भाग 18 · आपात उपबंध
अनुच्छेद 356 तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध— (1)
- बाहय संरक्षा यदि राष्ट्रपति का किसी राज्य के राज्यपाल 2*** से प्रतिवेदन मिलने पर या अन्यथा, यह समाधान हो जाता है कि ऐसी उत्पन्न हो गई है उस राज्य का शासन संरक्षा इस संविधान के उपबंधों के अनस चलाया जा सकता है तो राष्ट्रपति उद्घोषणा अनुसार सुनिश्चित दवारा--. राज्यों में सांविधानिक स्थिति जिसमें अनुसार नहीं 1. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 49 दूवारा (3-1-1977 से) जोड़ा गया । शब्दों का लोप किया गया । संविधान (बयाललीसवां संविधान भारत का संविधान सं वधान 212 राज्य कृत्य राज्यपाल मैं (क) उस रा की क सरकार के सभी या कोई कृ य और रा यपाल म या राज्य भिन्न राज्य प्राधिकारी में निहित रा य के विधान-मंडल से भ न रा य के किसी निकाय या धकार म न हत प्रयोक्तव्य शक्तियां या उसके द्वारा यो त य सभी या कोई शि तयां अपने हाथ में ले सकेगा
- (ख) यह घोषणा कर सकेगा कि राज्य रा य के विधान-मंडल की शक्तियां शि संसद तयां संस दूवारा वारा या उसके प्राधिकार धकार के अधीन प्रयोक्तव्य यो होंगी; त य ह गी
- (ग) राज्य रा य के किसी निकाय या प्राधिकारी धकार से संबंधित संबं धत इस संविधान सं वधान के किन्हीं क उपबंधों ह ं उपबंध के प्रवर्तन वतन को पूर्णतः पू णतः या भागतः निलंबित नलं बत करने के लिए उपबंधों सहित स हत ऐसे आनुष॑ंगिक आनु षं गक और पारिणामिक पा रणा मक उपबंध कर सकेगा जो उदूघोषणा उ घोषणा के उद्देश्यों उ य को प्रभावी भावी करने के लिए राष्ट्रपति रा प त को आवश्यक आव यक या वांछनीय प्रतीत तीत हों: परन्तु पर तु इस खंड की क कोई बात राष्ट्रपति रा प त को उच्च उ न्यायालय च में यायालय निहित म न हत या उसके दूवारा प्रयोक्तव्य यो किसी त शक्ति य कसी शि त को अपने हाथ में लेने ने या उच्च उ न्यायालयों च यायालय से संबंधित संबं धत इस संविधान सं वधान के किसी उपबंध के प्रवर्तन वतन को पूर्णतः पू णतः या भागतः निलंबित नलं बत करने के लिए प्राधिकृत नहीं धकृ करेगी । त नह ं करे गी ।
- (2) ऐसी कोई उद्घोषणा उ किसी घोषणा पश्चात्वर्ती कसी उद्घोषणा प द्वारा चा वत उ घोषणा वारा वापस ली जा सकेगी या उसमें परिवर्तन प किया रवतन कया जा सकेगा ।
- (3) इस अनुच्छेद अनु छे द के अधीन की गई प्रत्येक येक उद्घोषणा उ संसद् घोषणा संस के प्रत्येक येक सदन के समक्ष सम रखी जाएगी और जहां वह पूर्ववर्ती पू उद्घोषणा ववत उ घोषणा को वापस लेने वाली ने उद्घोषणा वाल नहीं उ घोषणा नह ं है वहां वह दो मास की समाप्ति त पर प्रवर्तन वतन मैं नहीं रहेगी ं यदि रहे गी य द उस अवधि की समाप्ति क त से पहले संस के दोनों सदनों के संकल्पों संक द्वारा प वारा उसका अनुमोदन अनु नहीं मोदन नह ं कर दिया जाता है: परन्तु पर यदि तु य द ऐसी कोई उद्घोषणा उ घोषणा (जो पूर्ववर्ती पू उद्घोषणा ववत उ घोषणा को वापस लेने वाली ने वाल उद्घोषणा नहीं उ घोषणा नह ं है) उस समय की जाती है जब लोक सभा का विघटन हो गया है या लोक सभा का विघटन इस खंड में निर्दिष्ट म न द ट दो मास की अवधि ध के दौरान हो जाता है और यदि उद्घोषणा द उ घोषणा का अनुमोदन अनु मोदन करने वाला संकल्प संक राज्य प रा य सभा द्वारा पारित पा रत कर दिया गया है, किन्तु क तु ऐसी उद्घोषणा उ घोषणा के संबंध में कोई संकल्प संक प लोक सभा द्वारा उस अवधि की क समाप्ति त से पहले पारित पा नहीं रत किया नह ं कया गया है तो, उद्घोषणा उ घोषणा उस तारीख ख से जिसको लोक सभा अपने पुनर्गठन पु नगठन के पश्चात् प प्रथम चात ् थम बार बैठती है, तीस दिन की समाप्ति त पर, प्रवर्तन वतन में नहीं रहेगी ं यदि रहे उक्त गी य द उ त तीस दिन की अवधि की समाप्ति क त से पहले उदूघोषणा उ घोषणा का अनुमोदन अनु मोदन करने वाला संकल्प संक प लोक सभा दूवारा भी पारित पा नहीं रत नह ं कर दिया जाता है । संविधान अधिनियम, अनुसूची द्वारा “यथास्थिति, राज्यपाल राजप्रमुख' शब्दों उपयुक्त रूप रा यपाल या राज मु ख” श द के स्थान पर उपयु त में म रखा गया ।
