भाग 3 · मूल अधिकार

अनुच्छेद 31ख कुछ अ ध नयम और व नयम का व धमा यकरण–अनु छे द 31क में अधिनियमों विनियमों में शून्य

  1. अंत व की उपबंध क यापकता पर तकूल भाव डाले बिना, नरवीं अनु में ची म व न द ट शून्य हुआ अधिनियम, विनियम किन्‍्हीं अ ध नयम और व नयम म से और उनके उपबंधों में से कोई इस आधार पर शू य या कभी उपबंधों द्वारा प्रदत्त अधिकारों छीनता न्यून शू य नहीं आ नह ं समझा जाएगा कि वह अ ध नयम, व नयम या उपबंध इस भाग के क ह ं अधिकरण प्रतिकूल निर्णय, डिक्री उपबंध वारा में त अ धकार म से किसी से असंगत है या उसे छ नता है या यू न करता है उक्त अधिनियमों विनियमों में प्रत्येक, निरसित संशोधित और किसी न्यायालय या अ धकरण के किसी तकूल नणय, ड या आदेश श के होते हुए ए भी, सक्षम विधान-मंडल की शक्ति प्रवृत्त उ त अ ध नयम और व नयम म से ये क, उसे नर सत या संशो धत करने की किसी स म वधान-मंडल क शि त के अधीन रहते हुए; ए, वृ त बना रहेगा गा । शू34ग. निदेशक तत्त्वों प्रभावी विधियों व्यावृत्ति-अनुच्छेद 3 विधि, अधिकथित किन्हीं तत्त्वों

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद नौवीं अनुसूची में रखे कानूनों को मूल अधिकारों की चुनौती से बचाता है। उस अनुसूची में जोड़े गए कानून भाग 3 से टकराने पर भी सुरक्षित रहते हैं। 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 1973 के बाद जोड़े गए कानून मूल ढांचे की जांच से बच नहीं सकते।

Article 31B in English