भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 300 वाद और कार्यवाहियां (1) भारत सरकार भारत संघ के नाम से वाद ला

  1. सकेगी या उस पर वाद लाया जा सकेगा और किसी राज्य की सरकार उस राज्य के नाम से वाद ला सकेगी या उस पर वाद लाया जा सकेगा और ऐसे उपबंधों के अधीन रहते हुए, जो इस संविधान द्वारा के आधार पर संसद् के या ऐसे रौज्य के विधान-मंडल के अधिनियम द्वारा किए जाएं, वे अपने-अपने कार्यकलाप के प्रदत्त शक्तियों अधिनियमित संबंध में उसी प्रकार वाद ला सकेंगे या उन पर उसी प्रकार वाद लाया जा सकेगा जिस प्रकार, यदि यह संविधान नहीं किया गया होता तो, भारत डोमिनियन और तत्स्थानी प्रांत या तत्स्थानी देशी शी राज्य वाद ला सकते थे या उन पर वाद लाया जा अधिनियमित सकता था ।
  2. (2) इस संविधान के प्रारंभ भ पर—
  3. (क) कोई ऐसी विधिक कार्यवाहियां लंबित हैं भारत डोमिनियन एक है तो उन में उस डोमिनियन के स्थान पर भारत संघ यदि -- प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा; और
  4. (ख) कोई ऐसी विधिक कार्यवाहियां लंबित हैं कोई प्रांत या कोई जिनमें देशी शी राज्य एक है तो उन में उस प्रांत या देशी शी राज्य के पक्षकार कार्यवाहियों स्थान पर तत्स्थानी राज्य प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा । अध्याय 4– का अधिकार जिनमें

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद अदालत में सरकारों का नाम बताता है। भारत सरकार भारत संघ के नाम से मुकदमा चलाती और उसका सामना करती है। राज्य सरकार अपने राज्य के नाम से। पुरानी डोमिनियन देयता नए सार्वजनिक हाथों में चलती रहती है।

Article 300 in English