भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]
अनुच्छेद 392 को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति
- (1) ऐसी कठिनाइयों को, जो विशिष्टतया भारत शासन अधिनियम, 1935 के उपबंधों से इस संविधान के उपबंधों को संक्रमण के संबंध में हों, दूर करने के प्रयोजन के लिए आदेश श कठिनाइयों राष्ट्रपति, किन्हीं द्वारा श दे सकेगा कि यह संविधान उस आदेश में के दौरान उपांतरण, या लोप के रूप में ऐसे अनक के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो दूवारा निदेश विनिर्दिष्ट अवधि वह आवश्यक या समीचीन समझे: परिवर्धन अनुकूलनों परंतु तु ऐसा कोई आदेश श भाग 5 के अध्याय 2 के अधीन सम्यक् रूप से गठित संसद् के प्रथम अधिवेशन के पश्चात ् जाएगा ।
- (2) खंड (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश श संसद् के रखा जाएगा ।
- (3) इस अनुच्छेद, द, अनुच्छे द 324, अनुच्छेद द 367 के खंड (3) और अनुच्छेद द 391 नहीं किया दूवारा राष्ट्रपति को शक्तियां, इस संविधान के प्रारंभ भ से पहले, भारत डोमिनियन के गवनर् जनरल द्वारा प्रयोक्तव्य होंगी । । समक्ष अनुच्छेद प्रदत्त गवर्नर भाग 22 संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी भ, में प्राधिकृत पाठ और निरसन
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को शुरुआती दिक्कतें हटाने देता था। राष्ट्रपति प्रारंभ से दो वर्ष तक आदेश से नए ढांचे में उतरने की कठिनाइयां दूर कर सकते थे। हर आदेश संसद के सामने आना था। वह शक्ति बहुत पहले बंद हो गई। यह संस्थापक दौर का हिस्सा है।