भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
अनुच्छेद 290क कछ दे वस्वम ् को संदाय— प्रत्येक वर्ष लाख
- पचास हजार रुपए की राशि केरल राज्य की संचित निधि पर भारित की जाएगी और उस न्यायमर्ति निधि में से तिरुवांकर दे वस्वम ् को की जाएगी और प्रत्येक वर्ष तेरह लाख पचास हजार रुपए की राशि. राज्य की संचित निधि पर भारित की जाएगी और उस निधि में से 1 नवंबर, 1956 को उस राज्य को तिरुवांकर-कोचीन राज्य से अंतरित के हिंदू और पवित्र स्थानों के के लिए उस राज्य में देवस्वम् निधियों वार्षिक -- छियाललीस स्थापित दे वस्वम ् को की जाएगी । देवस्वम् निधि संदत्त _ थृतमिलनाइ 1. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 19 द्वारा (1-11-1956 से) अंतःस्थापित । राज्यक्षेत्रों मंदिरों अनुरक्षण स्थान पर प्रतिस्थापित । । देवस्वम् निधि संदत्त संविधान परिवर्तन) 2--वित्त, संपत्ति, थैल्ली ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद देवस्व निधियों का उपबंध रखता है। केरल की संचित निधि पर मंदिरों की देवस्व निधियों के लिए तय वार्षिक राशि अधिरोपित है। तमिलनाडु के लिए भी ऐसा ही प्रभार है। ये भुगतान संविधान के तय किए अनुसार मंदिर निधियों को सहारा देते हैं।