भाग 3 · मूल अधिकार

अनुच्छेद 31घ [रा विरोधी याकलाप के संबंध में व की क (तैंतानीसवां त।]–सं वधान अधिनियम,

यह अनुच्छेद अब संविधान का भाग नहीं है। यह ऐतिहासिक अभिलेख के लिए यहाँ है।

  1. (तताल सवां संशोधन) अ ध नयम, 1977 की धारा 2 द्वारा (13-4-1978 से) लोप किया गया । संविधान अधिनियम, (भूतलक्षी प्रभाव अंतःस्थापित संविधान (बयालीसवां अधिनियम, “अनुच्छेद खंड (ग) में व न द ट स ” के स्थान पर त था पत । धारा 4 को उ चतम यायालय वारा, मनवा लि0 स विनिर्दिष्ट सिद्धांतों” प्रतिस्थापित उच्चतम न्यायालय दूवारा, मिनर्वा मिल्‍स ल0 और अ य बनाम भारत संघ और अ य ए.आई.आर. 1980 एस0सी0 1789 में अ व धमा य घो षत कर दिया अन्य अन्य अविधिमान्य घोषित गया । या अनु छे द 31” के स्थान पर त था पत । संविधान (चवालीसवां अधिनियम, “अनुच्छेद अनुच्छेद 6. उ चतम यायालय ने, केशवानंद भारती बनाम केरल रा य ए.आई.आर. 1973 एस0सी0 1461 में इटै में म अनुच्छेद प्रतिस्थापित लखे गए श द को न भावी कर दिया है । उच्चतम न्यायालय राज्य इटैलिक लिखे शब्दों निष्प्रभावी संविधान (बयाल्लीसवां अधिनियम, अंतःस्थापित । फ््थ भारत का संविधान सं वधान 19 अधिकारी) सांविधानिक उपचारों अधिकार सां वधा नक उपचार का अ धकार

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद बयालीसवां संशोधन द्वारा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जुड़े कानूनों को बचाने के लिए जोड़ा गया था। यह कभी लागू ही नहीं हुआ। संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1977 ने इसे लोप कर दिया। आज संविधान में ऐसा कोई अनुच्छेद नहीं है।

Article 31D in English