भाग 3 · मूल अधिकार
अनुच्छेद 31ग कुछ नदे शक त व को भावी करने वाली व की क त–अनु छे द 13 सुनिश्चित राज्य नीति प्रभावी वात्री शून्य
- में किसी बात के होते हुए ए भी, कोई व ध, जो भाग 4 में अ धक थत सभी या क ह ं त व नहीं अनुच्छेद अनुच्छेद प्रदत्त अधिकारों को सु नि चत करने के लिए रा की क नी त को भावी करने वाल है, इस आधार पर शू य छीनती न्यून विधि, जिसमें नह ं समझी जाएगी कि वह अनु छे द 14 या अनु छे द 19 द्वारा द त में धकार म से प्रभावी प्रश्नगत किसी से असंगत है या उसे छ नती है या यू न करती है और कोई व ध, यह घोषणा प्रभावी है कि वह ऐसी नीति त को भावी करने के लिए है, किसी न्यायालय में इस आधार पर नगत नहीं की क जाएगी कि वह ऐसी नीति त को भावी नहीं ं करती है: विधि किसी राज्य परंतु तु जहां ऐसी व ध कसी रा य के विधान-मंडल द्वारा बनाई जाती है वहां इस अनुच्छेद विधि होंगे विधि अनु छे द के उपबंध उस व ध को तब तक लागू नहीं ं ह गे जब तक ऐसी व ध को, जो राष्ट्रपति आरक्षित अनुमति प्राप्त नहीं रा प त के विचार के लिए आर त रखी गई है, उसकी अनु म त त नह ं हो गई है । राष्ट्र क्रियाकलाप विधियों व्यावृत्ति। -संविधान
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद कुछ नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाले कानूनों को ढाल देता है। ये तत्व संसाधनों के बंटवारे और धन के अंतर को कम करने से जुड़े हैं। ऐसे कानून अनुच्छेद 14 और 19 के तहत दरकिनार नहीं किए जा सकते। 1973 से यह ढाल उन कानूनों को नहीं बचाती जो मूल ढांचा तोड़ते हैं।