भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध— (1) इस संविधान में

  1. किसी बात के होते हुए भी,—
  2. (क) अनुच्छेद द 238 के उपबंध जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में लागू नहीं होंगे; समवर्ती (ख) उक्त राज्य के लिए विधि बनाने की संसद् की शक्ति-- (i) संघ सूची और सूची के उन विषयों तक सीमित होगी जिनको राष्ट्रपति, उस राज्य की सरकार से परामर्श करके, उन विषयों के विनिर्दिष्ट विधान-मंडतर तत्स्थानी विषय घोषित कर दे, जो भारत डोमिनियन में उस राज्य के अधिमिलन को शासित करने वाले अधिमिलन पत्र मैं ऐसे विषयों के रूप में हैं जिनके संबंध में डोमिनियन उस राज्य के लिए विधि बना सकता है; और प्रदत्त शक्तियों निम्नलिखित रहेंगे, अर्थात्: ∗∗ राष्ट्रपति, संसद् की सिफारिश पर भारत के संविधान के अनुच्छेद द 370 के खंड (1) के साथ पठित अनुच्छेद द 370 किन्‍्हीं के खंड (3) द्वारा का प्रयोग करते हुए यह घोषणा करते हैं कि 6 अगस्त, 2019 से उक्त अनुच्छेद द 370 के सभी खंड, सिवाय के, जो नीचे दिए गए हैं के अनुसार है, प्रचालन में नहीं गे, अथार्त ्:– आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना “370. इस संविधान के समय-समय पर यथा संशोधित, सभी उपबंध बिना उपातंरणों या अपवादों वात्ली रूढ़ि के अनुच्छेद द 152 या अनुच्छेद द 308 या इस संविधान के किसी अन्य अनुच्छेद द या जम्मू-कश्मीर के संविधान में परिकल्पित किसी अन्य उपाबंध या किसी विधि, दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश, श, आदे श, या भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने किसी या प्रथा या किसी अन्य लिखत, संघी या करार जो अनुच्छेद द 363 के अधीन यथा या अन्यथा है, में तत्प्रतिकूल किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, जम्मू-कश्मीर राज्य को लागू होंगे ।”। परिशिष्ट 3 देखें (सं.आ. 273) । प्रदत्त शक्तियों संविधान सभा की सिफारिश पर यह घोषणा की, कि 17 नवंबर, 1952 से उक्त अनुच्छेद द 370 इस उपांतरण के स्पष्टीकरण निम्नलिखित साथ प्रवर्तनीय होगा कि उसके खंड में के स्थान पर स्पष्टीकरण रख दिया गया है, अर्थात्:-- अथार्त ्:– “स्पष्टीकरण- इस अनुच्छेद द के प्रयोजनों के लिए राज्य की सरकार से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे राज्य की विधान सभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राज्य की तत्समय पदारूढ़ मंत्रि-परिषद् की सलाह पर कार्य करने वाले जम्मू-कश्मीर के सदरे रियासत के रूप में मान्यता प्रदान की हो ।”। (सं.आ. 44, दिनांक 15 नवंबर, 1952) । * अब “राज्यपाल” । (ii) उक्त सूचियों के उन अन्य विषयों तक सीमित होगी जो विनिर्दिष्ट राष्ट्रपति, उस राज्य की सरकार की सहमति से, आदेश श द्वारा, करे । स्पष्टीकरण--इस अनच्छेद इस अनुच्छे द के प्रयोजनों के लिए, उस राज्य की सरकार से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे राष्ट्रपति से, जम्मू-कश्मीर के महाराजा की 5 मार्च, 1948 की उद्घोषणा के अधीन तत्समय पदस्थ मंत्रि-परिषद् की सलाह पर कार्य करने वाले जम्मू-कश्मीर के महाराजा के रूप में तत्समय मान्यता प्राप्त थी
  3. (ग) अनुच्छेद अनच् अनुच्छेद छे द 1 और इस अनच् छे द के उपबंध उस राज्य के संबंध में लागू होंगे; दूवारा विनिर्दिष्ट (घ) इस संविधान के ऐसे अन्य उपबंध ऐसे अपवादों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए, जो राष्ट्रपति आदेश* श ∗ द्वारा करे, उस राज्य के संबंध निर्दिष्ट में लागू होंगे विनिर्दिष्ट परंत तु ऐसा कोई आदेश श जो उपखंड (ख) के पैरा मैं राज्य के अधिमिलन पत्र में विषयों से संबंधित है, उस राज्य की सरकार से परामर्श करके ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं: पूर्ववर्ती निर्दिष्ट परंत तु यह और कि ऐसा कोई आदेश श जो अंतिम परंतक में विषयों से भिन्न विषयों से संबंधित है, उस सरकार की सहमति से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं । । यदि (2) खंड (1) के उपखंड (ख) के पैरा (ii) में या उस खंड के उपखंड (घ) के दूसरे परंतुक द में निर्दिष्ट परं तुक उस राज्य की सरकार की सहमति, उस राज्य का संविधान बनाने के प्रयोजन के लिए संविधान सभा के बलाए जाने से पहले दी जाए तो उसे ऐसी संविधान सभा के समक्ष ऐसे विनिश्चय के लिए रखा जाएगा जो वह उस पर करे ।
  4. (3) इस अनच्छेद द के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति लोक अधिसूचना दवारा घोषणा कर सकेगा कि यह अनच्छेद द प्रवतर्न रहेगा या प्रवर्तन में नहीं ऐसे अपवादों और उपांतरणों सहित ही और ऐसी तारीख से, प्रवर्तन में रहेगा, जो वह करे: विनिर्दिष्ट परत तु द्वारा ऐसी अधिसूचना निकाले जाने से पहले खंड (2) राष्ट्रपति उस राज्य की संविधान सभा की सिफारिश आवश्यक होगी । निर्दिष्ट परिशिष्ट में देखिए ।. ∗ 2 संविधान । उल्लिखित राज्य की संविधान सभा” अभिव्यक्ति को “राज्य की विधान सभा” पढ़ा जाएगा ।” परिशिष्ट 2 में दे ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए अस्थायी उपबंध रखता था। यह संसद की उस राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति विलय पत्र के विषयों तक सीमित रखता था, और अधिक के लिए राज्य की सहमति चाहिए थी। राज्य का अपना संविधान और झंडा रहने देता था। 2019 में राष्ट्रपति के आदेशों से संविधान क्षेत्र पर लागू हुआ और उसे संघ राज्यक्षेत्रों में पुनर्गठित किया गया। आधिकारिक संस्करण में छपा पाठ बना हुआ है।

Article 370 in English