भाग 11 · संघ और राज्यों के बीच संबंध
अनुच्छेद 252 दो या अधिक राज्यों के उनकी सहमति से विधि बनाने की संसद् की
- ल्रिए शक्ति और ऐसी विधि का किसी अन्य राज्य द्वारा अंगीकार किया जाना—
- (1) यदि किन्हीं दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडलों को यह वांछनीय प्रतीत होता है कि उन विषयों मैं से, जिनके संबंध में संसद् को अनुच्छेद द 249 और अनुच्छेद द 250 में यथा उपबंधित के सिवाय राज्यों के लिए विधि बनाने की शक्ति नहीं है, किसी विषय का विनियमन ऐसे राज्यों मैं संसद् विधि द्वारा करे और यदि उन राज्यों के विधान-मंडलों के सभी सदन उस आशय के संकल्प पारित करते हैं तो उस विषय का तदनुसार विनियमन करने के लिए कोई अधिनियम पारित करना संसद् के लिए होगा विधिपूर्ण और इस प्रकार पारित अधिनियम ऐसे राज्यों को लागू होगा और ऐसे अन्य राज्य को लागू होगा, जो तत्पश्चात ् अपने विधान-मंडल के सदन दूवारा या जहां दो सदन हैं वहां दोनों सदनों में से प्रत्येक सदन इस पारित संकल्प दूवारा उसको अंगीकार कर निमित्त लेता है । संविधान (2) संसद् दूवारा इस प्रकार पारित किसी अधिनियम का संशोधन या निरसन इसी किंतु रीति से पारित या अंगीकृत संसद् के अधिनियम द्वारा किया जा सकेगा, तु उसका उस राज्य के संबंध में संशोधन या निरसन जिसको वह लागू होता है, उस राज्य के विधान-मंडल के अधिनियम द्वारा नहीं किया जाएगा । अंतरराष्ट्रीय
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संसद को दो या अधिक राज्यों की सहमति से उनके लिए कानून बनाने देता है। दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडल प्रस्ताव पारित करें कि उनकी सूची का कोई विषय संसद संभाले, तो संसद वह कानून बना सकती है। कानून अपनाने वाला राज्य बाद में प्रस्ताव से उसे हटा सकता है। दूसरे राज्य बाद में भी अपना सकते हैं। सहमति राज्य विषय को उस कानून के लिए साझा बना देती है।