भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]

अनुच्छेद 371क राज्य के संबंध में विशेष उपबंध— (1) इस संविधान में किसी

  1. बात के होते हुए भी,— गू374क. नागालैंड (क) के संबंध में संसद् का कोई अधिनियम नागालैंड राज्य को तब तक लागू नहीं होगा जब तक नागालैंड की विधान सभा संकल्प दूवारा ऐसा विनिश्चय नहीं करती है, अथार्त ्,– (i) नागाओं की या सामाजिक प्रथाएं; निम्नलिखित (ii) नागा विधि और प्रक्रिया; (iii) सिविल और दांडिक न्याय प्रशासन, जहां विनिश्चय नागा अर्थात्,- विधि के अनुसार होने हैं; (४ भूमि म और उसके स्रोतों का स्वामित्व और अंतरण; धार्मिक रूढ़िजन्य कि (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 22 द्वारा (1-11-1956 से) अनुच्छेद द 371 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।. । रूढ़िजन्य 2. संशोधन) अधिनियम, 1973 की धारा 2 दूवारा (1-7-1974 से) “आंध्र प्रदेश,” श,” का लोप किया गया । संपत्ति 3. संशोधन) अधिनियम, 1973 की धारा 2 दूवारा (1-7-1974 से) खंड (1) का लोप किया गया । (०. प्रतिस्थापित ।. । संविधान प्रतिस्थापित ।. । संविधान (बत्तीसवां शब्दों संविधान (बत्तीसवां संविधान (ख) नागालैंड के राज्यपाल का नागालैंड राज्य में विधि और व्यवस्था के संबध में तब तक विशेष उत्तरदायित्व रहेगा जब तक उस राज्य के निर्माण के ठीक पहले नागा पहाड़ी त्यएनसांग क्षेत्र में विद्यमान आंतरिक अशांति, उसकी राय में, उसमें या उसके किसी भाग में बनी रहती है और राज्यपाल, उस संबंध मैं अपने कृत्यों का निर्वहन करने में की जाने वाल्ली कार्रवाई के बारे में अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग, मंत्रि-परिषद् से परामर्श करने के पश्चात ् करेगा: परंत तु यह प्रश्न उठता है कि कोई मामला ऐसा मामल्रा है या नहीं यदि जिसके संबंध मैं राज्यपाल से इस उपखंड के अधीन की गई है कि वह अपेक्षा अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करके कार्य करे तो राज्यपाल्र का अपने विवेक से किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि उसे अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करके कार्य करना चाहिए था या नहीं; परंत तु यह और कि यदि राज्यपाल से प्रतिवेदन मिलने पर या अन्यथा राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि अब यह आवश्यक नहीं है कि नागालैंड राज्य मैं विधि और व्यवस्था के संबंध मैं राज्यपाल का विशेष रहे तो वह, आदेश द्वारा, निदेश श दे सकेगा कि राज्यपाल का ऐसा उस उत्तरदायित्व तारीख से नहीं रहेगा जो आदेश में की जाए; उत्तरदायित्व (ग) अनुदान की किसी मांग के संबंध में अपनी सिफारिश करने में, विनिर्दिष्ट नागालैंड का राज्यपाल यह सनिश्चित करेगा कि सेवा या प्रयोजन के लिए भारत की संचित निधि में से भारत सरकार दवारा दिया गया कोई धन उस सेवा या प्रयोजन से संबंधित अनुदान की मांग मैं, न कि किसी किसी विनिर्दिष्ट अन्य मांग में, किया जाए
  2. (घ) उस तारीख से जिसे नागालैंड का राज्यपाल इस लोक अधिसूचना द्वारा करे, त्य॒एनसांग जिले के लिए एक प्रादे सम्मिलित जाएगी जो पैंतीस सदस्यों से मिलकर बनेगी और राज्यपाल बातों का उपबंध करने के लिए नियम अपने विवेक से बनाएगा, निमित्त अथार्त ्:– विनिर्दिष्ट प्रादेशिक परिषद् (i) प्रादे संरचना और वह रीति जिससे प्रादे स्थापित की के सदस्य चने जाएंगे: निम्नलिखित परंत तु त्युएनसांग का उपायक्त प्रादे का पदेन न अर्थात्:- होगा और प्रादे का उसके सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा; प्रादेशिक परिषद् की प्रादेशिक (ii) प्रादे के सदस्य चने जाने के लिए और सदस्य होने परिषद् के लिए अहताएं: (iii) प्रादे के सदस्यों की पदावधि और उनको दिए जाने त्यएनसांग जिले प्रादेशिक परिषद् वाले वेतन और यदि कोई हों; अध्यक्ष प्रादेशिक परिषद् उपाध्यक्ष निर्वाचित प्रादेशिक परिषद् प्रादेशिक परिषद् भत्ते, (९४) प्रादेशिक प्रादे परिषद् की प्रक्रिया और कार्य संचालन; (९) प्रादेशिक प्रादे परिषद् के अधिकारियों और कर्मचारिवृंद की नियुक्ति और उनकी सेवा की शर्तें; और (मं) कोई अन्य विषय जिसके संबंध में प्रादेशिक प्रादे परिषद् के गठन और उसके उचित कार्यकरण के लिए नियम बनाने आवश्यक हैं । ।
  3. (2) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, नागालैंड राज्य के निर्माण की तारीख से दस वर्ष की अवधि तक या ऐसी अवधि के लिए जिसे राज्यपाल, प्रादेशिक प्रादे परिषद् की सिफारिश पर, लोक अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे,–
  4. (क) त्यएनसांग जिले का प्रशासन राज्यपाल दवारा चलाया जाएगा
