भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 283 आकिस्मकता और लोक लेखाओं में जमा

  1. धनराशियों की आदि (1) भारत की संचित निधि और भारत की संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों आकस्मिकता निधि की ऐसी में धनराशियों के संदाय, उनसे अभिरक्षा धनराशियों के निकाले जाने, ऐसी में जमा धनराशियों से भिन्न भारत सरकार अभिरक्षा, निधियों दूवारा या उसकी ओर से प्राप्त लोक धनराशियों की भारत के लोक लेखे मैं निधियों उनके संदाय और ऐसे लेखे से धनराशियों के निकाले जाने का तथा विषयों से अभिरक्षा, संबंधित या उनके आनुषंगिक अन्य सभी विषयों का विनियमन संसद दूवारा बनाई गई पूर्वोक्त विधि द्वारा किया जाएगा और जब तक इस इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक राष्ट्रपति दवारा बनाए गए नियमों दूवारा किया जाएगा । निमित्त (2) राज्य की संचित निधि और राज्य की आकस्मिकता निधि की ऐसी में धनराशियों के संदाय, उनसे धनराशियों के निकाले जाने, ऐसी में जमा धनराशियों से भिन्न राज्य की सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त लोक अभिरक्षा, धनराशियों की राज्य के लोक लेखे में उनके संदाय और ऐसे लेखे से निधियों निधियों धनराशियों के निकाले जाने का तथा विषयों से संबंधित या उनके आनुषंगिक अन्य सभी विषयों का विनियमन राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि द्वारा अभिरक्षा, किया जाएगा और जब तक इस इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक पूर्वोक्त राज्य के राज्यपाल 1*** द्वारा बनाए गए नियमों दूवारा किया जाएगा ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद सार्वजनिक निधियों की संरक्षा से जुड़ा है। संचित और आकस्मिकता निधियों की संरक्षा, उनमें धन जमा होना और उनसे निकलना संसद या राज्य विधान-मंडल व्यवस्थित करते हैं। निधियों के बाहर रखे धन पर भी यही। विनियोग के बिना कोई निकासी नहीं।

Article 283 in English