भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
अनुच्छेद 300क विधि के प्राधिकार के बिना को से वंचित न किया
- पक्षकार कार्यवाहियों जाना— व्यिक्त को उसकी से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं । शुअध्याय संपत्ति व्यक्तियों संपत्ति -- किसी व्यक्ति संपत्ति 1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची दवारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमुख” शब्दों का लोप किया गया । शब्दों का लोप किया गया । संविधान संविधान (चवालबीसवां (जे भाग 13 भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संपत्ति की रक्षा करता है। कानून के अधिकार के बिना किसी से संपत्ति नहीं छीनी जाएगी। चवालीसवें संशोधन ने 1978 में, पुराना संपत्ति अधिकार मूल अधिकारों से हटाए जाने के बाद, यह अनुच्छेद जोड़ा। संपत्ति अब संवैधानिक अधिकार है, मूल अधिकार नहीं। छीनते समय पीछे कानून होना चाहिए।