भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 295 अ य दशाओं में संपि त, आि तय, अ धकार, दा य व और बा यताओं का

  1. उत्तराधिकार उ तरा धकार—
  2. (1) इस संविधान सं वधान के प्रारंभ भ से ही --
  3. (क) जो संपत्ति संपि त और आस्तियां आि तयां ऐसे प्रारंभ भ से ठीक क पहले पहली अनुसूची अनु सू ची के भाग ख में विनिर्दिष्ट व राज्य न द ट रा य के तत्स्थानी त किसी थानी देशी कसी राज्य दे में निहित रा य म न हत थीं, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए; ए, जो भारत सरकार इस निमित्त न म त उस राज्य रा की क सरकार से करे, संघ में निहित न होंगी हत यदि ह गी य द वे प्रयोजन योजन जिनके लिए ऐसे प्रारंभ भ से ठीक क पहले ऐसी संपत्ति संपि त और आस्तियां आि धारित तयां धा रत थीं, तत्पश्चात् त प चात ् संघ सूची मैं म प्रगणित किसी ग विषय णत कसी वषय से संबंधित संबं धत संघ के प्रयोजन योजन हों; और
  4. (ख) जो अधिकार, अ दायित्व धकार, दा य व और बाध्यताएं बा पहली यताएं अनुसूची पहल अनु सू ची के भाग ख में विनिर्दिष्ट व राज्य न द ट रा य के तत्स्थानी त किसी थानी देशी कसी राज्य दे की रा य क सरकार की थीं, चाहे वे किसी संविदा सं वदा से या अन्यथा अ उद्धृत यथा हुई उ हों, त हु ई ह, वे सभी ऐसे करार के अधीन रहते हुए; ए, जो भारत सरकार इस निमित्त न म त उस राज्य रा की क सरकार से करे, भारत सरकार के अधिकार, अ दायित्व धकार, दा य व और बाध्यताएं बा होंगी यताएं यदि ह गी य द वे प्रयोजन, योजन, जिनके लिए ऐसे प्रारंभ भ से ठीक क पहले ऐसे अधिकार अ अर्जित धकार किए अिजत कए गए थे अथवा ऐसे दायित्व दा य व या बाध्यताएं बा यताएं उपगत की गई थीं, तत्पश्चात् त प चात ् संघ सूची में प्रगणित म किसी ग विषय णत कसी वषय से संबंधित संबं धत भारत सरकार के प्रयोजन योजन ह ।
  5. (2) जैसा ऊपर कहा गया है उसके अधीन रहते हुए, पहली ए, अनुसूची पहल अनु सू ची के भाग ख मैं विनिर्दिष्ट वनद प्रत्येक ट राज्य येक की य क सरकार, उन सभी संपत्ति संपि त और आस्तियों आि तय तथा उन सभी अधिकारों, अ दायित्वों धकार, दा य व और बाध्यताओं बा यताओं के संबंध में, चाहे वे किसी संविदा सं वदा से या अन्यथा अ यथा उद्धृत हुई उ हों, त हु ई ह, जो खंड में निर्दिष्ट (1) म न द ट से भिन्न भ हैं, ह, इस संविधान सं वधान के प्रारंभ भ से ही तत्स्थानी त देशी थानी राज्य दे की रा य क सरकार की उत्तराधिकारी उ तरा धकार होगी ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद बाकी उत्तराधिकार जारी रखता है। प्रारंभ से पहले किसी भारतीय राज्य की संपत्ति संविधान के तहत नए राज्य को गई। जहां कोई उत्तराधिकारी नहीं, वहां संघ को। दायित्व संपत्ति के साथ उन्हीं हाथों में जाते हैं। कुछ भी बीच में नहीं गिरता।

Article 295 in English