भाग 19 · प्रकीर्ण

अनुच्छेद 367 (1) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा न हो, डर उपांतरणों 3 अनच्छेद

  1. सबिधान, के निर्वचन के साधारण खंड अधिनियम, 1897, ऐसे अनुकूलनों और डनिलियने कै विधान-मंडल किसी अधिनियम निर्वचन के अधीन रहते हुए, जो अनुच्छे द 372 के अधीन उसमें किए जाएं, वैसे ही लिए लागू होगा जैसे वह भारत के के के के लागू होता है छिप । संविधान अधिनियमों विधियों (2) मैं संसद् के या उसके द्वारा बनाए गए या टिदेश भथता मह* किसी के प्रति सी श का अथवा 82*** राज्य के विधान-मंडल के या उसके द्वारा अधिनियमों विधियों निर्देश बनाए गए या के प्रति किसी श का यह अर्थ लगाया जाएगा कि यथास्थिति, निर्मित उसके अंतर्गत, राष्ट्रपति दवारा अध्यादेश श या किसी राज्यपाल 83*** निर्मित निर्देश दूवारा अध्यादेश श के प्रति श है । अप इस संविधान के प्रयोजनों के ल्रिए, “विदेशी शी राज्य” से भारत से भिन्न कोई राज्य है: परंतु तु संसद् दवारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अधीन ते तप आदे श4 8 द्वारा यह घोषणा कर सकेगा कि कोई राज्य उन प्रयोजनों ह जो उस आदेश में जाएं, शी राज्य नहीं हैं । राष्ट्रपति अदिश देवारा 15 विनिर्दिष्ट किए विदेशी शू(थ) न न न भ. * * संविधान स्थान पर प्रतिस्थापित । । क और भाग ख” (1-11-1956 से) का लोप किया गया । संविधान शब्दों का लोप किया गया । संविधान पाठ के लिए परिशिष्ट 2 दे । भाग 20 संविधान का संशोधन

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद पठन नियम देता है। सामान्य उपबंध अधिनियम, 1897 अनुकूलनों के साथ संविधान पर लागू होता है। भारत शासन अधिनियम के उल्लेख अनुकूलनों और आदेशों के साथ पढ़े जाएं। पुराने अधिनियम के शब्द अपना पुराना अर्थ रखते हैं। पुराने संवैधानिक कानून से पुल यहीं खिंचता है।

Article 367 in English