भाग 14 · संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं

अनुच्छेद 312क कुछ सेवाओं के की सेवा की में करने या व्यक्तियों

  1. उन्हें प्रतिसंहत करने की संसद् की शक्ति (1) संसद, विधि द्वारा— नियुक्त किए (क) उन की, जो सेक्रेटरी आफ स्टेट ट द्वारा या सेक्रेटरी आफ स्टेट ट इन कौंसिल द्वारा इस संविधान के प्रारंभ भ से पहले भारत में क्राउन की किसी सिविल सेवा में त गए थे और जो संविधान (अट्ठाईसवां शर्तें संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ भ पर और उसके पश्चात ्, भारत सरकार या भविष्यत्रक्षी भूतत्रक्षी परिवर्तित किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी सेवा या पद पर बने रहते हैं, पारिश्रमिक, छुट्टी और पेंशन संबंधी सेवा की तथा अनुशासनिक विषयों संबंधी अधिकार, या रूप से कर सकेगी या संविधान (बयालीसवां प्रतिसंहत कर सकेगी; (बयाल्लीसवां प्रतिस्थापित । संविधान व्यक्तियों दूवारा (ख) उन की, जो सेक्रेटरी आफ स्टेट ट द्वारा या सेक्रेटरी आफ स्टेट ट इन कौंसिल द्वारा इस संविधान के प्रारंभ भ से पहले भारत मैं क्राउन की किसी सिविल सेवा में नियुक्त किए गए थे और जो संविधान (अट्ठाईसवां निवूतृ्त संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ से पहले किसी समय सेवा से हो शर्तें भविष्यल्क्षी गए हैं या अन्यथा सेवा में नहीं रहे हैं, पेंशन संबंधी सेवा की या भूतलक्षी परिवर्तित रूप से कर सकेगी या प्रतिसंहत कर सकेगी: परंत किसी तु ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या अन्य न्यायाधीश, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, संघ या किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य अथवा मुख्य निर्वाचन आयुक्त त का पद धारण कर रहा है या कर चुका है, उपखंड (क) या उपखंड (ख) की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संसद् को, उस व्यक्ति की उक्त पद पर नियुक्ति के पश्चातु, उसकी ्, सेवा की शर्तों में, वहां तक के सिवाय जहां तक ऐसी सेवा की शर्तें उसे सेक्रेटरी आफ स्टेट ट द्वारा या सेक्रेटरी आफ स्टेट ट इन कौंसिल द्वारा भारत में क्राउन की किसी सिविल सेवा में नियुक्त किया गया व्यक्ति होने के कारण लागू हैं, उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन करने के लिए या उन्हें प्रतिसंहत करने के लिए सशक्त करती है ।
  2. (2) वहां तक के सिवाय जहां तक संसद, विधि द्वारा, इस अनुच्छेद द के अधीन उपबंध करे इस अनुच्छेद की कोई बात खंड में सेवा की निर्दिष्ट व्यक्तियों की शर्तों का विनियमन करने की इस संविधान के किसी अन्य उपबंध के अधीन किसी विधान- मंडल या अन्य प्राधिकारी की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी । मंडत्र (3) उच्चतम न्यायालय को या किसी अन्य न्यायालय को विवादों में कोई अधिकारिता नहीं होगी, अथार्त -- निम्नलिखित (क) किसी प्रसंविदा, करार या अन्य ऐसी ही लिखत के, जिसे खंड (1) में अर्थात्: किसी व्यक्ति ने किया है या निष्पादित किया है, किसी उपबंध से या उस पर किए गए किसी प से उत्पन्न कोई विवाद अथवा ऐसे व्यक्ति को, भारत में क्राउन की किसी सिविल सेवा में उसकी या भारत डोमिनियन निर्दिष्ट की या उसके किसी प्रांत की सरकार के अधीन सेवा में उसके बने रहने के संबंध पृष्ठांकन में भेजे गए किसी पत्र के आधार पर उत्पन्न कोई विवाद; नियक्ति (ख) मूल रूप में यथा अनुच्छेद द 314 के अधीन किसी अधिकार, दायित्व या बाध्यता के संबंध में कोई विवाद । ।
  3. (4) इस अनुच्छेद द के उपबंध मूल रूप में यथा अनुच्छेद द 314 मैं या इस संविधान के किसी अन्य उपबंध मैं किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे । अधिनियमित अधिनियमित -- निमित्त

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद संसद को अखिल भारतीय सेवा की शर्तें बदलने देता है। संसद अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की सेवा शर्तें बदल या रद्द कर सकती है। यह शक्ति वेतन, अवकाश और पेंशन को ढकती है, और समय के साथ दोनों दिशाओं में चलती है। इन बदलावों के लिए राज्य सभा का प्रस्ताव जरूरी नहीं।

Article 312A in English