भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]

अनुच्छेद 374 फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों यायाधीश और फेडरल न्यायालय में या सपरिषद् सप रष

  1. हिज मजेस्टी हज मजे ट के समक्ष सम लंबित लं कार्यवाहियों बत कायवा हय के बारे में उपबंध—
  2. (1) इस संविधान सं वधान के प्रारंभ भ से ठीक क पहले फेडरल न्यायालय के पद धारण करने वाले न्यायाधीश, यदि द वे अन्यथा अ निर्वाचन यथा नवाचन न कर चुके हों ह तो, ऐसे प्रारंभ भ पर उच्चतम उ न्यायालय चतम यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे और तब ऐसे वेतनों वे तन और भत्तों भ त तथा अनुपस्थिति अनु छुट्टी पि थ त छु और पेंशन के संबंध में ऐसे अधिकारों अ धकार के हकदार होंगे ह गे जो उच्चतम उ न्यायालय चतम यायालय के न्यायाधीशों यायाधीश के संबंध में अनुच्छेद अनु छे द 125 के अधीन उपबंधित उपबं हैं ह ।
  3. (2) इस सं वधान के भ पर फेडरल न्यायालय में लं बत सभी स वल या संविधान प्रारंभ लंबित सिविल दां डक वाद, अपील और कायवा हयां, उ चतम यायालय को अंत रत हो जाएंगी और दांडिक कार्यवाहियां, उच्चतम न्यायालय अंतरित उ चतम यायालय को उनको सु नने और उनका अवधारण करने की अ धका रता होगी उच्चतम न्यायालय सुनने अधिकारिता और फेडरल न्यायालय दूवारा इस सं वधान के भ से पहले सु नाए गए या दिए गए संविधान प्रारंभ सुनाए नणय और आदेशों श का वही बल और भाव होगा मानो वे उ चतम यायालय वारा निर्णयों प्रभाव उच्चतम न्यायालय द्वारा सु नाए गए हों या दिए गए ह । सुनाए (3) इस सं वधान क कोई बात भारत के रा य के भीतर किसी न्यायालय के किसी नणय, ड या आदेश की क या उसके संबंध में अपीलों और या चकाओं को संविधान की राज्यक्षेत्र निपटाने के लिए सप रष हज मजे ट वारा अ धका रता के योग को वहां तक निर्णय, डिक्री याचिकाओं अ व धमा य नह ं करे गी जहां तक ऐसी अ धका रता का योग व ध वारा धकृ त है सपरिषद्ू हिज मजेस्टी द्वारा अधिकारिता प्रयोग और ऐसी अपील या या चका पर इस सं वधान के भ के प चात ् कया गया सप रष अविधिमान्य नहीं करेगी अधिकारिता प्रयोग विधि दवारा प्राधिकृत हज मजे ट का कोई आदेश श सभी योजन के लिए ऐसे भावी होगा मानो वह उ चतम याचिका संविधान प्रारंभ पश्चात् किया सपरिषद् यायालय वारा उस अ धका रता के योग में जो ऐसे न्यायालय को इस सं वधान हिज मजेस्टी प्रयोजनों प्रभावी उच्चतम वारा दान क गई है, किया गया कोई आदेश श या ड हो । न्यायालय द्वारा अधिकारिता प्रयोग संविधान (4) इस सं वधान के भ से ही पहली अनु सू ची के भाग ख में व न द मैं कसी दूवारा प्रदान की डिक्री रा य म वी क सल के रूप में कार्यरत धकार क उस रा य के भीतर किसी न्यायालय के किसी नणय, ड या आदेश की क या उसके संबंध में अपीलों और संविधान प्रारंभ अनुसूची विनिर्दिष्ट किसी या चकाओं को हण करने या निपटाने की अ धका रता समा त हो जाएगी और उ त राज्य प्रिवी कौंसिल प्राधिकारी की राज्य धकार के सम ऐसे भ पर लं बत सभी अपीलें और अ य कायवा हयां उ चतम निर्णय, डिक्री यायालय को अंत रत कर दी जाएंगी और उसके द्वारा निपटाई जाएंगी । याचिकाओं ग्रहण अधिकारिता समाप्त उक्त (5) इस अनु छे द के उपबंधों को भावी करने के लिए संस विधि द्वारा और प्राधिकारी समक्ष प्रारंभ लंबित अन्य कार्यवाहियां उच्चतम उपबंध कर सकेगी । न्यायालय अंतरित अनुच्छेद प्रभावी

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों को नए ढांचे में ले गया। न्यायाधीश इस्तीफा या हटाए जाने के अलावा पद पर रहे, और पहले दिन से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माने गए। पुरानी अदालत की लंबित कार्यवाहियां भी नई को गईं।

Article 374 in English