भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]
अनुच्छेद 371घ 4[आं दे श रा य या तेलंगाना रा य] के संबंध में विशेष उपबंध— 5[(1)
- शु37घ. “आंध्र प्रदेश राज्य राज्य रा प त, आं दे श रा य या तेलंगाना रा य के संबंध में किए गए आदेश श वारा, येक राष्ट्रपति, आंध्र प्रदेश राज्य राज्य द्वारा, प्रत्येक की य क आव यकताओं को ध्यान में रखते हुए ए दोन रा य के व भ न भाग के लोगों राज्य आवश्यकताओं दोनों राज्यों विभिन्न भागों के लिए लोक नियोजन के विषय में और श के विषय में सा यापू ण अवसर और शिक्षा साम्यापूर्ण अवसरों सु वधाओं का उपबंध कर सकेगा और दोनों रा य के व भ न भाग के लिए भ न- भ न सुविधाओं राज्यों विभिन्न भागों भिन्न-भिन्न उपबंध किए जा सकगे । पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, स्थान पर त था पत । संविधान (सत्ताईसवां 2. सं वधान (स ताईसवां संशोधन) अधिनियम, अ ध नयम, 1971 की धारा 5 द॒वारा (15-2-1972 से) अनुच्छेद अनु छे द 371ग अंतःस्थापित अंतः था पत । अनुच्छेद अनुच्छेद संविधान (बत्तीसवां अधिनियम, (1-7-1974 से) अंतः था पत । स्थान पर त था पत । आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, “आंध्र प्रदेश राज्य” की आं दे श पु नगठन अ ध नयम, 2014 क धारा 97 द्वारा (2-6-2014 से) खंड (1) के स्थान पर त था पत । प्रतिस्थापित ।. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, प्रतिस्थापित । ० के पा विशिष्टतया, -
- (2) खंड (1) के अधीन किया गया आदेश, श,
- (क) राज्य सरकार से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह राज्य की सिविल सेवा में पदों के किसी वर्ग या वर्गों का अथवा राज्य के अधीन सिविल पदों के किसी वर्ग या वर्गों का राज्य के भिन्न भागों के लिए भिन्न स्थानीय कारों में गठन करे और ऐसे सिद्धांतों और प्रक्रिया के अनसार जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, ऐसे पदों को धारण करने वाले व्यक्तियाँ का इस प्रकार गठित स्थानीय कारों में आबंटन करे
- (ख) राज्य के ऐसे भाग या भागों को कर सकेगा जो,— विनिर्दिष्ट (i) राज्य सरकार के अधीन किसी स्थानीय काडर में (चाहे उसका गठन इस अनच्छेद द के अधीन आदेश श के अनुसरण मैं या अन्यथा किया गया है) पदों के लिए सीधी के लिए! (पं) राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन किसी भर्ती काडर में पदों के लिए सीधी के लिए; और (एप) राज्य के भीतर किसी विश्वविद्यालय मैं या राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन किसी अन्य संस्था में प्रवेश के प्रयोजन के लिए, भर्ती स्थानीय समझे जाएंगे
- (ग) वह विस्तार कर सकेगा जिस तक, वह रीति कर सकेगा जिससे और वे कर सकेगा जिनके अधीन, ऐसे शिक्षा काडर, विश्वविद्यालय या अन्य संस्था के संबंध में ऐसे को, आदेश में के लिए स्थानीय में निवास या क्षेत्र अध्ययन किया है— (i) उपखंड (ख) में ऐसे काडर मैं जो इस आदेश में विनिर्दिष्ट विनिर्दिष्ट जाए, पदों के लिए सीधी के विषय में; शर्तें विनिर्दिष्ट यथास्थिति, (ए) उपखंड (ख) में ऐसे विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा अभ्यर्थियों संस्था में जो इस आदेश मैं जाए, प्रवेश के विषय जिन्होंने विनिर्दिष्ट किसी अवधि क्षेत्र में, अधिमान दिया जाएगा या उनके लिए किया जाएगा ।
