भाग 8 · संघ राज्यक्षेत्र

अनुच्छेद 239कक दिल्‍ली के संबंध में विशेष उपबंध— (1) संशोधन) अधिनियम, राष्ट्रीय

  1. 1 राज्यक्षेत्र (जिसे राष्ट्रीय है) 1991 के प्रारंभ भ से दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र को दिल्ली एक विधान सभा राजधानी निर्वाचन (िजसे इस भाग में इसके पश्चात ् राजधानी राज्यक्षेत्र 1991 के हैप्रारं अनुसूचित जातियों लिए आरक्षित कहा गया) कहा भ से स्थानों की प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों मैं विभाजन त्र (जिसके अंतर्गत विधान के कार्यकरण संबंधित जाएगा और अनुच्छेद द 239 के अधीन नियुक्त उसके प्रशासक का पदाकिधान उप- (िजसे इस भाग इसके पश्चात द्वारा किया जाएगा । राज्यपाल होगा । जाएगा और अनुच्छे द 239 के अधीन थृ(खक) दिल्‍ली राष्ट्रीय (2)
  2. (क) राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के लिए एकराज्यपाल होगा होगी आरक्षित सभा । और ऐसी विधान सभा में स्थान राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र में प्रादे अनुसूचित जातियों (2)
  3. (क) से राजधानी आरक्षित लिए आरक्षित किए द्वारा चुने हुए सदस्यों से भरे जाएंगे । सभा स्थान राजधानी राज् विधान प्रत्यक्ष निर्वाचन (ख) विधान सभ्षा में स्थानों की कुल संख्या, दवारा एक-तिहाई स्थान के द्वारा कच (जिसके अंतर्गत अनसूचित जातियों महिलाओं आरक्षित स्थानों की सम्मिलित अवधारित महिलाओं से भरे जा आरक्षित (ख) सभा कुल संख्या, राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के प्रादे अनच्छेद राष्ट्रीय (िजसके अंतगर्त ऐसे विभाजन का आधार है) तथा और सदस्यों के सभा सभा उसके संख्कया, सदस्यों अनुच्छेद 329 “समुचित रण से राजधानी राज्य विधान-मंडल” निर्देश कि संसद प्रति निर्देश सभी अन्य विषयों का विनियमन, संसद् दवारा बनाई गई विधि (िजसकेद्वारा अंतगर्त संविधान का आधार ह संविधान अंतःस्थापित । (खक) राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में महिलाओं के लिए संसद् द्व सभी अन्य का स्थान किए जाएंगे । (खक) राजधानी रा स्थान (खख) दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा में गे । के लिए स्थानों के यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई स्थान महिलाओं के राज् (खख) जाएंगे । के के यथाशक्य (खग) दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की सभा में । द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कल संख्या के यथाशक्य निकटतम (खग) स्थानराजधानी रा (िजसके अंतगर्त अनस चत से संबंधित के लिए भरे जाने कुल संख् संख्या भी है), ऐसी रीति मैं, जो संसद् विधि द्वारा (िजसके अं तगर् करे से संब के लिए किए जाएंगे । संख्या भी है), ऐसी ज (ग) अनच्छेद द 324 से अनच्छेद द 327 और अनक द 329 के उपबंध जाएं गे । राजधानी राज्यक्षेत्र, राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधान सभा औरअनु उसके 324 से क अनुच्छे द राजधानी संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे, किसी राज्य, किसी राज्य की विधान और राजधानी राज्य के संबंध मैं लागू होते हैं तथा अनुच्छेद द 326 और संबंध में 329लाग चतसे वे, र के प्रति श के बारे में यह समझा जाएगा वह के संसंसबंद्ध होते श तथा अ है । के श के बारे यह है । (1-2-1992 से) अंतःस्थापित । । 1. (उनहतरवां संशोधन) 1991 (1-2-1992 16-4-2026 से) अं त से) । 114 74 (3)
  4. (क) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हए, विधान सभा को राज्य सूची की प्रविष्टि, प्रविष्टि 1, 2 और प्रविष्टि 18 से तथा उस सूची की प्रविष्टि 64, प्रविष्टि 65 और प्रविष्टि 66 से, जहां तक उनका संबंध उक्त प्रविष्टि 1, प्रविष्टि 2 और प्रविष्टि 18 से है, संबंधित विषयों से भिन्न राज्य सूची में या समवर्ती सूची मैं प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में, जहां तक ऐसा कोई विषय संघ राज्यक्षेत्रों को लागू है, संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी ।
  5. (ख) उपखंड (क) की किसी बात से संघ राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए किसी भी विषय के संबंध मैं इस संविधान के अधीन विधि बनाने की संसद् की शक्ति का अल्पीकरण नहीं होगा ।
