भाग 3 · मूल अधिकार
अनुच्छेद 20 के लिए दोषसिद्धि के संबंध में कोई व्यक्ति किसी अपराध
- अपराधों संरक्षण- के लिए तब तक सिद्धदोष नहीं ठहराया जाएगा, जब तक कि उसने ऐसा कोई कार्य करने के समय, जो अपराध के रूप में आरोपित है, किसी प्रव का अतिक्रमण नहीं किया है या प्रवृत्त विधि उससे अधिक शास्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध के किए जाने के समय प्रव प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित की जा सकती थी ।
- (2) व्यिक्त को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक और दं जाएगा । किसी व्यक्ति अभियोजित (3) अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुदूध होने दंडित नहीं किया के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद आपराधिक मामलों में तीन सुरक्षा देता है। जो कानून काम में नहीं था, उसके तहत दंड नहीं हो सकता। एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमा और दंड नहीं हो सकता। और किसी को अपने खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ये सुरक्षाएं नागरिक और विदेशी, सबको मिलती हैं।