भाग 3
मूल अधिकार
- 12. परिभाषा-इस भाग मैं, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा न हो, “राज्य” के
- 13. मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने विधियां-(|) इस
- 14. विधि के समता–राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के
- 15. धमर्, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध-()
- 16. लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता–(1) राज्य के अधीन किसी पद पर
- 17. यता का यता” का अंत किया जाता है और उसका किसी भी रूप निषिदूध “अस्पृश्यता” निर्योग्यता
- 18. उपाधियों का अंत–(1) राज्य, सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई
- 19. वाक् कुछ अधिकारों का सभी नागरिकों को– वाक्-स्वातंत््य अभिव्यक्ति-स्वातंत्रय
- 20. के लिए दोषसिद्धि के संबंध में कोई व्यक्ति किसी अपराध
- 21. प्राण और दै स्वतंत्रता का व्यक्ति को उसके प्राण या दै
- 21क. का अधिकार-राज्य, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी
- 22. कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से किसी व्यक्ति को जो
- 23. मानव के दुर्व्यापार यार्पार और बलातश्रम का प्रतिषेध-() मानव का दुर्व्यापार यार्पार और बेगार
- 24. में के नियोजन का प्रतिषेध-चौदह वर्ष से कम आयु के
- 25. अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की
- 26. के प्रबंध की स्वतंत्रता–लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के
- 27. धमर् के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता
- 28. कुछ संस्थाओं में या उपासना में उपस्थित होने के
- 29. अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी
- 30. संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का
- 31. का अनिवार्य अर्जन ।]-संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978
- 31क. संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली की व्याव गू()
- 31ख. कुछ अ ध नयम और व नयम का व धमा यकरण–अनु छे द 31क में अधिनियमों विनियमों में शून्य
- 31ग. कुछ नदे शक त व को भावी करने वाली व की क त–अनु छे द 13 सुनिश्चित राज्य नीति प्रभावी वात्री शून्य
- 31घ. [रा विरोधी याकलाप के संबंध में व की क (तैंतानीसवां त।]–सं वधान अधिनियम,
- 32. इस भाग दवारा प्रदत्त द अधिकारों त अ धकार को प्रवर्तित व तत कराने के लिए उपचार–(1) इस भाग
- 32क. [रा य की धय क सां वधा नक वैधता पर अनु छे द 32 के अधीन कायवा में
- 33. इस भाग दवारा द त अ धकार का, बलों, आदि द को लागू होने में, उपांतरण
- 34. जब किसी में सेना विधि प्रव है तब इस भाग द्वारा अधिकारों पर पूर्वगामी उपबंधों में किसी
- 35. इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए विधान