भाग 3 · मूल अधिकार

अनुच्छेद 31क संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली की व्याव गू()

  1. 5 निर्वापन परिवर्तन में अनुच्छे द 13 बात के होते हुए भी,— संपत्ति संपत्ति (क) किसी संपदा के या उसमें किन्हीं अधिकारों के राज्य द्वारा अर्जन के लिए उद्देश्य या किन्हीं ऐसे अधिकारों के या उनमें के लिए; या (ख) किसी का प्रबंध लोकहित में या उस का उचित प्रबंध सुनिश्चित उद्देश्य करने के उद्दे श्य से परिसीमित अवधि के लिए राज्य द्वारा ले लिए जाने के लिए; या अभिकर्ताओं, कोषाध्यक्षों, निदेशकों,
  2. (ग) दो या अधिक निगमों को लोकहित में या उन निगमों में से किसी का निदेशकों उचित प्रबंध सुनिश्चित करने के उद्दे श्य से समामेलित करने के लिए; या निर्वापन परिवर्तन (घ) निगमों के प्रबंध सचिवों और प्रबंध या प्रबंधकों के किन्हीं अधिकारों या उनके शेयरधारकों के मत देने ने के किन्हीं अधिकारों के या उनमें के लिए; या "संपत्ति भ. संविधान (चवालबीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 4 दूवारा (20-6-1979 से) अंतःस्थापित । अधिकार" का लोप किया गया । संविधान (बयाल्लीसवां संविधान 4. (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 की धारा 4 द्वारा (भूतलक्षी प्रभाव से) अंतःस्थापित । । संविधान (भूतलक्षी प्रतिस्थापित । भारत का संविधान प7 (ड) किसी खनिज या खनिज तेल की खोज करने या उसे प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए किसी करार, पट्टे या अनुज्ञप्ति के आधार पर प्रोदूभूत होने वाले किन्हीं अधिकारों के निर्वापन या उनमें परिवर्तन के लिए या किसी ऐसे करार, पट्टे या अनुज्ञप्ति को समय से पहले समाप्त करने या रद्द करने के लिए, उपबंध करने वाली विधि इस आधार पर शून्य नहीं समझी जाएगी कि वह अनुच्छेद द 14 या अनुच्छेद द 19 द्वारा अधिकारों में से किसी से असंगत है या उसे छीनती है या न्यून करती प्रदत्त है: परंत तु जहां ऐसी विधि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि है वहां इस अनच्छेद द के उपबंध उस विधि को तब तक लाग नहीं होंगे जब तक ऐसी विधि को, जो राष्ट्रपति के विचार के लिए रखी गई है, उसकी अनमति प्राप्त नहीं हो गई है: आरक्षित परं तु यह और कि जहां किसी विधि में किसी संपदा के राज्य द्वारा अर्जन के लिए कोई उपबंध किया गया है और जहां उसमें समाविष्ट कोई भूमि किसी व्यक्ति की अपनी जोत परंतु में है वहां राज्य के लिए ऐसी भूमि के ऐसे भाग को, जो किसी तत्समय प्रव के अधीन उसको लागू अधिकतम सीमा के भीतर है, या उस पर या उससे अनुलग्न किसी भवन प्रवत्त विधि या संरचना को अिजर्त करना उस दशा के सिवाय नहीं होगा जिस दशा में ऐसी भूमि, भवन या संरचना के अर्जन से संबंधित विधि उस दर से प्रतिकर के संदाय के लिए उपबंध निर्मित करती है जो उसके बाजार-मूल्य से कम नहीं होगी । अर्जित विधिपूर्ण (2) इस अनुच्छेद मैं,--
  3. (क) “संपदा” पद का किसी स्थानीय के संबंध में वही अर्थ है जो उस शु(क) क्षेत्र पद का या उसके समतुल्य स्थानीय पद का उस में प्रव से संबंधित विद्यमान विधि में है और इसके अंतर्गत--) क्षेत्र प्रवृत्त भू-धृतियों (i) कोई जागीर, इनाम या मूआफी अथवा वैसा ही अन्य अनुदान और तमिलनाड़ और केरल राज्यों में कोई जन्मम ् भी होगा; अधिकार (ii) रै यतबाड़ी बंदोबस्त के अधीन धृत कोई भूमि भी होगी; (iii) कृषि के प्रयोजनों के लिए या उसके सहायक प्रयोजनों के लिए धृत रैयतबाड़ी या पट्टे पर दी गई कोई भूमि भी होगी, जिसके अंतर्गत बंजर भूमि, वन भमि: चरागाह या भूमि के कृषकों, कषि श्रमिकों और ग्रामीण कारीगरों के अधिभोग में भवनों और अन्य संरचनाओं के स्थल हैं; भ. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 7 द्वारा (20-6-1979 से) “अनुच्छेद द 14, अनुच्छेद द 19 या अनुच्छेद द 31” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । प्रतिस्थापित । संविधान स्थान पर प्रतिस्थापित । ८० संविधान (भूतलक्षी परिवर्तन) ० दि भारत का संविधान सं वधान 18 अधिकारी) “अधिकार” स्वत्वधारी,
  4. (ख) “अ धकार” पद के अंतर्गत, किसी संपदा के संबंध में, किसी व उप-स्वत्वधारी, वधार, स्वत्वधारी, भू-धृतिधारक, ' रैयत, अन्य मध्यवर्ती उप- व वधार, अवर व वधार, भू-धृ तधारक, रै यत, अवर रैयत यत या अ य में निहित यवत अधिकार भू-राजस्व अधिकार विशेषाधिकार म न हत कोई अ धकार और भू-राज व के संबंध में कोई अ धकार या वशेषा होंगे । धकार शू3ख. ह गे । अधिनियमों विनियमों विधिमान्यकरण-अनुच्छेद 2 अंतर्विष्ट उपबंधों व्यापकता प्रतिकूल प्रभाव अनुसूची विनिर्दिष्ट

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद कुछ कानूनों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती से बचाता है। इसमें जागीरों के अर्जन और ऐसे संपत्ति सुधारों के कानून आते हैं। भूमि सुधार के कानूनों पर केवल इसलिए हमला नहीं हो सकता कि वे संपत्ति का अधिकार सीमित करते हैं। अदालतों ने बाद में इस बचाव को मूल ढांचे के अधीन माना है।

Article 31A in English