अनुच्छेद 269क अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनक्रम में माल और सेवा कर
परेषण का उद्ग्रहण और संग्रहण—
(1) अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनुक्रम मैं प्रदाय पर माल और सेवा कर भारत सरकार द्वारा उद्ग और संग जाएगा तथा ऐसा कर उस रीति में, जो संसद् द्वारा, विधि दवारा, माल और सेवा कर परिषद् की पर उपबंधित की जाए, संघ और राज्यों के बीच प्रभाजित किया जाएगा भ. उद्गहीत संगहीत किया सिफारिशों पर प्रतिस्थापित । । संविधान 3. (छठा संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा (11-9-1956 से) अंतःस्थापित । । शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान 5. (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 9 द्वारा (16-9-2016 से) प्रतिस्थापित । । संविधान संविधान (छियाबीसवां संविधान 2--वित्त, संपत्ति, --
व्याख्या।स्पष्टीकरण इस खंड के प्रयोजन के लिए, भारत के राज्यक्षेत्र में आयात के अनुक्रम में माल के या सेवाओं के या दोनों के प्रदाय को अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनुक्रम मैं माल का या सेवाओं का या दोनों का प्रदाय समझा जाएगा ।
(2) खंड (1) के अधीन किसी राज्य को प्रभाजित रकम भारत की संचित निधि का भाग नहीं होगी ।
(3) जहां खंड (1) के अधीन उद्ग कर के रूप मैं संग रकम का उपयोग उद्गृहीत संगृहीत अनच्छेद द 246क के अधीन किसी राज्य दवारा उद्ग कर का संदाय करने के लिए उद्गहीत किया गया है, वहां ऐसी रकम भारत की संचित निधि का भाग नहीं होगी ।
(4) जहां अनुच्छेद द 246क के अधीन किसी राज्य दूवारा उद्ग कर के रूप में संगहीत उद्गृहीत रकम का उपयोग खंड (1) के अधीन उद्गहीत कर का संदाय करने के लिए किया गया है, वहां ऐसी रकम राज्य की संचित निधि का भाग नहीं होगी ।
(5) संसद्, द्वारा, प्रदाय के स्थान का और इस बात का कि माल का या सेवाओं का अथवा दोनों का प्रदाय अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के अनक्रम में कब संसद, विधि होता है, अवधारण करने संबंधी सिद्धांत बना सकेगी ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्यों के बीच आपूर्ति पर जीएसटी संभालता है। अंतरराज्यीय व्यापार के दौरान होने वाली माल और सेवा की आपूर्ति पर कर भारत सरकार लगाती और वसूलती है। यह कर संसद के कानून से, जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर, संघ और राज्यों में बांटा जाता है। अंतरराज्यीय हिस्से को एकीकृत कर कहते हैं।