भाग 11 · संघ और राज्यों के बीच संबंध
अनुच्छेद 249 राज्य सूची में के विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद् की
- शक्ति (1) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, यदि राज्य सभा ने उपस्थित और मत देने ने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिंहाई सदस्यों दवारा वर्णित संकल्प द्वारा घोषित किया है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है 246क संसद् अनुच्छे द 246क के अधीन उपबंधित माल और सेवा कर या राज्य सूची में प्रगणित ऐसे विषय के संबंध में, जो उस संकल्प में है, विधि बनाए तो जब तक वह संकल्प प्रव है, संसद के लिए उस विषय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बनाना होगा । समर्थित कि (2) खंड (1) के अधीन पारित संकल्प एक वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए प्रव संसद धूअनच्छेद रहेगा जो उसमें की जाए: विनिर्दिष्ट परंतु तु और जितनी बार किसी ऐसे संकल्प को प्रव बनाए रखने का अनुमोदन प्रवृत्त करने वाला संकल्प खंड में से पारित हो जाता है तो और उतनी बार ऐसा विधिपूर्ण संकल्प उस तारीख से, जिसको वह इस खंड के अधीन अन्यथा प्रव रहता, एक वर्ष की और अवधि तक प्रव रहेगा । प्रवृत्त (3) संसद् द्वारा बनाई गई कोई विधि, जिसे संसद् खंड (1) के अधीन संकल्प के विनिर्दिष्ट पारित होने के अभाव में बनाने के लिए नहीं होती, संकल्प के प्रव न रहने के पश्चात ् छह मास की अवधि की समाप्ति पर की मात्रा तक उन बातों के सिवाय यदि प्रवृत्त प्रभावी नहीं रहेगी उक्त अवधि की समाप्ति से पहले किया गया है या करने का लोप उपबंधित रीति किया गया है । प्रवृत्त नहीं प्रवृत्त प्रतिस्थापित । सक्षम प्रवृत्त 2. संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 4 द्वारा (16-9-2016 से) अंतःस्थापित । । अक्षमता जिन्हें संविधान
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रीय हित में संसद को राज्य सूची में घुसने देता है। राज्य सभा को पहले उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से प्रस्ताव पारित करना होगा। प्रस्ताव में कहा जाता है कि राष्ट्रीय हित संसद के राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की मांग करता है। यह शक्ति एक बार में एक वर्ष चलती है। इसके तहत बने कानून सामान्य संसद कानूनों जैसे चलते हैं।