 मसालडांगा (अपखंड) (iii) दिनहाटा भुंगामारी 6 मसालडांगा (अपखंड) (iv) 6 मसालडांगा (अपखंड) (v) 6 मसालडांगा (अपखंड) (vi) भंग मसालडांगा (अपखंड) (परिशिष्ट) 1) 1 2 3 4 5 6 पश्चिम दिनहाटा भुंगामारी मसालडांगा (ii) पश्चिम दिनहाटा भुंगामारी 4 मसालडांगा (अपखंड) मसालडांगा (ii) पूरबा छिट दिनहाटा भुंगामारी 10 मसालडांगा (अपखंड) पूरबा भुंगामारी 11 153.89 (ii) पूरबा मसालडांगा दिनहाटा भुंगामारी 11 (अपखंड) (ii) उत्तर धालडांगा तूफानगंज तफू भुंगामारी भंगु 14 (अपखंड) (iii) उत्तर धालडांगा तूफानगंज भुंगामारी 14 (अपखंड) _ कुल कुलक्षेत्र....................... 7,110.02 एन्क्लेवों के उपरोक्त ब्यौरों का 9 अक्तूबर, र, 1996 से 12 अक्तूबर, र, 1996 के कलकत्ता दौरान में आयोजित भारत-बांग्लादेश श सम्मेलन के दौरान और साथ ही 21 नवम्बर, 1996 से 24 नवम्बर, 1996 के दौरान जलपाईगुड़ी (पश्चिमी बंगाल)-पांचागढ़ क्षेत्र निरीक्षण (बांग्लादेश) श) सेक्टर में संयुक्त के दौरान भी भारत और बांग्लादेश श द्वारा धारित अभिलेखों से संयुक्त रूप से मिलान किया गया है और उन्हें समाधानप्रद बनाया गया है । बिग्रेडियर जे0आर0 पीटर मो0 निदेशक, भू-अभिलेख शक, और सर्वेक्षण ण शक, और (पदेन) पश्चिमी (पदे न) पिश्चमी बंगाल, भारत ण, बांग्लादे श । और निदेशक, पूर्वी शक, क्षेत्र भारतीय सर्वेक्षण, कलकत्ता । ण, । मो0 शफी उद्दीन महानिदेशक, भू-अभिलेख और सर्वेक्षण, बांग्लादेश । परिशिष्ट 2 संविधान 1 0 (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, श, 2019 सं०्ञा० सं0आ0 272 प्रदत्त शक्तियों संविधान के अनुच्छेद द 370 के खंड (1) द्वारा का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित राष्ट्रपति, जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार की सहमति से आदेश श करते हैं,--. (2) यह तरन्त प्रव होगा और इसके बाद यह समय-समय पर यथा संशोधित संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, श, 1954 का अधिक्रमण करे गा । के संबंध मैं लागू होंगे और जिन अपवादों और आशोधनों के अधीन ये लागू होंगे निम्न प्रकार होंगे:-- अनुच्छेद द 367 में खंड जोड़ा जाएगा, अथार्त ्:— निम्नलिखित अर्थात्:-- “(4) संविधान, जहां तक यह जम्मू-कश्मीर के संबंध में लागू हैं, के प्रयोजनों के लिए--
  155. (क) इस संविधान या इसके उपबंधों के को, उक्त राज्य के निर्देशों संबंध में यथा लागू संविधान और उसके उपबंधों का श माना जाएगा; निर्देश (ख) जिस व्यक्ति को राज्य की विधान सभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा जम्मू-कश्मीर के सदर-ए-रियासत, जो तत्स्थानिक रूप से पदासीन राज्य की मंत्री-परिषद् की सलाह पर कार्य कर रहे हैं, के रूप मैं तत्स्थानिक रूप से मान्यता दी गई है, उनके लिए को जम्मू- निर्देशों कश्मीर के राजपाल के लिए श माना जाएगा; निर्देश (ग) उक्त राज्य की सरकार के को, उनकी मंत्रि-परिषद् की निर्देशों सलाह पर कार्य कर रहे जम्मू-कश्मीर के राजपाल के लिए को निर्देशों शामिल करता हुआ माना जाएगा; तथा (घ) इस संविधान के अनुच्छेद द 370 के परन्तुक में “खंड (2) राज्य की संविधान सभा” अभिव्यक्ति को “राज्य की विधान सभा” पढ़ा जाएगा ।”।” उल्लिखित साए्काणनि० भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खंड 3 उपखंड (i) । परिशिष्ट 3 संविधान 1 0 के अनुच्छेद द 370(3) के अधीन घोषणा सं०्ञा० सं0आ0 273 अनच्छेद प्रदत्त शक्तियों राष्ट्रपति, संसद् की सिफारिश पर भारत के संविधान के अनच् छे द 370 के खंड (1) के साथ पठित अनच्छेद द 370 के खंड (3) दूवारा का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित रहेंगे, अर्थात्:-- यह घोषणा करते हैं कि 6 अगस्त, 2019 से उक्त अनच्छेद द 370 के सभी खंड, सिवाय के, जो नीचे दिए गए के अनसार है, प्रचालन में नहीं गे, अथार्त ्:— “370. इस संविधान के समय-समय पर यथा संशोधित, सभी उपबंध बिना अनच्छेद जम्मू-कश्मीर किन्हीं उपांतरणों या अपवादों के अनच्छेद द 152 या अनच्छेद द 308 या इस आदेश, उपविधि, नियम; संविधान के किसी अन्य अनच् छे द या जम्म-ू कश्मीर के संविधान में किसी अन्य विनियम, अधिसूचना वाल्ली उपबंध या किसी विधि, दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश, श, आदे श, रूढ़ि या भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने किसी परिकल्पित या प्रथा या किसी अन्य लिखत, संधि या करार जो अन॒च्छेद द 363 के अधीन यथा या अन्यथा है, में तत्प्रतिकूल किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, जम्मू-कश्मीर राज्य को लागू होंगे ।”। साएकाएनि0 में प्रकाशित । भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, खंड 3 उपखंड (i) ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद पुराने ढांचे को रद्द करता है। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, 1935, अपने संशोधक अधिनियमों सहित, निरसित हैं। नए संविधान ने पुरानी कानून पुस्तक की जगह ली। आखिरी अनुच्छेद पुराना कानून बंद करता और नया खोलता है।

Article 395 in English