भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]

अनुच्छेद 371च सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध— इस संविधान में किसी

  1. बात के होते हुए भी,—
  2. (क) सिक्किम राज्य की विधान सभा कम से कम तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी; (छत्तीसवां तारीख (ख) संविधान संशोधन) अधिनियम, 1975 के प्रारंभ की अनुच्छेद नियत दिन से (जिसे इस अनच् में छे द इसके पश्चात ् कहा गया है)— सिक्किम की विधान निर्वाचनों निर्वाचनों निर्वाचित बत्तीस (i) सभा, जो अप्रैल, 1974 में सिक्किम में (जिन्हें हुए के परिणामस्वरूप उक्त में सदस्यों से इसमें इसके पश्चात ् आसीन सदस्य कहा गया है) मिलकर बनी है, इस संविधान के अधीन सम्यक् रूप से गठित सिक्किम राज्य की विधान सभा समझी जाएगी; निर्वाचित (ii) आसीन सदस्य इस संविधान के अधीन सम्यक् रूप से सिक्किम राज्य की विधान सभा के सदस्य समझे जाएंगे; और शक्तियों (iii) सिक्किम राज्य की उक्त विधान सभा इस संविधान के अधीन राज्य की विधान सभा की का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगी;. संविधान गी; (छत्तीसवां (ग) खंड (ख) के अधीन सिक्किम राज्य की विधान सभा समझी गई अनुच्छेद विधान सभा की दशा में, अनच् छे द 172 के खंड में पांच वर्ष की अवधि के प्रति निर्देशों 1 निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे धृचार वर्ष की अवधि के प्रति हैं और शचार वर्ष की उक्त अवधि नियत दिन से प्रारंभ भ हुई समझी जाएगी
  3. (घ) जब तक संसद् विधि द्वारा अन्य उपबंध नहीं करती है तब तक निर्वाचन-क्षेत्र सिक्किम राज्य को लोक सभा में एक स्थान आबंटित किया जाएगा और निर्वाचन-क्षेत्र सिक्किम राज्य एक संसदीय होगा जिसका नाम सिक्किम संसदीय होगा; प्रतिनिधि (ड) नियत दिन को विद्यमान लोक सभा मैं सिक्किम राज्य का निर्वाचित सिक्किम राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा किया जाएगा
  4. (च) संसद, सिक्किम की जनता के विभिन्‍न अनुभागों के अधिकारों और हितों की संरक्षा करने के प्रयोजन के लिए सिक्किम राज्य की विधान सभा में उन स्थानों की संख्या के लिए जो ऐसे अनुभागों के अभ्यर्थियों दवारा भरे जा सकेंगे और ऐसे सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के लिए, जिनसे केवल ऐसे अनुभागों अनभ के अभ्यर्थी ही सिक्किम राज्य की विधान सभा के निर्वाचन के लिए खड़े हो सकेंगे, उपबंध कर सकेगी
  5. (छ) सिक्किम के राज्यपाल का, शांति के लिए और सिक्किम की जनता के विभिन्‍न अनुभागों की सामाजिक और उन्नति सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक साम्यापूर्ण व्यवस्था करने के लिए विशेष होगा और इस खंड के अधीन उत्तरदायित्व अपने विशेष का निर्वहन करने में सिक्किम का राज्यपाल ऐसे उत्तरदायित्व निदेशों के अधीन रहते हुए जो राष्ट्रपति समय-समय पर देना ना समझे, अपने विवेक से ठीक कार्य करेगा; गा
  6. (ज) सभी और आस्तियां (चाहे वे सिक्किम राज्य में समाविष्ट के भीतर हों या बाहर) जो नियत दिन से ठीक पहले सिक्किम सरकार संपत्ति में या सिक्किम सरकार के प्रयोजनों के लिए किसी अन्य प्राधिकारी या व्यक्ति में राज्यक्षेत्रों निहित थीं, नियत दिन से सिक्किम राज्य की सरकार में निहित हो जाएंगी; प्रतिस्थापित और तत्पश्चात संविधान ् (चवाल्लीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 43 द्वारा (6-9-1979 से “छह वर्ष” के स्थान पर) प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 43 दूवारा (6-9-1979 से) संविधान (चवालीसवां क्रमशः “पांच वर्ष” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ।
  7. (झ) सिक्किम राज्य में समाविष्ट में नियत दिन से ठीक पहले राज्यक्षेत्रों उच्च न्यायालय के रूप में कायर् त उच्च न्यायालय नियत दिन को और से कार्यरत सिक्किम राज्य का उच्च न्यायालय समझा जाएगा