- (3) आदे श द्वारा, आंध्र प्रदेश श राज्य के लिए और तेलंगाना राज्य के निर्दिष्ट निमित्त लिए एक प्रशासनिक अधिकरण के गठन के लिए उपबंध कर सकेगा जो अधिकरण विनिर्दिष्ट किया भर्ती विषयों की बाबत ऐसी अधिकारिता, शक्ति और प्राधिकार का जिसके अंतर्गत वह अधिकारिता, शक्ति या प्राधिकार है जो संविधान संशोधन) निर्दिष्ट शिक्षा अधिनियम, 1973 के प्रारंभ भ से ठीक पहले (उच्चतम न्यायालय से भिन्न) किसी निमित्त विनिर्दिष्ट की न्यायालय दृवारा अथवा किसी अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य था प्रयोग करेगा गा जो आदेश में जाए, अथार्त ्:— आरक्षण राष्ट्रपति, आदेश दूवारा, लिए” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । निम्नलिखित (बत्तीसवां विनिर्दिष्ट किया अर्थात्:--. पुनर्गठन अधिनियम, वर्गों (क) राज्य की सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या के पदों पर अथवा राज्य वर्गों के अधीन ऐसे वर्ग या के सिविल पदों पर अथवा राज्य के भीतर किसी वर्गों स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण के अधीन ऐसे वर्ग या के पदों पर जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए नियुक्ति, जाएं, आबंटन या प्रोन्नति
- (ख) राज्य की सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर अथवा राज्य के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के सिविल पदों पर अथवा राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर जो आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, नियुक्त, आबंटित त, या प्रोन््नत व्यक्तियों की ज्येष्ठता
- (ग) राज्य की सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या के पदों पर अथवा राज्य वर्गों के अधीन ऐसे वर्ग या के सिविल पदों पर अथवा राज्य के भीतर किसी वर्गों स्थानीय प्राधिकारी के नियंत्रण के अधीन ऐसे वर्ग या के पदों पर नियुक्त, वर्गों आबंटित या प्रोन््नत की सेवा की ऐसी अन्य जो आदेश में व्यक्तियों शर्तें जाएं । विनिर्दिष्ट की (4) खंड (3) के अधीन किया गया आदेश-- श—
- (क) प्रशासनिक अधिकरण को उसकी अधिकारिता के भीतर किसी विषय से संबंधित व्यथाओं के निवारण के लिए ऐसे अभ्यावेदन प्राप्त करने के लिए, जो राष्ट्रपति आदेश में करे और उस पर ऐसे आदेश श करने के लिए जो वह प्रशासनिक अधिकरण ठीक समझता है, प्राधिकृत कर सकेगा
- (ख) प्रशासनिक अधिकरण की और प्राधिकारों और प्रक्रिया के विनिर्दिष्ट संबंध में ऐसे उपबंध (जिनके अंतर्गत प्रशासनिक अधिकरण की अपने अवमान के लिए दंड ड की ने शिक्त के संबंध में उपबंध हैं) कर सकेगा जो राष्ट्रपति आवश्यक समझे; शक्तियों (ग) प्रशासनिक अधिकरण को उसकी अधिकारिता के भीतर आने वाले विषयों से संबंधित और उस आदेश श के प्रारंभ भ से ठीक पहले (उच्चतम न्यायालय देने शक्ति अंतर्विष्ट से भिन्न) किसी न्यायालय अथवा किसी अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के लंबित के ऐसे के, जो आदेश में जाएं, अंतरण के लिए उपबंध कर सकेगा
- (घ) ऐसे अनुपूरक, आनुष॑ंगिक और पारिणामिक उपबंध (जिनके अंतर्गत फीस के बारे में और परिसीमा, के बारे मैं या तत्समय प्रव समक्ष को किन्हीं अपवादों या उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू करने के लिए उपबंध कार्यवाहियों वर्गों विनिर्दिष्ट किए हैं) कर सकेगा जो राष्ट्रपति आवश्यक समझे । साक्ष्य प्रवृत्त किसी विधि अंतर्विष्ट (5) प्रशासनिक अधिकरण का किसी मामले को अंतिम रूप से निपटाने वाला आदेश, ∗ आदे श, राज्य सरकार दूवारा उसकी पुष्टि किए जाने पर या आदेश किए जाने की तारीख से तीन मास की समाप्ति पर, इनमें से जो भी पहले हो, प्रभावी हो जाएगा: जिसमें विनिर्दिष्ट परंतु तु राज्य सरकार, विशेष आदेश श द्वारा, जो लिखित रूप में किया जाएगा और उसके कारण किए जाएंगे, प्रशासनिक