भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
अनुच्छेद 282 संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से किए जाने वाले व्यय— संघ या
- -- राज्य किसी लोक प्रयोजन के लिए कोई अनुदान इस बात के होते हुए भी दे सकेगा कि वह प्रयोजन ऐसा नहीं है जिसके संबंध में, संसद् या उस राज्य का विधान- यथास्थिति, मंडल विधि बना सकता है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद प्रयोजन अनुदानों की अनुमति देता है। संघ या राज्य किसी भी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है। प्रयोजन उसके अपने कानून बनाने के क्षेत्र में हो, यह जरूरी नहीं। यह सबसे व्यापक खर्च शक्ति है। इसमें वित्त आयोग के सूत्र से आगे के विवेकाधीन अनुदान आते हैं।