  8. (ज) सिक्किम राज्य के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र सिविल, दांडिक और राजस्व अधिकारिता वाले सभी न्यायालय तथा सभी न्यायिक, कार्यपालक और अनसचिवीय प्राधिकारी और अधिकारी नियत दिन को और से अपने-अपने कत्यों को इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, करते गे
  9. (ट) सिक्किम राज्य में समाविष्ट राज्यक्षेत्र मैं या उसके किसी भाग में रहेंगे: नियत दिन से ठीक पहले प्रव सभी विधियां वहां तब तक प्रव बनी गी जब तक किसी विधान-मंडल या अन्य प्राधिकारी दवारा उनका संशोधन या निरसन नहीं कर दिया जाता है; प्रवृत्त प्रवृत्त रहेंगी (ठ) सिक्किम राज्य के प्रशासन के संबंध में किसी ऐसी विधि को, जो सक्षम सक्षम खंड (ट) में है, लागू किए जाने को सकर बनाने के प्रयोजन के लिए और किसी ऐसी विधि के उपबंधों को इस संविधान के उपबंधों के अनुरूप बनाने के प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति, नियत दिन से दो वर्ष के भीतर, आदेश श द्वारा, ऐसी विधि में निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में ऐसे अनकूलन और उपांतरण निर्दिष्ट कर सकेगा जो आवश्यक या समीचीन हों और तब प्रत्येक ऐसी विधि इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हए प्रभावी होगी और किसी ऐसे अनुकूलने या उपांतरण को किसी न्यायालय मैं प्रश्नगत नहीं किया जाएगा
  10. (ड) उच्चतम न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय को, सिक्किम के संबंध में किसी ऐसी संधि, करार, वचनबंध या वैसी ही अन्य लिखत से, जो नियत दिन से पहले की गई थी या निष्पादित की गई थी और भारत सरकार या उसकी कोई सरकार थी, उत्पन्न किसी विवाद या अन्य विषय के संबंध में अधिकारिता नहीं होगी, तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह अनच्छेद द 143 के उपबंधों का अल्पीकरण करती है
  11. (ढ) राष्ट्रपति, लोक अधिसूचना दवारा, किसी ऐसी का जिसमें विस्तार, जो उस अधिसूचना की तारीख को भारत के किसी राज्य मैं प्रव है, पूर्ववर्ती पक्षकार ऐसे या उपांतरणों सहित, जो वह ठीक समझता है, सिक्किम राज्य पर कित॒ कर सकेगा
  12. (ण) यदि इस अनच्छेद द के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी उपबंध को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होतो है तो राष्ट्रपति, आदेश” श ∗ द्वारा, कोई ऐसी अधिनियमिति बात (जिसके अंतर्गत किसी अन्य अनच्छेद द का कोई अनुकूलन या उपांतरण है) प्रवृत्त कर सकेगा जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक निर्बन्धनों प्रतीत होती है: ∗ संविधान (कठिनाइयों का निराकरण) आदेश सं॰ 11 (सं॰ आ॰ 99) देखिए । । नियत दिन नहीं परंतु तु ऐसा कोई आदेश श से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात ् किया जाएगा
  13. (त) सिक्किम राज्य या उसमें समाविष्ट राज्यक्षेत्रों में या उनके संबंध में, नियत दिन को प्रारंभ भ होने वाली और उस तारीख से जिसको संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करता है, ठीक पहले समाप्त होने वात्ली अवधि के दौरान की गई सभी बातें और कार्रवाइयां, जहां तक वे संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा यथासंशोधित इस संविधान के उपबंधों के अनुरूप हैं, प सभी प्रयोजनों के लिए इस प्रकार यथासंशोधित इस संविधान के अधीन विधिमान्यतः की गई समझी जाएंगी ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद 1975 में भारत में शामिल होने के बाद सिक्किम के विशेष उपबंध रखता है। सिक्किम की विधान सभा में कम से कम तीस सदस्य होते हैं। सिक्किम को लोक सभा में एक सीट मिली है। विद्यमान कानून और अदालतें अनुकूलन के अधीन चलती हैं। संपत्ति के अधिकार और पुराने रीवाज अनुच्छेद के अनुसार सुरक्षित हैं।

Article 371F in English