भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 267 आकिस्मकता (1) संसद्, द्वारा, अग्रदाय के स्वरूप की एक

  1. आकस्मिकता निधि की स्थापना कर सकेगी जो “भारत की आकस्मिकता निधि” के नाम विनियोजित से होगी ऐसी विधि दूवारा अवधारित राशियां समय-समय पर जमा की जाएंगी और व्यय का अनुच्छेद द 115 या अनुच्छेद द 116 के अधीन संसद् द्वारा, आकस्मिकता निधि संसद, विधि द्वारा, जाना लंबित रहने तक ऐसी निधि में से ऐसे व्यय की के लिए अग्मि धन देने ने के लिए राष्ट्रपति को समर्थ बनाने के लिए उक्त निधि राष्ट्रपति के ज्ञात जिसमें व्ययनाधीन रखी जाएगी । अनवेक्षित दूवारा, विधि प्राधिकृत किया पूर्ति स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान 152 2--वित्त, संपत्ति,
  2. (2) राज्य का विधान-मंडल, विधि दूवारा, अग्रदाय के स्वरूप की एक आकस्मिकता ज्ञात निधि की स्थापना कर सकेगा जो “राज्य की आकस्मिकता निधि” के नाम से होगी जिसमें ऐसी विधि दूवारा अवधारित राशियां समय-समय पर जमा की जाएंगी और अनवेक्षित व्यय का अनुच्छेद द 205 या अनुच्छेद द 206 के अधीन राज्य के विधान-मंडल दूवारा, विधि प्राधिकृत किया द्वारा, द्वारा, जाना लंबित रहने तक ऐसी निधि मैं से ऐसे व्यय की पूर्ति के लिए अग्रिम धन देने ने के लिए राज्यपाल को समर्थ बनाने के लिए उक्त निधि राज्य के राज्यपाल 1*** के व्ययनाधीन रखी जाएगी । संघ और राज्यों के बीच राजस्वों का वितरण

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद आकस्मिकता निधियां बनाता है। संसद भारत की आकस्मिकता निधि बना सकती है। हर राज्य अपनी बना सकता है। निधि वित्त सचिव या कोई अधिकारी रखता है, अप्रत्याशित खर्च के लिए। इससे किया खर्च बाद में कानून से, नियमित बजट प्रक्रिया से, वैध किया जाता है। यह सार्वजनिक खर्च में आपातकाल का गद्दा है।

Article 267 in English