भाग 11 · संघ और राज्यों के बीच संबंध

अनुच्छेद 260 भारत के बाहर के रा य के संबंध में संघ की अ धका रता— भारत

  1. अधिनियम, अनुसूची दूवारा सरकार किसी ऐसे रा की क सरकार से, जो भारत के रा य का भाग नहीं ं है, करार करके ऐसे रा की क सरकार में न हत क ह ं कायपालक, वधायी या या यक कृ य का भार अपने ऊपर ले सकेगी, क तु येक ऐसा करार वदे शी अ धका रता के राज्यक्षेत्रों अधिकारिता -- योग से संबं धत त समय वृ त कसी व ध के अधीन होगा और उससे शा सत होगा । राज्यक्षेत्र राज्यक्षेत्र राज्यक्षेत्र निहित किनन्‍्हीं कार्यपालक, विधायी न्यायिक कृत्यों किन्तु प्रत्येक विदेशी अधिकारिता 1. सं वधान (बयाल सवां संशोधन) अ ध नयम, 1976 की धारा 43 दूवारा (3-1-1977 से) अंतः था पत । प्रयोग संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि शासित 2. सं वधान (सातवां संशोधन) अ ध नयम, 1956 की धारा 18 दूवारा (1-11-1956 से) अंतः था पत । संविधान (बयाल्लीसवां अधिनियम, अंतःस्थापित । संविधान अधिनियम, अंतःस्थापित । सार्वजनिक --

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद भारत से बाहर संघ की भूमिका से जुड़ा है। भारत सरकार किसी दूसरे क्षेत्र के साथ समझौता करके उसके लिए कार्य संभाल सकती है। इनमें कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका आती हैं। समझौता विदेशी क्षेत्राधिकार पर भारतीय कानून का पालन करे। ऐसे ही भारत पड़ोसी के लिए तय काम करता है।

Article 260 in English