भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
अनुच्छेद 285 संघ की संपत्ति संपि त को राज्य रा य के कराधान से छूट— (1) वहां तक के सिवाय;
- जहां तक संसद विधि व द्वारा ध अन्यथा वारा अ यथा उपबंध करे, किसी राज्य रा द्वारा य वारा या राज्य रा य के भीतर किसी प्राधिकारी दूवारा धकार अधिरोपित वारा अ धरो पत सभी करों से संघ की संपत्ति संपि त को छूट होगी ।
- (2) जब तक संसद विधि व दवारा ध अन्यथा वारा अ यथा उपबंध न करे तब तक खंड ड (1) क कोई बात किसी राज्य रा य के भीतर किसी प्राधिकारी धकार को संघ की किसी संपत्ति संपि त पर कोई ऐसा कर, जिसका दायित्व दा य व इस संविधान सं वधान के प्रारंभ भ से ठीक क पहले, ऐसी संपत्ति संपि त पर था या माना जाता था, उद्गूहीत उ गृह त करने से तब तक नहीं ं रोकेगी जब तक वह कर उस राज्य रा में उद्गूहीत म उ गृह त होता रहता है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संघ की संपत्ति को राज्य करों से छूट देता है। संघ की संपत्ति सारे राज्य या स्थानीय संस्था करों से छूट है। संसद कानून से खास मामलों में यह छूट हटा सकती है। जहां राज्य का कानून व्यापार में लगी संघ संपत्ति को करे, वहां संसद कानून से छूट लागू कर सकती है।