भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 279 “शुद्ध आगम” आदि की गणना— (1) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों

  1. मैं “शुद्ध आगम” से किसी कर या शुल्क के संबंध में उसका वह आगम अभिप्रित है जो उसके संग्रहण के को घटाकर आए और उन उपबंधों के प्रयोजनों के लिए किसी में या उससे प्राप्त हए माने जा सकने वाले किसी कर या शुल्क का अथवा किसी कर या “शद्ध शुल्क के किसी भाग का शुद्ध आगम भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक दवारा अभिनिश्चित और प्रमाणित किया जाएगा और उसका प्रमाणपत्र अंतिम होगा । खर्चों क्षेत्र (2) जैसा ऊपर कहा गया है उसके और इस अध्याय के किसी अन्य अभिव्यक्त उपबंध के अधीन रहते हए, किसी ऐसी दशा में, इस भाग के अधीन किसी शुल्क या क्षाग कर का आगम किसी रॉज्य को सौंप दिया जाता है या सौंप दिया जाए, संसद् दवारा बनाई गई विधि या राष्ट्रपति का कोई आदेश श उस रीति का, जिससे आगम की गणना की जानी है, उस समय का, जिससे या और उस रीति का, जिससे कोई संदाय किए जाने हैं, एक वर्ष और द वषर् समायोजन करने का और अन्य आनुषं॑गिक या सहायक जिसमें विषयों का उपबंध कर सकेगा । जिसमें वित्तीय दूसरे वित्तीय वर्ष में 1. (साठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 की धारा 2 दूवारा (20-12-1988 से) “दो सौ पचास रुपए” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान संविधान 2--वित्त, संपत्ति,

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद शुद्ध प्राप्ति की परिभाषा देता है। किसी कर या कर्तव्य की शुद्ध प्राप्ति का अर्थ है, प्राप्ति में से वसूली का खर्च काटकर बची राशि। इस राशि पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक का प्रमाणपत्र अंतिम है। इससे बंटवारे के हिसाब ईमानदार और लेखा परीक्षित रहते हैं।

Article 279 in English