भाग 21 · [अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध]
अनुच्छेद 376 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बारे में उपबंध— अनच्छेद (1) अनुच्छे द 217 के
- खंड (2) में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले किसी प्रांत के उच्च न्यायालय के पद धारण करने वाले न्यायाधीश, यदि वे अन्यथा निर्वाचन न कर चुके हों तो, ऐसे प्रारंभ भ पर तत्स्थानी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे और तब ऐसे वेतनों और भत्तों तथा अनपस्थिति छट्टी और पेंशन के संबंध में ऐसे अधिकारों के हकदार होंगे जो ऐसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में अनच्छेद द 221 के अधीन उपबंधित हैं । ऐसा न्यायाधीश इस बात के होते हए भी कि वह भारत का नागरिक नहीं है, ऐसे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति अथवा किसी अन्य उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति या अन्य न्यायाधीश नियुक्त होने का पात्र होगा ।
- (2) इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के तत्स्थानी किसी देशी शी राज्य के उच्च न्यायालय के पद धारण करने वाले न्यायाधीश, यदि वे अन्यथा न कर चके हों तो, ऐसे प्रारंभ भ पर इस प्रकार निर्वाचन राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे और अनच्छेद द 217 के खंड विनिर्दिष्ट (1) और खंड (2) में किसी बात के होते हए भी, किंत तु उस अनच्छेद द के खंड (1) के परं तक के अधीन रहते हुए, ऐसी अवधि की समाप्ति तक पद धारण करते गे जो परंतुक रहेंगे राष्ट्रपति आदेश श द्वारा करे । दूवारा अवधारित (3) इस अनुच्छेद में, “न्यायाधीश” पद के अंतर्गत न्यायाधीश या अपर न्यायाधीश नहीं है । कार्यकारी
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद पुराने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को आगे ले गया। प्रांतीय उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश इस्तीफा या हटाए जाने के अलावा पद पर रहे। उनकी शर्तें प्रारंभ से पहले जैसी थीं, वैसी ही रहीं। नए उच्च न्यायालय पुरानी पीठ के साथ शुरू हुए।