भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 273 जूट पर और जूट उत्पादों पर शल्क के स्थान पर अनदान (1)

  1. जूट पर और जूट पर शुल्क निर्यात -- क के प्रत्येक वर्ष के शुद्ध ध आगम का कोई भाग उत्पादों निर्यात असम, बिहार, और पश्चिमी बंगाल राज्यों को सौंप दिए जाने के स्थान पर उन राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक वर्ष भारत की संचित निधि धूओड़िशा पर ऐसी राशियां भारित की जाएंगी जो विहित की जाएं ।
  2. (2) जूट पर और जूट उत्पादों पर जब तक भारत सरकार कोई शुल्क उद्ग करती रहती है तब तक या इस संविधान के प्रारंभ भ से दस वर्ष की समाप्ति तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, इस प्रकार विहित राशियां भारत की संचित निधि पर भारित बनी गी । निर्यात उद्गृहीत रहेंगी ।. 1. (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 11 (16-9-2016 से) अंतःस्थापित । । संविधान प्रतिस्थापित । उड़ीसा परिवर्तन) भारत का संविधान डा 2--वित्त, संपत्ति, (भाग संविदाएं और वाद) “विहित” (3) इस अनुच्छेद में, पद का वही अर्थ है जो अनुच्छेद द 270 में है । जिसमें

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद जूट उगाने वाले राज्यों को अनुदान देता है। जूट और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के बदले अनुदान हर वर्ष भारत की संचित निधि पर अधिरोपित होते हैं। असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल इन्हें पाते हैं। यह भुगतान तब तक चलेगा, जब तक संसद अन्यथा न करे।

Article 273 in English