भाग 18 · आपात उपबंध

अनुच्छेद 360 आपात के बारे में उपबंध— (1) का यह समाधान हो

  1. जाता है कि ऐसी उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का स्थायित्व या प्रत्यय संकट में है तो वह उद्घोषणा द्वारा इस आशय की वित्तीय यदि राष्ट्रपति घोषणा कर सकेगा । स्थिति 4 वित्तीय (2) खंड (1) के अधीन की गई उद्घोषणा–
  2. (क) किसी पश्चात्वर्ती उद्घोषणा द्वारा वापस ली जा सकेगी या की जा सकेगी
  3. (ख) संसद् के प्रत्येक सदन के रखी जाएगी; परिवर्तित भ. संविधान (चवालबीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 40 द्वारा (20-6-1979 से) अंतःस्थापित । समक्ष 3. (उनसठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 3 द्वारा (30-3-1988 से) अंतःस्थापित । यह, उस अधिनियम के प्रारंभ भ से, अथार्त ् 1988 के मार्च के तीसवें दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात ् प्रव रहे गी । प्रतिस्थापित । (बयाल्लीसवां जोड़ा संविधान अर्थात् प्रवृत्त नहीं रहेगी । संविधान (चवालीसवां (ग) दो मास की समाप्ति पर, प्रवर्तन में नहीं रहेगी यदि उस अवधि की समाप्ति से पहले संसद के दोनों सदनों के संकल्पों दवारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है: परन्त यदि ऐसी कोई उद्घोषणा उस समय की जाती है जब लोक सभा का विघटन हो गया है या लोक सभा का विघटन उपखंड (ग) में निर्दिष्ट दो मास की अवधि के दौरान हो जाता है और यदि उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाला संकल्प राज्य सभा दवारा पारित कर दिया गया है, किन्तु ऐसी उद्घोषणा के संबंध में कोई संकल्प लोक सभा दवारा उस अवधि की समाप्ति से पहले पारित नहीं किया गया है तो उद्घोषणा उस तारीख से, जिसको लोक सभा अपने पुनर्गठन के पश्चात ् प्रथम बार बैठती है, तीस दिन की समाप्ति पर प्रवर्तन में नहीं रहेगी यदि उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति से पहले उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाला संकल्प लोक सभा द्वारा भी पारित नहीं कर दिया जाता है ।
  4. (3) उस अवधि के दौरान, खंड में उद्घोषणा प्रव रहती जिसमें उल्लिखित प्रवृत्त है, संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य को औचित्य संबंधी ऐसे वित्तीय सिद्धांतों का पालन करने के लिए निदेश श दे ने तक, जो में जाएं, देने निदेशों विनिर्दिष्ट किए और ऐसे अन्य निदेश श दे ने तक होगा राष्ट्रपति उस प्रयोजन के लिए देना ना आवश्यक देने जिन्हें और पयार्प्त समझे । पर्याप्त (4) इस संविधान मैं किसी बात के होते हुए भी,—
  5. (क) ऐसे किसी निदेश श के अंतर्गत- (i) राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने वाले सभी या किसी वर्ग के के वेतनों और में कमी की करने वाला उपबंध; (पं) धन विधेयकों या अन्य ऐसे विधेयकों को, जिनको अनच्छेद द किसी 207 के उपबंध लागू होते हैं, राज्य के विधान-मंडल द्वारा पारित किए जाने व्यक्तियों भत्तों अपेक्षा के पश्चात ् के विचार के लिए रखने के लिए उपबंध, हो सकेंगे:
  6. (ख) राष्ट्रपति, उस अवधि के दौरान, इस अनच्छेद द के अधीन की गई उद्घोषणा प्रव रहती है, संघ के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने वाले सभी या किसी वर्ग के के, जिनके अंतर्गत उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश हैं, वेतनों और में कमी करने के लिए निदेश श दे ने राष्ट्रपति आरक्षित के लिए होगा ।
  7. (5) * * * * * जिसमें प्रवृत्त व्यक्तियों 1. (अड़तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 की धारा 8 द्वारा प्रभाव से) अंतःस्थापित और उसका भत्तों देने संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 41 दूवारा (20-6-1979 से) लोप किया गया । सक्षम संविधान (अड़तीसवां (भूतलक्षी भाग 19 प्रकीर्ण

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद वित्तीय आपातकाल देता है। भारत की मौद्रिक स्थिरता या साख खतरे में हो, तो राष्ट्रपति उद्घोषणा कर सकते हैं। धन के मामलों पर राज्यों को निर्देश जा सकते हैं, वेतन कटौती समेत। अनुमति दो माह में चाहिए। आपातकाल रद्द होने तक चलता है। यह कभी इस्तेमाल नहीं हुआ।

Article 360 in English