भाग 11 · संघ और राज्यों के बीच संबंध
अनुच्छेद 251 संसद् द्वारा अनच्छेद द 249 और अनच्छेद द 250 के अधीन बनाई गई
- संसद और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई में असंगति अनच् छे द विधियों विधियों -- अनच्छेद 249 और अनच्छेद द 250 की कोई बात किसी राज्य के की ऐसी विधि विधान-मंडत्र बनाने की शक्ति को, जिसे इस संविधान के अधीन बनाने की शक्ति उसको है, धत निर्बंधित करे गी तु राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि का कोई नहीं करेगी किंतु यदि किसी उपबंध संसद् द्वारा बनाई गई विधि के, जिसे उक्त अनच् में छे से किसी अनच् अनुच्छेदों अनुच्छेद छे द के अधीन बनाने की शक्ति संसद् को है, किसी उपबंध के विरुदूध है तो संसद् दवारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी चाहे वह राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो और राज्य के विधान-मंडल दूवारा बनाई गई विधि उस विरोध की मात्रा तक अप्रवर्तनीय होगी किंतु तु ऐसा तभी तक होगा जब तक संसद् दूवारा बनाई गई विधि प्रभावी रहती है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद अनुच्छेद 249 या 250 के तहत बने संसद कानून और राज्य कानून के टकराव सुलझाता है। राज्य अपना कानून बनाने की शक्ति बनाए रखता है। पर दोनों टकराएं, तो जब तक संसद का कानून लागू है, वही चलता है। संसद का कानून रुकते ही राज्य का कानून जी उठता है। यह अनुच्छेद 254 का प्राथमिकता नियम इन विशेष मामलों में भी चलाता है।