भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]

अनुच्छेद 372क का अनुकूलन करने की राष्ट्रपति की शक्ति

  1. (1) किसी (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ भ से ठीक पहले भारत मैं या उसके किसी प्रवृत्त भाग मैं प्रव के उपबंधों को उस अधिनियम द्वारा यथासंशोधित इस संविधान के उपबंधों के अनुरूप बनाने के प्रयोजनों के लिए, राष्ट्रपति, 1 नवंबर, 1957 से विधियों संविधान पहले किए गए आदेश" श ∗ द्वारा, ऐसी विधि में निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में ऐसे अनुकूलन और उपांतरण कर सकेगा जो आवश्यक या समीचीन हों और यह उपबंध कर प्रवृत्त किसी विधि सकेगा कि वह विधि ऐसी तारीख से जो आदेश में जाए, इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हए प्रभावी होगी और किसी ऐसे अनकूलन दवांरा, या उपांतरण को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
  2. (2) खंड की कोई बात, किसी विधान-मंडल या अन्य प्राधिकारी विनिर्दिष्ट की को, राष्ट्रपति द्वारा उक्त खंड के अधीन अनुकूलित या उपांतरित किसी विधि का निरसन या संशोधन करने से रोकने वाली नहीं समझी जाएगी । सक्षम सक्षम ∗ देखिए 1956 और 1957 के विधि अनुकूलन आदेश । संविधान भारत का संविधान सं वधान 248 24--अस्थायी, संक्रमणकाल्लीन व्यक्तियों

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को पुराने कानून अनुकूलित करने देता है। राष्ट्रपति आदेश से प्रारंभ से पहले के कानूनों को संविधान के अनुरूप अनुकूलित और परिवर्तित कर सकते हैं। यह शक्ति निरसन और लोप को भी ढकती है। आदेश पुरानी कानून पुस्तक को नए ढांचे में फिट करते हैं।

Article 372A in English