  5. (ख) जहां भारत सरकार द्वारा नागालैंड सरकार को, संपूर्ण नागालैंड राज्य की आवश्यकताओं की के लिए कोई धन दिया जाता है वहां, राज्यपाल अपने विवेक से त्यएनसांग जिले और शेष राज्य के बीच उस धन के साम्यापूर्ण आबंटन पूर्ति के लिए प्रबंध करेगा
  6. (ग) नागालैंड विधान-मंडलर का कोई अधिनियम त्यएनसांग जिले को तब तक लागू नहीं होगा जब तक राज्यपाल, प्रादे पर, लोक अधिसूचना द्वारा, इस प्रकार निदेश श दे ता है और ऐसे किसी अधिनियम के संबंध में ऐसा निदेश श दे ते हुए राज्यपाल यह निदिष्ट कर सकेगा कि वह अधिनियम प्रादेशिक परिषद् की सिफारिश त्य॒एनसांग जिले या उसके किसी भाग को लागू होने में ऐसे अपवादों या उपांतरणों नहीं देता के अधीन रहते हए, प्रभावी होगा राज्यपाल प्रादे देते पर करे: परंत तु इस उपखंड के अधीन दिया गया कोई निदेश श इस प्रकार दिया जा जिन्हें प्रादेशिक परिषद् की सिफारिश सकेगा कि उसका प्रभाव हो; विनिर्दिष्ट (घ) राज्यपाल त्यएनसांग जिले की शांति, उन्नति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए विनियम उस जिले को तत्समय लागू संसद् के किसी अधिनियम या किसी अन्य विधि का, यदि आवश्यक हो तो प्रभाव से निरसन या संशोधन कर सकेंगे: भूतलक्षी (ड) (i) सभा में त्यएनसांग जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से एक सदस्य को राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर त्यएनसांग कार्य मंत्री नियुक्त करेगा गा और मुख्यमंत्री अपनी सलाह देने में की 11 भूतल्रक्षी नागालैंड विधान बहुसंख्या की सिफारिश पर कार्य करेगा! गा; पूर्वोक्त.' सदस्यों संविधान का अनुच्छेद द 371क इस प्रकार प्रभावी होगा मानो उसके खंड (2) के उपखंड (ड) के पैरा में परं तुक जोड़ गया हो, अथार्त -- “परंतु तु राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर, किसी व्यक्ति को त्युएनसांग कार्य मंत्री के रूप में ऐसे समय तक निम्नलिखित परंतुक जोड़ दिया अर्थात्: के लिए नियुक्त कर सकेगा, जब तक कि नागालैंड की विधान सभा में त्युएनसांग जिले के लिए, आबंटित स्थानों को भरने के लिए विधि के अनुसार को चुन नहीं लिया जाता है ।”। व्यक्तियों (प) त्यएनसांग कार्य मंत्री त्यएनसांग जिले से संबंधित सभी विषयों की बाबत कार्य करेगा गा और उनके संबंध म॑ राज्यपाल के पास उसकी सीधी पहुंच होगी किंत तु वह उनके संबंध मैं मुख्यमंत्री को जानकारी देता ता रहेगा
  7. (च) इस खंड के पूर्वगामी पव उपबंधों में र्गामी किसी बात के होते हुए भी, त्युएनसांग जिले से संबंधित सभी विषयों पर अंतिम विनिश्चय राज्यपाल अपने विवेक से करेगा: गा
  8. (छ) अनच्छेद द 54 और अनच्छेद द 55 में तथा अनच्छेद द 80 के खंड (4) राज्य की विधान सभा के सदस्यों के या ऐसे प्रत्येक सदस्य के प्रति निर्वाचित के अंतर्गत इस अनुच्छेद द के अधीन स्थापित प्रादे द्वारा निर्देशों प्रादेशिक परिषद् नागालैंड विधान सभा के सदस्यों या सदस्य के प्रति श निर्वाचित निर्देश होंगे
  9. (ज) अनुच्छेद द 170 मैं-- (i) खंड (1) नागालैंड विधान सभा के संबंध में इस प्रकार प्रभावी होगा मानो “साठ” शब्द के स्थान पर “छियालीस” शब्द रख दिया गया हो
  10. (प) उक्त खंड में, उस राज्य में प्रादे से के प्रति श के अंतर्गत इस अनच् छे द के अधीन स्थापित प्रादे के सदस्यों द्वारा होगा; (पं) खंड (2) और खंड (3) में प्रादे के प्रति प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों प्रत्यक्ष श से कोहिमा और मोकोकचुंग में प्रादे के निर्वाचन निर्देश अनुच्छेद प्रति श । प्रादेशिक परिषद् निर्वाचन (3) इस अनुच्छेद द के पूर्वगामी उपबंधों मैं से किसी उपबंध को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राष्ट्रपति, आदेश श द्वारा, कोई ऐसी बात (जिसके प्रादेशिक निर्वाचन+क्षेत्रों अंतर्गत किसी अन्य अनुच्छेद द का कोई अनुकूलन या उपांतरण है) कर सकेगा जो उस निर्देश जिलों प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक प्रतीत होती है: निर्देश अभिषप्रेत होंगे । परंतु तु ऐसा कोई आदेश श राज्य के की तारीख से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात ् जाएगा । यदि इस अनुच्छेद में, मोकोकचुंग और त्युएनसांग का वही अर्थ है जो नागालैंड राज्य अधिनियम, 1962 में है ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद नागालैंड को विशेष उपबंध देता है। धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, पारंपरिक कानून या भूमि स्वामित्व पर संसद का कोई अधिनियम राज्य सभा की सहमति के बिना नागालैंड पर लागू नहीं होता। नई व्यवस्था बैठते समय कानून-व्यवस्था के लिए राज्यपाल की विशेष भूमिका है। तुएंसांग जिले के लिए क्षेत्रीय परिषद है।

Article 371A in English