भाग 4 · राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व शक
अनुच्छेद 39 राज्य द्वारा अनुसरणीय कछ नीति राज्य अपनी नीति का, सनिश्चित
- विशिष्टतया, इस प्रकार संचालन करेगा कि रूप से—
- (क) पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त पयार्प्त साधन प्राप्त करने का अधिकार हो
- (ख) समदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस सर्वोत्तम प्रकार बंटा हो जिससे सामूहिक हित का रूप से साधन हो; आर्थिक (ग) व्यवस्था इस प्रकार चले जिससे धन और उत्पादन- साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संक्रेंद्रण न हो; स्त्रियों (घ) पुरुषों और दोनों का समान कार्य के लिए समान वेतन कर्मकारों (ड) तीर आर्थिक (ङ) पुरुष और स्त्री के स्वास्थ्य और शक्ति का तथा रोजगारों में बालकों की सकमार अवस्था का द न हो और आवश्यकता से विवश होकर नागरिकों को ऐसे न जाना पड़े जो उनकी आयु या शक्ति के अनुकूल न हों; संविधान (चवालीसवां खंड (1) के रूप मैं पुनःसंख्यांकित किया गया । भारत का संविधान सं वधान (च) बालकों को वतं और ग रमामय वातावरण में व थ स्वतंत्र गरिमामय स्वस्थ वकास के अवसर और सु वधाएं द जाएं और बालकों और अ पवय विकास सुविधाएं दी अल्पवय की तय क शोषण से तथा नै तक और आ थक प र याग से र की क व्यक्तियों नैतिक आर्थिक परित्याग रक्षा जाए । शू39क.
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य की नीति के लक्ष्य गिनाता है। नागरिकों को, स्त्री-पुरुष समान रूप से, जीवन चलाने के पर्याप्त साधन मिलें। भौतिक संसाधनों का स्वामित्व सार्वजनिक हित में काम करे। धन और उत्पादन के साधन थोड़े हाथों में सिमटकर सबके नुकसान न हों। स्त्रियों और पुरुषों को बराबर काम के लिए बराबर वेतन मिले। बच्चों का शोषण रुके, और कोई जरूरत के बल पर अपनी उम्र या ताकत के अनुकूल न होने वाला काम न करने पड़े।