भाग 3 · मूल अधिकार
अनुच्छेद 32 इस भाग दवारा प्रदत्त द अधिकारों त अ धकार को प्रवर्तित व तत कराने के लिए उपचार–(1) इस भाग
- दूवारा प्रदत्त द अधिकारों त अ धकार को प्रवर्तित व तत कराने के लिए समुचित समु कार्यवाहियों चत द्वारा कायवा उच्चतम हय वारा में चतम न्यायालय समावेदन यायालय म समावे दन करने का अधिकार अ प्रत्याभूत धकार किया याभू त कया जाता है ।
- (2) इस भाग वारा द त में धकार म से किसी को व तत कराने के लिए उ चतम प्रदत्त अधिकारों प्रवर्तित उच्चतम यायालय को ऐसे निदेश श या आदेश श या रिट, जिनके अंतर्गत बंदी य परमादे श, न्यायालय प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, तषे ध, अ धकार-पृ छा और उ हैं, रट ह, जो भी समु चत हो, निकालने की शि त होगी । प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा उत्प्रेषण रिट समुचित शक्ति (3) उ चतम यायालय को खंड (1) और खंड (2) द्वारा द त शि तय पर तकूल भाव डाले बिना, संसद, उ चतम यायालय वारा खंड (2) के अधीन यो त य क ह ं या उच्चतम न्यायालय प्रदत्त शक्तियों प्रतिकूल सभी शि तय का किसी अ य यायालय को अपनी अ की रता क थानीय सीमाओं के प्रभाव उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य किन्हीं भीतर योग करने के लिए व ध वारा सश त कर सकेगी । शक्तियों अन्य न्यायालय अधिकारिता स्थानीय (4) इस सं वधान वारा अ यथा उपबं धत के सिवाय, इस अनु छे द वारा याभू त प्रयोग विधि द्वारा सशक्त अ धकार नलं बत नह ं कया जाएगा । संविधान द्वारा अन्यथा उपबंधित अनुच्छेद द्वारा प्रत्याभूत
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद इस भाग के हर अधिकार को लागू कराने का अधिकार है। जिसके अधिकार भंग हों, वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है। न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण और परमादेश जैसी रिट जारी कर सकता है। यह उपचार खुद एक मूल अधिकार है। आपातकाल में संविधान की अनुमति के अलावा इसे रोका नहीं जा सकता।