भाग 6 · राज्य

अनुच्छेद 158 राज्यपाल के पद के लिए (1) राज्यपाल संसद् के किसी सदन का या

  1. पहली अनसूची में किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य शर्तें-- नहीं होगा और यदि संसद् के किसी सदन का या ऐसे किसी राज्य के विधान-मंडल के विनिर्दिष्ट किसी सदन का कोई सदस्य राज्यपाल नियुक्त हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान राज्यपाल के रूप में अपने पदग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है ।
  2. (2) राज्यपाल अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करे गा ।
  3. (3) राज्यपाल, बिना किराया दिए, अपने शासकीय निवासों के उपयोग का हकदार होगा और ऐसी और विशेषाधिकारों का भी, जो संसद, विधि दवारा, अवधारित करे और जब तक इस इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी और विशेषाधिकारों का, जो द अनुसूची में हैं हकदार होगा । उपलब्धियों, भत्तों 1 निमित्त (3क) जहां एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त उपलब्धियों, भत्तों दूसरी विनिर्दिष्ट किया जाता है वहां उस राज्यपाल को संदेय उपलब्धियां और उन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आबंटित किए जाएंगे जो राष्ट्रपति आदेश श द्वारा अवधारित करे ।
  4. (4) राज्यपाल की उपलब्धियां और उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए राज्यपात्र जाएंगे । भत्ते

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राज्यपाल पद की शर्तें तय करता है। राज्यपाल संसद या किसी राज्य विधान-मंडल का सदस्य नहीं रह सकता। वह कोई दूसरा लाभ का पद नहीं रख सकता। सरकारी निवास बिना किराए उपलब्ध रहते हैं। वेतन और भत्ते संसद तय करती है। एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो, तो वेतन राष्ट्रपति के आदेश से बंटता है।

Article 158 in English