भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
अनुच्छेद 284 लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त वादकतार्ओं की जमा राशियों और
- निमित्त अन्य धनराशियों की ऐसी सभी धनराशियां, जो—
- (क) भारत सरकार या राज्य की सरकार द्वारा जुटाए गए या प्राप्त राजस्व या लोक धनराशियों से भिन्न हैं, और संघ या किसी राज्य के वादकर्ताओं कार्यकलाप के संबंध में किसी अधिकारी को उसकी उस हैसियत में; या अभिरक्षा -- --
- (ख) किसी वाद, विषय, लेखे या के नाम में जमा भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी न्यायालय को, यथास्थिति, नियोजित 1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची दवारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमुख” शब्दों का लोप किया गया । व्यक्तियों भारत का संविधान सं वधान 164 42--वित्त, संपत्ति, संविदाएं प्राप्त त होती है या उसके पास निक्षिप्त न की क जाती है, यथास्थिति, थ त, भारत के लोक लेखे में म या राज्य रा य के लोक लेखे में म जमा की जाएगी ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद दूसरे सार्वजनिक धन से जुड़ा है। अधिकारियों और अदालतों के पास रखी जमा राशियां और खास प्रयोजनों के लिए मिला धन सार्वजनिक खाते में जाता है। उनकी संरक्षा और प्रयोग विधान-मंडल के बनाए नियमों से होता है। ये राशियां संचित निधि का हिस्सा नहीं हैं।