भाग 14 · संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं
अनुच्छेद 323 लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन (1) संघ आयोग का यह कर्तव्य होगा
- कि वह राष्ट्रपति को आयोग द्वारा किए गए कार्य के बारे मैं प्रतिवेदन दे और ज्ञापन समक्ष राष्ट्रपति ऐसा प्रतिवेदन प्राप्त होने पर उन मामलों के संबंध में, यदि कोई हों, आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी, ऐसी अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाले सहित उस प्रतिवेदन की प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के रखवाएगा । प्रतिवर्ष (2) राज्य आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्य के राज्यपाल 1*** को जिनकी पूर्ति आयोग दूवारा किए गए कार्य के बारे में प्रतिवेदन दे और संयुक्त आयोग का यह कर्तव्य होगा कि ऐसे राज्यों में से प्रत्येक के, आवश्यकताओं की संयुक्त प्रतिवर्ष आयोग दूवारा की जाती है, राज्यपाल 1*** को उस राज्य के संबंध में आयोग द्वारा जिनमें किए गए कार्य के बारे में प्रतिवेदन दे और दोनों में से प्रत्येक दशा में ऐसा प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, राज्यपाल 2*** उन मामलों के संबंध में, यदि कोई हों, ज्ञापन समक्ष आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई थी, ऐसी अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाले सहित उस प्रतिवेदन की प्रति राज्य के विधान-मंडल के रखवाएगा संविधान । संविधान “यथास्थिति, शब्दों का लोप किया गया । राज्यपाल या राजप्रमुख” शब्दों के स्थान पर उपरोक्त रूप से रखा गया । भाग 14क अधिकरण
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद आयोगों को समीक्षा के दायरे में लाता है। संघ आयोग राष्ट्रपति को वार्षिक प्रतिवेदन देता है। राज्य आयोग राज्यपाल को। प्रतिवेदन विधान-मंडल के सामने आता है, साथ में उन मामलों की टिप्पणी जहां सलाह मानी नहीं गई। अभिलेख आयोगों को उत्तरदायी रखता है।