भाग 11 · संघ और राज्यों के बीच संबंध

अनुच्छेद 246 संसद् द्वारा और राज्यों के दवारा बनाई गई की

  1. विषय-वस्त (1) खंड (2) और खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, संसद् को सातर्वी अनसूची की सूची में (िजसे इस संविधान में “संघ सूची” कहा गया है) प्रगणित संसद विधान-मंडल्ों विधियों किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति है ।
  2. (2) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, संसद् को और खंड (1) के अधीन (जिसे रहते हुए, 1*** किसी राज्य के को भी, सातवीं अनसूची की सूची 3 में (जिसे इस संविधान में सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है ।
  3. (3) खंड (1) और खंड (2) के अधीन रहते हुए, 1*** किसी राज्य के विधान- विधान-मंडल्र मंडल को, सातवीं अनस की च “समवर्ती सच 2 में (जिसे इस सविधान में “राज्य सूची” कहा गया है) प्रगणित किसी भी विषय के संबंध में उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि अनुसूची सूची बनाने की अननन्‍्य शक्ति है ।
  4. (4) संसद् को भारत के राज्यक्षेत्र के ऐसे भाग के लिए थृजो किसी राज्य के अंतर्गत नहीं है, किसी भी विषय के संबंध में विधि बनाने की शक्ति है, चाहे वह विषय राज्य सूची में प्रगणित विषय ही क्यों न हो ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद कानून बनाने की शक्ति बांटता है। संघ सूची पर संसद की एकछत्र शक्ति है। राज्य सूची पर राज्य विधान-मंडलों की। समवर्ती सूची पर दोनों कानून बना सकते हैं। समवर्ती विषय पर टकराव हो, तो अनुच्छेद 254 से संसद का कानून चलता है। ये तीन सूचियां संघीय शक्ति बंटवारे की रीढ़ हैं।

Article 246 in English