भाग 3 · मूल अधिकार
अनुच्छेद 22 कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से किसी व्यक्ति को जो
- बालकों नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा गिरफ्तार किया गया है, ऐसी गिरफ्तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराए बिना में निरुदूध नहीं रखा जाएगा या अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा । संरक्षण- अभिरक्षा प्रतिरक्षा 1. (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 की धारा 3 द्वारा (18-6-1951 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान अभिरक्षा (2) प्रत्येक व्यक्ति को, जो गिरफ्तार किया गया है और में निरुदूध रखा गया है, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट ट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को समक्ष छोड़कर ऐसी गिरफ्तारी से चौबीस घंटे की अवधि में निकटतम मजिस्ट्रेट ट के पेश किया जाएगा और ऐसे किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट ट के प्राधिकार के बिना उक्त अवधि से अधिक अभिरक्षा अवधि के लिए में निरुदूध नहीं रखा जाएगा ।
- (3) खंड (1) और खंड (2) की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो,—
- (क) तत्समय शत्रु अन्यदे शीय है; या अन्यदेशीय (ख) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन गिरफ्तार या निरुदूध किया गया है । ∗(4) का उपबंध करने वाली कोई विधि किसी व्यक्ति का तीन मास से निवारक निरोध अधिक अवधि के लिए तब तक निरुदूध किया जाना प्राधिकृत नहीं करेगी गी जब तक (क)
- (क) ऐसे से, जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं या न्यायाधीश रहे कि-- हैं या न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए हैं, मिलकर बने सलाहकार बोर्ड ने तीन मास की उक्त अवधि की समाप्ति से पहले यह प्रतिवेदन नहीं दिया है कि उसकी राय व्यक्तियों मैं ऐसे निरोध के लिए पयार्प्त कारण हैं: अर्हित पर्याप्त ∗ संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 3 द्वारा (अधिसूचना की तारीख से, जो कि अधिसूचित नहीं हुई है) खंड (4) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाएगा— निम्नलिखित "(4) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली कोई विधि किसी व्यक्ति का दो मास से अधिक की अवधि के लिए निरुदूध किया जाना प्राधिकृत नहीं करेगी गी जब तक कि समुचित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सिफारिश के अनुसार गठित सलाहकार बोर्ड ने उक्त दो मास की अवधि की समाप्ति से पहले यह प्रतिवेदन नहीं दिया है कि उसकी राय में ऐसे निरोध के लिए पयार्प्त कारण हैं: परंतु तु सलाहकार बोर्ड एक और कम से कम दो अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा और समुचित पर्याप्त उच्च न्यायालय का सेवारत न्यायाधीश होगा और अन्य सदस्य किसी उच्च न्यायालय के सेवारत या न्यायाधीश होंगे: अध्यक्ष अध्यक्ष परंतु तु यह और कि इस खंड की कोई बात किसी व्यक्ति का उस अधिकतम अवधि के लिए निरुदूध किया सेवानिवृत्त जाना प्राधिकृत नहीं करेगी गी जो खंड (7) के उपखंड (क) के अधीन संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा विहित की जाए । खंड में, “समुचित उच्च न्यायालय” से अभिप्रेत है,— (i) भारत सरकार या उस सरकार के अधीनस्थ किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा किए गए निरोध आदेश श के अनुसरण में निरुदूध व्यक्ति की दशा में, दिल्ली संघ राज्यक्षेत्र के लिए उच्च न्यायालय; (ii) (संघ राज्यक्षेत्र से भिन्न) किसी राज्य सरकार द्वारा किए गए निरोध आदेश श के अनुसरण में निरुदूध व्यक्ति की दशा में, उस राज्य के लिए उच्च न्यायालय; और
