भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 286 माल के क्रय य या विक्रय व य पर कर के अधिरोपण अ धरोपण के बारे में निर्बधन नबधन— (1)

  1. राज्य रा की क कोई विधि, व मात्र ध, माल के या सेवाओं से वाओं के या दोनों के प्रदाय दाय पर, जहां ऐसा प्रदाय - दाय –
  2. (क) राज्य रा य के बाहर; या (ख) भारत के राज्यक्षेत्र रा मैं शूमाल म माल के या सेवाओं से वाओं के या दोनों के आयात अथवा माल के या सेवाओं से वाओं के या दोनों के बाहर निर्यात नयात के दौरान, होता है वहां, कोई कर अधिरोपित अ नहीं धरो करेगी पत नह ं करे गी या अधिरोपित अ धरो पत करना प्राधिकृत नहीं धकृ त नह ं करे गी । संसद, 3 अवधारित सेवाओं * * * * प्रदाय वर्णित रीतियों रीति विधि द्वारा, 4 सिद्धांत (2) संस, यह अवधा रत करने के लिए कि माल का या से वाओं का या दोनों विद्युत -- का दाय खंड ड (1) में व णत में तय म से किसी र त से कब होता है व ध वारा, अन्यथा राज्य विधि (किसी अन्य स बना सकेगी । व्यक्तियों दवारा उत्पादित) विद्युत विक्रय (3)* * * *

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद अंतरराज्यीय आपूर्ति पर राज्य के बिक्री करों पर लगाम लगाता है। कोई राज्य कानून उस आपूर्ति को कर नहीं लगा सकता जो राज्य के बाहर होती है। राज्य में आयात पर भी नहीं। संसद यह सिद्धांत तय कर सकती है कि आपूर्ति कब अंतरराज्यीय है। इसी अनुच्छेद से अंतरराज्यीय आपूर्ति पर राज्य का जीएसटी शून्य है।

Article 286 in English