भाग 3 · मूल अधिकार
अनुच्छेद 33 इस भाग दवारा द त अ धकार का, बलों, आदि द को लागू होने में, उपांतरण
- करने की संस की शि त–संस, व ध वारा, अवधारण कर सकेगी कि इस भाग द्वारा द त में धकार म से कोई,— प्रदत्त अधिकारों (क) सश बलों के सद य को; या संसद्ू शक्ति-संसद्, विधि द्वारा,
- (ख) लोक यव था बनाए रखने का भारसाधन करने वाले बलों के सद य को; या प्रदत्त अधिकारों (ग) आसू चना या त आसू चना के योजन के लिए रा य वारा था पत कसी यू रो या अ य संगठन में यि तय को; या सशस्त्र सदस्यों (घ) खंड (क) से खंड (ग) में न द ट कसी बल, यू रो या संगठन के योजन व्यवस्था सदस्यों के लिए था पत दूरसंचार णाल में या उसके संबंध में यि तय को, आसूचना प्रति आसूचना प्रयोजनों राज्य द्वारा स्थापित लागू होने में, किस व तार तक नबि धत या निराकृत त कया जाए जिससे उनके कत य का किसी ब्यूरो अन्य नियोजित व्यक्तियों उ चत पालन और उनमें अनु शासन बना रहना सु नि चत रहे । निर्दिष्ट किसी ब्यूरो प्रयोजनों स्थापित प्रणाली नियोजित व्यक्तियों विस्तार निर्बन्धित किया कर्तव्यों संविधान (बयाल्लीसवां अधिनियम, अंतःस्थापित । त था पत । संविधान अधिनियम, अनुच्छेद प्रतिस्थापित । क्षेत्र प्रवृत्त प्रदत्त
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संसद को सेना, पुलिस और गुप्तचर सेवाओं के सदस्यों के मूल अधिकारों पर सीमा या रोक लगाने की शक्ति देता है। ये सीमाएं अनुशासन और कर्तव्य के लिए जरूरी हैं। इसीलिए सेवा के नियमों में इन कर्मियों की भाषण और संगठन की स्वतंत्रताएं सीमित होती हैं।