अधिकरण के किसी आदेश श को यथास्थिति, उसके प्रभावी होने के पहले उपांतरित या रदूद कर सकेगी और ऐसे मामले मैं प्रशासनिक अधिकरण का आदेश, श, ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या वह निष्प्रभाव हो जाएगा । परंतुक (6) राज्य सरकार दूवारा खंड (5) के परं तक किए के अधीन किया गया प्रत्येक विशेष समक्ष आदेश, श, जाने के पश्चात ्, यथाशक्य, शीघ्र, राज्य विधान-मंडलर के दोनों सदनों के रखा जाएगा । अधीक्षण (7) राज्य के उच्च न्यायालय को प्रशासनिक अधिकरण पर की शक्ति नहीं होगी और (उच्चतम न्यायालय से भिन्न) कोई न्यायालय अथवा कोई अधिकरण प्रशासनिक अधिकरण की या उसके संबंध में अधिकारिता, शक्ति या प्राधिकार के अधीन किसी विषय की बाबत किसी अधिकारिता, शक्ति या प्राधिकार का प्रयोग नहीं करे गा । यदि (8) राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि प्रशासनिक अधिकरण का निरंतर तर बने रहना आवश्यक नहीं है तो राष्ट्रपति आदेश श द्वारा प्रशासनिक अधिकरण का उत्सादन कर सकेगा और ऐसे उत्सादन से ठीक पहले अधिकरण के समक्ष लंबित मामलों के के अुतरण और निपटारे के लिए ऐसे आदेश में ऐसे उपबंध कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
- (9) न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के किसी निर्णय, डिक्री या किसी आदेश श के होते हुए भी,— ह् किसी व्यक्ति की कोई पदस्थापना, प्रोन्नति या अंतरण की बाबत जो– नियुक्ति, (i) 1 नवंबर, 1956 से पहले यथाविद्यमान हैदराबाद राज्य की सरकार के या उसके भीतर किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन उस तारीख से पहले किसी पद पर किया गया था; या (ii) संशोधन) अधिनियम, 1973 के प्रारंभ भ से पहले आंध्र प्रदेश श राज्य की सरकार के अधीन या उस राज्य के भीतर किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन किसी पद पर किया गया था; और संविधान (बत्तीसवां (ख) उपखंड (क) मैं किसी व्यक्ति द्वारा या उसके की गई किसी कार्रवाई या बात की बाबत, निर्दिष्ट समक्ष ∗ उच्चतम न्यायालय ने पी. और अन्य बनाम आंध्र प्रदेश श राज्य और एक अन्य (1987) 1 एस.एस.सी., 362, अनुच्छेद द 371घ के खंड (5) और उसके परं तुक को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया । । सांबमूर्ति परंतुक नियुक्ति, केवल इस आधार पर कि ऐसे व्यक्ति की पदस्थापना, प्रोन्नति या अंतरण, नियुक्ति, यथास्थिति, ऐसी पदस्थापना, प्रोन्नति या अंतरण की बाबत, हैदराबाद राज्य के अपेक्षा भीतर या आंध्र प्रदेश श राज्य के किसी भाग के भीतर निवास के बारे में किसी का प्रवृत्त विधि उपबंध करने वाली तत्समय प्रव के अनुसार नहीं किया गया था, यह नहीं समझा जाएगा कि वह अवैध या शून्य है या कभी भी अवैध या शून्य रहा था । अनुच्छेद (10) इस अनच् छे द के और राष्ट्रपति दवारा इसके अधीन किए गए किसी आदेश श प्रवृत्त किसी के उपबंध इस संविधान के किसी अन्य उपबंध में या तत्समय अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे । । केंद्रीय विश्वविद्यालय की
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को उनके विशेष उपबंध देता है। राष्ट्रपति आदेश से राज्य भर में सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में समान अवसरों का प्रबंध कर सकते हैं। आदेश पदों और प्रवेशों को मंडलों या स्थानीय क्षेत्रों में बांट सकता है। वह सेवा मामलों के लिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण भी बढ़ा सकता है। यह अनुच्छेद आंध्र प्रदेश पुनर्गठन के लिए बना और अब दोनों राज्यों पर चलता है।