भाग 12 · वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद

अनुच्छेद 298 व्यापार करने आदि की शक्ति संघ की और प्रत्येक राज्य की

  1. कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, व्यापार या कारबार करने और किसी प्रयोजन के लिए -- का अर्जन, धारण और व्ययन तथा संविदा करने पर, भी होगा: परंतु -- संपत्ति (क) जहां तक ऐसा व्यापार या कारबार या ऐसा प्रयोजन वह नहीं है जिसके संबंध में संसद् विधि बना सकती है वहां तक संघ की उक्त कार्यपालिका शक्ति प्रत्येक राज्य में उस राज्य के विधान के अधीन होगी; और
  2. (ख) जहां तक ऐसा व्यापार या कारबार या ऐसा प्रयोजन वह नहीं है जिसके संबंध में राज्य का विधि बना सकता है वहां तक प्रत्येक राज्य की उक्त कार्यपालिका शक्ति संसद् के विधान के अधीन होगी । विधान-मंडत्र 2. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 20 दूवारा (1-11-1956 से) प्रतिस्थापित । संविधान (चालीसवां 2--वित्त, संपत्ति,

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद सरकारों को व्यापार करने देता है। संघ और हर राज्य कोई भी व्यापार या व्यवसाय चला सकता है। वे इसके लिए संपत्ति ले सकते और रख सकते हैं। यह शक्ति सरकार के चुने सार्वजनिक प्रयोजनों की सेवा करती है। यह क्षेत्र के सामान्य खिलाड़ियों के साथ खड़ी रहती है।

Article 298 in English