- (4) इस प्रकार अनुमोदित उद्घोषणा, यदि वापस नहीं ली जाती है तो, ऐसी उद्घोषणा के किए जाने की तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति पर प्रवर्तन मैं नहीं रहेगी: परन्तु यदि और जितनी बार ऐसी उद्घोषणा को प्रवृत्त प्रव बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला संकल्प संसद् के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया जाता है तो और उतनी बार वह उदूघोषणा, यदि वापस नहीं ली जाती है तो, उस तारीख से जिसको वह इस खंड के अधीन अन्यथा प्रवर्तन में नहीं रहती, शृछह मास की अवधि तक प्रवृत्त प्रव बनी रहेगी, किन्तु ऐसी उद्घोषणा किसी भी दशा में तीन वर्ष से अधिक प्रवृत्त प्रव नहीं रहेगी: परन्तु यह और कि यदि लोक सभा का विघटन छह मास की ऐसी अवधि के दौरान हो जाता है और ऐसी उद्घोषणा को प्रव बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला प्रवृत्त संकल्प राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया है, किन्तु ऐसी उद्घोषणा को प्रव प्रवृत्त बनाए रखने के संबंध में कोई संकल्प लोक सभा द्वारा उक्त अवधि के दौरान पारित नहीं किया गया है तो, उद्घोषणा उस तारीख से, जिसको लोक सभा अपने पुनर्गठन के पश्चात ् प्रथम बार बैठती है, तीस दिन की समाप्ति पर, प्रवर्तन में नहीं रहेगी यदि उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति से पहले उद्घोषणा को प्रव बनाए रखने का अनुमोदन प्रवृत्त करने वाला संकल्प लोक सभा द्वारा भी पारित नहीं कर दिया जाता है: भुपरन्तु यह भी कि पंजाब राज्य की बाबत 11 मई, 1987 को खंड (1) के अधीन की गई उद्घोषणा की दशा में, इस खंड के पहले परन्तुक में “तीन वर्ष” के प्रति निर्देश निर्देश श का इस प्रकार अर्थ लगाया जाएगा मानो वह पांच वर्ष के प्रति हो । संविधान (चवालीसवां भ. संविधान (बयाबीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 50 दूवारा (3-1-1977 से) "छह मास" के स्थान पर प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 38 दूवारा (20-6-1979 से) "खंड (3) के अधीन उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाले संकल्पों में से दूसरे के पारित हो जाने की तारीख से एक वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (बयाललीसवां वर्ष" प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् द्वारा संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 38 क्रमशः (20- 6-1979 से) प्रतिस्थापित । । संविधान (चौंसठवां 4. (सड़सठवां संशोधन) अधिनियम, 1990 की धारा 2 द्वारा (4-10-1990 से) प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् (अड़सठवां संशोधन) अधिनियम, 1991 की धारा 2 द्वारा (12-3-1991 से) प्रतिस्थापित । संविधान (सड़सठवां संविधान (अड्सठवां 1 अनमोदित (5) खंड (4) मैं किसी बात के होते हुए भी, खंड (3) के अधीन अनम उद्घोषणा के किए जाने की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति से आगे किसी अवधि के प्रवृत्त लिए ऐसी उद्घोषणा को प्रव बनाए रखने के संबंध में कोई संकल्प संसद् के किसी सदन दूवारा तभी पारित कियां जाएगा जब–
- (क) ऐसे संकल्प के पारित किए जाने के समय आपात की उद्घोषणा, जधाउयति संपूर्ण भारत मैं अथवा संपूर्ण राज्य या उसके किसी भाग में प्रवर्तन में र और
- (ख) आयोग यह प्रमाणित कर देता ता है कि ऐसे संकल्प में अवधि के दौरान खंड (3) के अधीन अनुमोदित उद्घोषणा को प्रव निर्वाचन बनाए रखना, संबंधित राज्य की विधान सभा के साधारण कराने में विनिर्दिष्ट प्रवृत्त कठिनाइयों के कारण, आवश्यक है: निर्वाचन परन्तु इस खंड की कोई बात पंजाब राज्य की बाबत 11 मई, 1987 को खंड (1) के अधीन की गई उद्घोषणा को लागू नहीं होगी । परन्त
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति शासन देता है। राष्ट्रपति संतुष्ट हों कि राज्य की सरकार संविधान से नहीं चल सकती, तो वे राज्य की कार्यपालिका शक्तियां संभाल सकते हैं। राज्य विधान-मंडल की शक्तियां संसद को जाती हैं। उद्घोषणा की अनुमति दो माह में चाहिए, और अवधि एक बार में छह माह चलती है, कुल समय की सीमाओं के साथ।