भाग 18 · आपात उपबंध

अनुच्छेद 359 आपात के दौरान भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन का निलबंन

  1. (1) जहां आपात की उदृघोषणा प्रवर्तन में है वहां राष्ट्रपति, आदेश श द्वारा यह घोषणा कर सकेगा कि ' (अनच्छेद द 20 और अनच्छेद द 21 को छोड़कर) भाग 3 दवारा प्रदत्त ऐसे अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए, जो उस आदेश में उल्लिखित किए जाएं, किसी न्यायालय को समावेदन करने का अधिकार और इस प्रकार उल्लिखित अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए किसी न्यायालय मैं लंबित सभी कार्यवाहियां उस अवधि के लिए जिसके दौरान उद्घोषणा प्रवृत्त प्रव रहती है या उससे लघुतर ऐसी अवधि के लिए जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित रहेंगी । गी । शू(क)
  2. (1क) जब ' (अनुच्छेद द 20 और अनुच्छेद द 21 को छोड़कर) भाग 3 दवारा प्रदत्त किन्हीं अधिकारों को उल्लिखित करने वाला खंड (1) के अधीन किया गया आदेश श प्रवर्तन में प्रवतर्न है तब उस भाग में उन अधिकारों को प्रदान करने वाली कोई बात उस भाग में यथापरिभाषित राज्य की कोई ऐसी विधि बनाने की या कोई ऐसी कार्यपालिका कार्रवाई करने की शक्ति को, जिसे वह राज्य उस भाग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अभाव मैं बनाने या करने के लिए सक्षम होता, निर्बधित नहीं धत करेगी, किन्तु करे गी, इस प्रकार बनाई गई कोई विधि पूर्वोक्त पव आदेश आदे श के प्रवर्तन में न रहने पर अक्षमता की मात्रा तक उन बातों के सिवाय तुरन्त प्रभावहीन हो जाएगी, जिन्हें विधि के इस प्रकार प्रभावहीन होने के पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है: भुपरन्तु परन्तु जहां आपात की उद्घोषणा भारत के राज्यक्षेत्र के केवल किसी भाग में प्रवर्तन में है वहां, यदि और जहां तक भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा, भारत के राज्यक्षेत्र के उस भाग में या उसके संबंध में, जिसमें आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है, होने वाले क्रियाकलाप के कारण संकट में है तो और वहां तक, ऐसे राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में या उसके संबंध में, जिसमें या जिसके किसी भाग में आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में नहीं है, इस अनुच्छेद द के अधीन ऐसी कोई विधि बनाई जा सकेगी या ऐसी कोई कार्यपालिका कार्रवाई की जा सकेगी । संविधान (चवालीसवां प्रदत्त अधिकारों” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (भूतलक्षी " (पख)
  3. (1ख) खंड (1क) की कोई बात—
  4. (क) किसी ऐसी विधि को लागू नहीं होगी जिसमें इस आशय का उल्लेख अंतर्विष्ट नहीं है कि ऐसी विधि उसके बनाए जाने के समय प्रवृत्त प्रव आपात की उदूघोषणा के संबंध में है; या (ख) किसी ऐसी कार्यपालिका कार्रवाई को लागू नहीं होगी जो ऐसा उल्लेख करने विधि के अधीन न करके अन्यथा की गई है । अंतर्विष्ट वात्री (2) रूप में किए गए आदेश का विस्तार भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग पर हो सकेगा: पूर्वोक्त परन्तु जहां आपात की उद्घोषणा भारत के राज्यक्षेत्र के केवल किसी भाग में प्रवर्तन में है वहां किसी ऐसे आदेश श का विस्तार भारत के राज्यक्षेत्र के किसी अन्य भाग शूपरन्तु पर तभी होगा जब राष्ट्रपति, यह समाधान हो जाने पर कि भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग की सरु भारत के राज्यक्षेत्र के उस भाग में या उसके संबंध में, आपात की उदूघोषणा प्रवर्तन मैं है, होने वाले क्रियाकलाप के कारण संकट में है, ऐसा सुरक्षा, जिसमें विस्तार आवश्यक समझता है ।
  5. (3) खंड (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, श, जाने के पश्चात ् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के रखा जाएगा ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को आपातकाल में मूल अधिकारों के लिए अदालत जाने का अधिकार स्थगित करने देता है। घोषणा में अधिकारों के नाम आते हैं। चवालीसवें संशोधन के बाद अनुच्छेद 20 और 21 कभी स्थगित नहीं हो सकते। आपातकाल खत्म होते ही स्थगन खत्म। आपातकाल प्राण और दैहिक स्वतंत्रता को छूता नहीं।

Article 359 in English