भाग 19 · प्रकीर्ण
अनुच्छेद 364 और विमानक्षेत्रों के बारे में विशेष उपबंध— (1) इस संविधान में
- किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति लोक अधिसूचना दूवारा निदेश श दे सकेगा कि ऐसी तारीख से, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए,—
- (क) संसद् या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई कोई विधि किसी या को लागू नहीं होगी अथवा ऐसे अपवादों या महापत्तन विमानक्षेत्र उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होगी जो उस में ना अधिसूचना विनिर्दिष्ट किए जाएं; या (ख) कोई विद्यमान विधि किसी या में उन बातों के सिवाय प्रभावी नहीं रहेगी उक्त तारीख से पहले किया गया है या करने का महापत्तन विमानक्षेत्र लोप किया गया है अथवा ऐसे या को लागू होने में ऐसे अपवादों जिन्हें या उपांतरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी जो उस अधिसूचना मैं पत्तन विमानक्षेत्र किए जाएं । विनिर्दिष्ट (2) इस अनुच्छेद में--
- (क) से ऐसा अभिप्रित है जिसे संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि या किसी विद्यमान विधि द्वारा या उसके अधीन घोषित किया गया है और इसके अंतर्गत ऐसे सभी हैं जो उस समय ऐसे की “महापत्तन” पत्तन सीमाओं के भीतर हैं; महापत्तन (ख) से वायु वायुयानों और विमान चालन से संबंधित क्षेत्र पत्तन के प्रयोजनों के लिए यथा परिभाषित अभिप्रेत है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद बड़े बंदरगाहों और हवाई अड्डों को संघ के नियंत्रण में लाता है। राष्ट्रपति अधिसूचना से बड़े बंदरगाहों और हवाई अड्डों की संपत्ति और सेवाएं संघ को सौंप सकते हैं। अनुसरणी कानून संसद बनाती है। बड़े परिवहन द्वार संघ के पास रहते हैं।