भाग 4 · राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व शक
अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के संस्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का 1[संसद्
- संरक्षण--' संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन राष्ट्रीय महत्व वाले घोषित किए दूवारा गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुचि वाले प्रत्येक संस्मारक या स्थान या वस्तु का, लुंठन, न, अपसारण, व्ययन या से यथास्थिति, विरूपण, विनाश, निर्यात संरक्षण करना राज्य की बाध्यता होगी ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रीय स्मारकों की रक्षा को राज्य का दायित्व बनाता है। इसमें कला या इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्मारक, स्थान और वस्तुएं आती हैं, जिन्हें कानून से राष्ट्रीय महत्व का ऐलान हो। राज्य हर एक की रक्षा करे। उन्हें क्षति, विकृति, विनाश, उठाने, बेचने या विदेश भेजने से बचाए।