- व्याख्या।स्पष्टीकरण-इस (iii) संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या ऐसे प्रशासक के अधीनस्थ किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा किए गए निरोध आदेश श के अनुसरण में निरुदूध व्यक्ति की दशा में वह उच्च न्यायालय जो संसद् द्वारा इस बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन किया जाए ।" । किसी निमित्त विनिर्दिष्ट परंतु तु इस उपखंड की कोई बात किसी व्यक्ति का उस अधिकतम अवधि से अधिक अवधि के लिए निरुदूध किया जाना प्राधिकृत नहीं करेगी गी जो खंड (7) के उपखंड (ख) के अधीन संसद् दूवारा बनाई गई विधि द्वारा विहित की गई है; या (ख) ऐसे व्यक्ति को खंड (7) के उपखंड (क) और उपखंड (ख) के अधीन संसद निवारक निरोध वात्ली दूवारा बनाई गई विधि के उपबंधों के अनुसार निरुदूध नहीं किया जाता है ।
- (5) का उपबंध करने किसी विधि के अधीन किए गए आदेश श के किन आधारों अनुसरण में जब किसी व्यक्ति को निरुदूध किया जाता है तब आदेश श करने वाला प्राधिकारी यथाशक्य शीघ्र उस व्यक्ति को यह संसूचित करेगा कि वह आदेश श पर किया गया है और उस आदेश श के विरुदूध अभ्यावेदन करने के लिए उसे शीघ्रातिशीघ्र अवसर दे गा । निर्दिष्ट जिन्हें (6) खंड (5) की किसी बात से ऐसा आदेश, श, जो उस खंड में ष्ट है, करने वाले प्राधिकारी के लिए ऐसे तथ्यों को प्रकट करना आवश्यक नहीं होगा प्रकट करना ऐसा प्राधिकारी लोकहित के विरुदूध समझता है । कि--
- (7) संसद् विधि दूवारा विहित कर सकेगी *(क) किन परिस्थितियों वर्गों * वाल्ली (क) के अधीन और किस वर्ग या के मामलों में किसी व्यक्ति को निवारक निरोध का उपबंध करने किसी विधि के अधीन तीन मास से अधिक अवधि के लिए खंड (4) के उपखंड (क) के उपबंधों के अनुसार सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना निरुदूध किया जा सकेगा; वर्गों ल्रिए ∗∗ वात्ली (ख) किसी वर्ग या के मामलों में कितनी अधिकतम अवधि के किसी व्यक्ति को निवारक निरोध का उपबंध करने किसी विधि के अधीन निरुदूध किया जा सकेगा; और ∗∗∗ (ग) ∗∗∗∗ खंड (4) के उपखंड (क) के अधीन की जाने वाली जांच में संविधान (चवालीसवां सलाहकार बोर्ड दवारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया कया होगी । संविधान (चवाल्लीसवां पुनःअक्षांकित संविधान (चवालीसवां * पुनःअक्षांकित संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 3(ख)(i) द्वारा (अधिसूचना की तारीख से) उपखंड (क) संविधान (चवाललीसवां का लोप किया गया । ∗∗ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 3(ख)(ii) द्वारा (अधिसूचना की तारीख से) उपखंड (ख) को उपखंड (क) के रूप में किया जाएगा । ∗∗∗ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 3(ख)(iii) द्वारा (अधिसूचना की तारीख से) उपखंड (ग) को उपखंड (ख) के रूप में किया जाएगा । ∗∗∗∗ संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 3(ख)(iii) द्वारा (अधिसूचना की तारीख से) “खंड (4) के उपखंड (क)” के रूप में “खंड (4)” प्रतिस्थापित । । शोषण के विरुदूध अधिकार
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद गिरफ्तार व्यक्तियों की रक्षा करता है। गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी है। व्यक्ति अपनी पसंद के वकील से मिल सकता है, और चौबीस घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना चाहिए। निवारक निरोध की अनुमति है, पर केवल उचित प्रक्रिया, सलाहकार बोर्ड और कानून में तय समय सीमा के साथ।