भाग 2 · नागरिकता
अनुच्छेद 7 को प्रब्रजन करने वाले कुछ के नागरिकता के अधिकार
- अनच् छे द 5 और अनच् छे द 6 में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति जिसने 1 माचर्, 1947 के पश्चात ् भारत के राज्यक्षेत्र से ऐसे राज्यक्षेत्र को, जो इस समय पाकिस्तान के अंतर्गत है, प्र्रजन किया है, भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा: यदि पाकिस्तान व्यक्तियों अनुच्छेद अनुच्छेद मार्च, परंतु तु इस अनुच्छेद की कोई बात ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो ऐसे राज्यक्षेत्र को, जो इस समय पाकिस्तान के अंतर्गत है, प्र्रजन करने के पश्चात ् भारत के राज्यक्षेत्र को ऐसी अनुज्ञा पुनर्वास के अधीन लौट आया है जो पुनवार्स के लिए या स्थायी रूप से लौटने के लिए किसी विधि के प्राधिकार दवारा या उसके अधीन दी गई है और प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के बारे में अनुच्छेद अनच् छे द 6 के खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि उसने भारत के राज्यक्षेत्र को 19 जुलाई, 1948 के पश्चात ् प्रव्रजन किया है । व्यक्तियों
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद उलटी चाल को लेता था। 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान जाकर बसने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहता था। एक अपवाद था। पुनर्वास के परमिट से लौटने वाला पंजीकरण के बाद नागरिक बन सकता था। इस अनुच्छेद ने स्थायी रूप से देश छोड़ने पर नागरिकता को बचने से रोका।