  6. (ग) यदि विधान सभा द्वारा किसी विषय के संबंध में बनाई गई विधि का कोई उपबंध संसद् दवारा उस विषय के संबंध में बनाई गई विधि के, चाहे वह विधान सभा दवारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो, या किसी पूर्वतर विधि के, जो विधान सभा द्वारा बनाई गई विधि से भिन्न है, किसी उपबंध के विरुदूध है तो, दोनों दशाओं में, संसद् दवारा बनाई गई विधि, या ऐसी पूर्वतर विधि अभिभावी होगी और विधान सभा द्वारा बनाई गई विधि उस विरोध की मात्रा तक शून्य यथास्थिति, होगी: परत तु सभा द्वारा बनाई गई किसी ऐसी विधि को राष्ट्रपति के विचार के लिए रखा गया है और उस पर उसकी अनुमति मिल गई है तो ऐसी विधि राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र में अभिभावी होगी: यदि विधान परंत तु यह और कि इस उपखंड की कोई बात संसद् को उसी विषय के संबंध में कोई आरक्षित विधि, जिसके अंतर्गत ऐसी विधि है जो विधान सभा द्वारा इस प्रकार बनाई गई विधि का संशोधन, या निरसन करती है, किसी भी समय करने से निवारित नहीं करे गी ।
  7. (4) द्वारा या उसके अधीन उप-राज्यपालर से यह है कि वह अपने विवेकानसार कार्य करे उन बातों को छोड़कर, उप-राज्यपाल की परिवर्धन, परिवर्तन अधिनियमित उन विषयों के संबंध में, बाबत विधान सभा को विधि बनाने की शक्ति है, अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने ने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जो विधान सभा की कल सदस्य संख्या के दस प्रतिशत से अनधिक सदस्यों से मिलकर जिन बातों में किसी विधि बनेगी, जिसका प्रधान, मृख्यमंत्री होगा: अपेक्षित परंत तु उप-राज्यपाल और उसके मंत्रियों के बीच किसी विषय पर मतभेद की दशा जिनकी मैं, उप-राज्यपाल उसे राष्ट्रपति को विनिश्चय के लिए करे गा और राष्ट्रपति दूवारा उस पर किए गए विनिश्चय के अनसार कार्य करेगा गा तथा ऐसा विनिश्चय होने तक उप-राज्यपाल किसी ऐसे मामले में, जहां वह विषय, उसकी राय में, इतना आवश्यक है जिसके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उसके लिए आवश्यक है वहां, उस विषय में ऐसी कार्रवाई करने या ऐसा निदेश श दे ने के लिए, जो वह आवश्यक समझे, होगा । निर्देशित करेगा देने सक्षम 115 !75 नियुक्ति नियुक्ति (5) मुख्यमंत्री की राष्ट्रपति करेगा गा और अन्य मंत्रियों की राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा गा तथा मंत्री, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त अपने पद करेंगे । धारण गे । मंत्रि-परिषद् (6) विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी 'ू(7)
  8. (क) संसद, 1 पूर्वगामी खंडों अंतर्विष्ट (7)
  9. (क) संसद्, पव र्गामी को प्रभावी करने के लिए, या उनमें उपबंधों की अनुपूर्ति अनप तर् के लिए और उनके आनुष॑गिक आनष या पारिणामिक सभी विषयों के लिए, विधि दूवारा, उपबंध कर सकेगी ।
  10. (ख) उपखंड (क) में विधि को, अनच्छेद द 368 के प्रयोजनों के लिए इस थृू(ख) निर्दिष्ट 2 संविधान अंतर्विष्ट का संशोधन इस बात के होते हए भी नहीं समझा जाएगा कि उसमें कोई ऐसा उपबंध है जो इस संविधान का संशोधन करता है या संशोधन करने का प्रभाव रखता है ।
  11. (8) अनुच्छेद द 239ख के उपबंध, जहां तक हो सके, राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र, उप-राज्यपाल और विधान सभा के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे पुडुचेरी संघ राज्यक्षेत्र, प्रशासक और उसके विधान-मंडल के संबंध में लागू होते हैं; और उस अनुच्छेद में “अनुच्छेद निर्देश “अनुच्छे द 239क के खंड (1)” के प्रति श के बारे में यह समझा जाएगा कि वह, यथास्थिति, निर्देश इस अनुच्छेद द या अनुच्छेद द 239कख के प्रति श है ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद दिल्ली की विशेष संवैधानिक व्यवस्था देता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की निर्वाचित विधान सभा है। वह राज्य सूची और समवर्ती सूची पर कानून बना सकती है, सिवाय सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के। उसकी मंत्रिपरिषद सभा की संख्या के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होती, और सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। संसद के कानून और सभा के कानून टकराएं, तो संसद का कानून चलेगा।

Article 239AA in English